DGCA ने पायलट लाइसेंस के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है, जिसमें 12वीं में फिजिक्स और मैथ्स की अनिवार्यता खत्म करने की बात कही गई है। अगर यह लागू होता है, तो आर्ट्स और कॉमर्स के छात्र भी कमर्शियल और एयरलाइन पायलट बनने के योग्य होंगे। इस कदम से एविएशन सेक्टर में छात्रों के लिए अवसर बढ़ेंगे।
DGCA Rule Change Proposal: भारत में पायलट बनने के लिए अब सिर्फ साइंस स्ट्रीम तक सीमित रहना जरूरी नहीं रहेगा। प्रस्ताव के अनुसार, 12वीं पास होना पर्याप्त होगा और स्ट्रीम कोई भी हो सकती है, जिससे आर्ट्स और कॉमर्स स्टूडेंट्स भी कमर्शियल और एयरलाइन पायलट लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकेंगे। यह बदलाव छात्रों को एविएशन सेक्टर में नए अवसर और करियर विकल्प चुनने की स्वतंत्रता देगा।
क्या बदलाव होने वाले हैं?
DGCA के ड्राफ्ट के मुताबिक, स्टूडेंट पायलट लाइसेंस के लिए उम्मीदवार का 10वीं पास होना जरूरी होगा। प्राइवेट पायलट लाइसेंस (PPL) के लिए अभी भी 12वीं पास होना अनिवार्य रहेगा। सबसे बड़ा बदलाव CPL और ATPL में होगा, जहां अब 12वीं पास होना पर्याप्त माना जाएगा और स्ट्रीम कोई भी हो सकती है। इसका मकसद एविएशन सेक्टर में ज्यादा छात्रों को अवसर देना और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत पढ़ाई को लचीला बनाना है।

फिजिक्स और मैथ्स की ट्रेनिंग जरूरी रहेगी
हालांकि नियम में स्ट्रीम की बाध्यता खत्म हो रही है, लेकिन पायलट ट्रेनिंग में फिजिक्स, मैथ्स, मौसम विज्ञान और नेविगेशन जैसे विषय शामिल रहेंगे। आर्ट्स और कॉमर्स के छात्रों के लिए बेसिक फाउंडेशन क्लासेज़ की व्यवस्था की जा सकती है। इससे ट्रेनिंग थोड़ा लंबा और महंगा हो सकता है, लेकिन सुरक्षा और तकनीकी दक्षता हमेशा प्राथमिक रहेगी। DGCA सुनिश्चित करेगा कि हर स्ट्रीम के छात्रों की ट्रेनिंग और टेस्टिंग का स्तर समान रहे।
यदि DGCA का प्रस्ताव लागू होता है, तो आर्ट्स और कॉमर्स के छात्र भी कमर्शियल पायलट बनने का सपना पूरा कर सकेंगे। यह कदम एविएशन सेक्टर में अवसर बढ़ाने और छात्रों को करियर विकल्प चुनने की स्वतंत्रता देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।











