मेरठ से हरिद्वार और ऋषिकेश तक नमो भारत ट्रेन कॉरिडोर विस्तार की योजना पर काम शुरू हो गया है। प्रस्तावित परियोजना पूरी होने के बाद दिल्ली से ऋषिकेश का सफर करीब ढाई घंटे में पूरा किया जा सकेगा, जिससे पर्यटन और कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलेगा।
देहरादून: उत्तराखंड के लिए परिवहन क्षेत्र में एक बड़ी पहल सामने आई है। दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस नेटवर्क को हरिद्वार और ऋषिकेश तक विस्तार देने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। प्रस्तावित कॉरिडोर के पूरा होने पर दिल्ली से ऋषिकेश और लक्ष्मणझूला तक पहुंचने का समय काफी कम हो जाएगा, जिससे यात्रियों, पर्यटकों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
हरिद्वार और ऋषिकेश तक पहुंचेगा नमो भारत नेटवर्क
दिल्ली-मेरठ रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) के विस्तार की योजना अब उत्तराखंड तक पहुंच चुकी है। प्रस्तावित परियोजना के तहत मेरठ के मोदीपुरम स्टेशन से शुरू होकर नया कॉरिडोर मुजफ्फरनगर, रुड़की, हरिद्वार और ऋषिकेश होते हुए लक्ष्मणझूला तक पहुंचेगा।
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यह परियोजना उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच कनेक्टिविटी को नई दिशा दे सकती है। वर्तमान में दिल्ली से ऋषिकेश पहुंचने में सड़क मार्ग से पांच से छह घंटे या उससे अधिक समय लग जाता है, विशेषकर वीकेंड और छुट्टियों के दौरान जाम की स्थिति में यात्रा और लंबी हो जाती है।
ढाई घंटे में पूरा हो सकेगा सफर
नमो भारत ट्रेन अपनी तेज रफ्तार और आधुनिक सुविधाओं के लिए जानी जाती है। यह ट्रेन लगभग 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने में सक्षम है। प्रस्तावित कॉरिडोर के माध्यम से करीब 230 किलोमीटर की दूरी को काफी कम समय में तय किया जा सकेगा।
योजना के अनुसार दिल्ली से ऋषिकेश का सफर लगभग ढाई घंटे में पूरा हो सकेगा। इससे यात्रियों को न केवल समय की बचत होगी, बल्कि सड़क मार्ग पर बढ़ते यातायात दबाव को भी कम करने में मदद मिलेगी।
डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया शुरू
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर उत्तराखंड सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) के बीच सहमति बन चुकी है। प्रस्तावित कॉरिडोर की कुल लंबाई लगभग 150 किलोमीटर बताई जा रही है।
उत्तराखंड सरकार ने राज्य के हिस्से में आने वाले हरिद्वार-ऋषिकेश खंड की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के लिए आवश्यक धनराशि स्वीकृत करने का निर्णय लिया है। अधिकारियों के अनुसार जल्द ही सर्वेक्षण और तकनीकी अध्ययन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिसके बाद परियोजना के क्रियान्वयन की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा।
पर्यटन को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
ऋषिकेश और हरिद्वार देश के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों में शामिल हैं। हर साल लाखों श्रद्धालु, पर्यटक और साहसिक खेलों के शौकीन यहां पहुंचते हैं। खासकर दिल्ली-एनसीआर से बड़ी संख्या में लोग वीकेंड पर ऋषिकेश का रुख करते हैं।
रिवर राफ्टिंग, कैंपिंग, योग और आध्यात्मिक पर्यटन के लिए प्रसिद्ध ऋषिकेश तक तेज रेल संपर्क बनने से पर्यटकों की संख्या और बढ़ सकती है। इसके साथ ही हरिद्वार के धार्मिक पर्यटन को भी नया प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
रोजगार और विकास को मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर रेल संपर्क से क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी। निर्माण चरण में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, जबकि परियोजना पूरी होने के बाद पर्यटन, होटल उद्योग, परिवहन और स्थानीय व्यापार को सीधा लाभ मिलेगा।
इसके अलावा दिल्ली, मेरठ, मुजफ्फरनगर, रुड़की, हरिद्वार और ऋषिकेश के बीच यात्रा आसान होने से लोगों की आवाजाही और व्यावसायिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी। परियोजना को उत्तराखंड के आर्थिक और पर्यटन विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सर्वे के बाद आगे बढ़ेगी योजना
फिलहाल परियोजना प्रारंभिक चरण में है और विस्तृत सर्वेक्षण एवं डीपीआर तैयार होने के बाद इसकी वास्तविक लागत, स्टेशन संख्या और निर्माण समयसीमा जैसी जानकारियां स्पष्ट होंगी। हालांकि इस प्रस्ताव ने उत्तराखंड और दिल्ली-एनसीआर के लोगों के बीच उत्साह जरूर बढ़ा दिया है।
यदि योजना निर्धारित समय के अनुसार आगे बढ़ती है तो आने वाले वर्षों में दिल्ली से ऋषिकेश और लक्ष्मणझूला तक की यात्रा पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज, सुविधाजनक और आरामदायक हो सकती है।









