डेनिस बावरिया हत्याकांड: ट्रेन में भीख मांगते पकड़े गए तीन आरोपी, अब तक 12 गिरफ्तार

डेनिस बावरिया हत्याकांड में झुंझुनूं पुलिस ने सचखंड एक्सप्रेस से भीख मांगते तीन फरार आरोपियों को पकड़ा। कई रूट बदलकर छिपते रहे, केस में अब तक 12 गिरफ्तारियाँ।

झुंझुनूं पुलिस ने चर्चित डेनिस बावरिया हत्याकांड में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए तीन मुख्य आरोपियों को सचखंड एक्सप्रेस के जनरल डिब्बे में भीख मांगते हुए गिरफ्तार किया। फरारी के दौरान तंगी से जूझ रहे आरोपी कई राज्यों में ट्रेनें बदलकर पुलिस से बचने की कोशिश कर रहे थे।

Dennis Bawaria Murder Case: डेनिस बावरिया हत्याकांड में झुंझुनूं पुलिस ने तीन महत्वपूर्ण आरोपियों हितेश, प्रशांत उर्फ पोखर और अजय उर्फ संदीप को गिरफ्तार कर लिया। ये आरोपी एक माह से फरार थे और आर्थिक तंगी के कारण ट्रेन में भीख मांगकर गुजारा कर रहे थे। पुलिस ने उन्हें औरंगाबाद से दिल्ली जा रही सचखंड एक्सप्रेस से दबोचा। जांच में सामने आया कि आरोपी पहचान छिपाने के लिए अमृतसर, दिल्ली, आगरा, बीना, धौलपुर, औरंगाबाद व नांदेड़ सहित कई रूटों पर ट्रेन बदलते घूमते रहे। घटना के बाद आरोपियों में दो अलग-अलग गुट बन गए और परिवार व परिचितों ने डर के कारण उनसे संपर्क भी तोड़ दिया। अब तक इस केस में कुल 12 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। डेनिस का 20 अक्टूबर को अपहरण, हमला और लूट की गई थी, और 21 अक्टूबर को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई, जिसके बाद मामला हत्या में बदल गया।

ट्रेन में भीख मांगते मिले तीन मुख्य आरोपी

एक माह से फरार चल रहे तीन आरोपी हितेश, प्रशांत उर्फ पोखर और अजय उर्फ संदीप को पुलिस ने सचखंड एक्सप्रेस के जनरल डिब्बे से गिरफ्तार किया। तीनों आरोपी यात्रियों से भीख मांग रहे थे। पुलिस टीम ने गुप्त सूचना पर दबिश दी और उन्हें मौके से हिरासत में लिया।

फरारी के दौरान ठिकाने छूटे, तंगी में भीख बना सहारा

घटना के बाद आरोपियों में दो गुट बन गए थे, जबकि गिरफ्तार तीनों आरोपी लगातार साथ रहे। परिवार और नजदीकी लोग गिरफ्तारी के डर से उनसे बात करना बंद कर चुके थे। आर्थिक तंगी इतनी बढ़ गई कि आरोपी ट्रेनों और मंदिरों के बाहर भीख मांगकर गुजारा करने लगे। पहचान छिपाने के लिए वे फटे कपड़े पहनकर सामान्य भिखारियों की तरह घूमते रहे और लगातार ट्रेन व रूट बदलते रहे।

अपहरण, लूट और हत्या में बदला पूरा मामला

20 अक्टूबर को डेनिस उर्फ नरेश कुमार ने बयान दिया था कि कैंपर गाड़ी में आए आरोपियों ने उसे चूरू बाइपास पर टक्कर मारकर घेर लिया। लोहे की पाइपों से हमला कर अपहरण किया और रसोड़ा गांव ले जाकर लूटपाट व मारपीट की। उसकी हालत बिगड़ने पर एसएमएस अस्पताल जयपुर में भर्ती कराया गया, जहां 21 अक्टूबर को उसकी मौत हो गई। बाद में मामले में हत्या और एससी-एसटी एक्ट की धाराएं जोड़ी गईं। पुलिस अब तक मामले में 12 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।

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