धौलपुर में एक दिन में उठीं 6 अर्थियां, दो सड़क हादसों ने उजाड़ दिए तीन परिवार

धौलपुर में दो अलग-अलग सड़क हादसों में छह लोगों की मौत के बाद बुधवार को एक साथ छह अर्थियां उठीं। बेटे ने पिता को मुखाग्नि दी, 29 साल पुराना हादसा याद आया।

धौलपुर में दो अलग-अलग सड़क हादसों में छह लोगों की मौत के बाद बुधवार को चंबल मुक्तिधाम में एक साथ छह अंतिम संस्कार हुए। त्रिवेदी और जैन परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूटा। बेटे ने पिता को कांपते हाथों से मुखाग्नि दी।

धौलपुर: राजस्थान के धौलपुर में बुधवार का दिन पूरे शहर के लिए बेहद दुखद रहा। मंगलवार को हुए दो अलग-अलग सड़क हादसों में जान गंवाने वाले छह लोगों की अंतिम यात्राएं एक ही दिन चंबल नदी किनारे स्थित मुक्तिधाम पहुंचीं। एक के बाद एक छह अर्थियां उठने से शहर में शोक की लहर दौड़ गई। मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार के दौरान परिजनों की चीख-पुकार और सिसकियों ने माहौल को गमगीन कर दिया। इन छह मौतों में तीन लोग एक ही परिवार से थे, जबकि दूसरे हादसे में भी एक ही परिवार और रिश्तेदारों से जुड़े तीन लोगों की जान चली गई। अंतिम संस्कार के दौरान सबसे भावुक दृश्य तब सामने आया, जब एक बेटे ने अपने पिता को कांपते हाथों से मुखाग्नि दी। इस घटना ने धौलपुर के लोगों को करीब तीन दशक पुराने उस हादसे की भी याद दिला दी, जब एक साथ छह लोगों की मौत के बाद इसी तरह कई अर्थियां उठी थीं।

महाकाल दर्शन के लिए निकला था त्रिवेदी परिवार

पहला हादसा उस समय हुआ जब धौलपुर के पुरानी सब्जी मंडी क्षेत्र का त्रिवेदी परिवार मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर के दर्शन के लिए जा रहा था। रास्ते में उनकी कार एक डंपर से टकरा गई। दुर्घटना इतनी गंभीर थी कि परिवार की तीन सदस्यों की जान चली गई।

हादसे में कपड़ा व्यवसायी सुनील त्रिवेदी की पत्नी सोमा, 65 वर्ष, बेटे अंकुर, 42 वर्ष, और बहू अर्चना, 40 वर्ष, की मौत हो गई। हादसे के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद तीनों शव देर रात धौलपुर लाए गए।

जिस घर में कुछ समय पहले धार्मिक यात्रा और महाकाल के दर्शन को लेकर उत्साह था, वहीं अचानक मातम छा गया। बुधवार सुबह जब तीनों की अंतिम यात्रा घर से निकली तो बड़ी संख्या में रिश्तेदार, परिचित और स्थानीय लोग परिवार को सांत्वना देने पहुंचे।

एक ही परिवार में नहीं बची कोई महिला

त्रिवेदी परिवार पर हुए हादसे का सबसे बड़ा दर्द यह है कि परिवार की दोनों बहुएं और मां अब नहीं रहीं। इस हादसे के बाद घर में सुनील त्रिवेदी, उनके छोटे बेटे रत्नेश और दोनों पोते अंश और तेजस रह गए हैं।

परिवार की बेटियां भी पिता और भाइयों को संभालने के लिए धौलपुर पहुंचीं। उनके लिए अपनी मां और भाभी को एक साथ खोना बेहद पीड़ादायक था। घर में जहां कुछ दिन पहले यात्रा और धार्मिक दर्शन की तैयारियां थीं, वहां अब सन्नाटा और शोक पसरा हुआ है।

अंतिम संस्कार के दौरान सुनील त्रिवेदी ने अपनी पत्नी सोमा को मुखाग्नि दी। वहीं छोटे बेटे रत्नेश ने अपने भतीजे अंश के साथ अंकुर और अर्चना का अंतिम संस्कार किया। तीनों शवों को एक साथ अंतिम विदाई देते समय परिवार और वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।

दूसरे सड़क हादसे में भी तीन लोगों की मौत

इसी दौरान धौलपुर-भरतपुर हाईवे पर हुए दूसरे सड़क हादसे ने एक अन्य परिवार को भी गहरे सदमे में डाल दिया। हादसे में सरिया व्यवसायी राजकुमार जैन, उनके भतीजे और तेल व्यवसायी विजय जैन तथा विजय जैन के बेटे आदी जैन की मौत हो गई।

बताया गया कि तीनों जयपुर के पदमपुरा स्थित श्रीजी के दर्शन कर वापस लौट रहे थे। रास्ते में उनका वाहन दुर्घटना का शिकार हो गया। हादसे की सूचना परिवार तक पहुंचते ही घरों में चीख-पुकार मच गई।

तीनों शव जब धौलपुर पहुंचे तो परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। आसपास रहने वाले लोग भी परिवार को ढांढस बंधाने के लिए पहुंचे। बुधवार को तीनों की अंतिम यात्रा भी चंबल मुक्तिधाम पहुंची, जहां बड़ी संख्या में शहरवासियों ने उन्हें अंतिम विदाई दी।

बेटे ने पिता को कांपते हाथों से दी मुखाग्नि

राजकुमार जैन के अंतिम संस्कार के दौरान बेहद भावुक दृश्य देखने को मिला। उनके बेटे मयंक जैन ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। पिता को अंतिम विदाई देते समय मयंक के हाथ कांप रहे थे और वहां मौजूद लोग इस दृश्य को देखकर भावुक हो गए।

जिस पिता के साथ बेटे ने जिंदगी के शुरुआती कदम सीखे हों, उसी पिता की चिता को अग्नि देना परिवार के लिए सबसे कठिन क्षणों में से एक होता है। मुक्तिधाम में मौजूद लोगों ने परिवार के इस दुख को महसूस किया।

वहीं विजय जैन और उनके बेटे आदी जैन का अंतिम संस्कार विजय जैन के बड़े बेटे ने किया। एक के बाद एक तीनों शवों के अंतिम संस्कार के बीच मुक्तिधाम का वातावरण पूरी तरह शोक में डूब गया।

29 साल पुराने हादसे की याद हुई ताजा

बुधवार को धौलपुर में एक साथ छह अर्थियां उठने के दृश्य ने शहरवासियों को 29 साल पुराने एक दर्दनाक हादसे की याद दिला दी। 12 अक्टूबर 1997 को जयपुर के पास एक टाटा सूमो दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। उस हादसे में धौलपुर के हनुमान तिराहे क्षेत्र में रहने वाले तिवारी परिवार के छह लोगों की मौत हुई थी।

उस समय भी धौलपुर में एक साथ छह लोगों की अर्थियां उठी थीं। इतने वर्षों बाद एक बार फिर छह लोगों की एक साथ अंतिम यात्राएं निकलने से पुराने जख्म ताजा हो गए।

स्थानीय लोगों के लिए दोनों घटनाओं के बीच यह समानता बेहद भावुक करने वाली रही। हालांकि दोनों घटनाएं अलग-अलग समय और परिस्थितियों में हुईं, लेकिन एक ही दिन छह लोगों की मौत और छह अंतिम यात्राओं ने शहर को पुराने दर्द की याद दिला दी।

चंबल मुक्तिधाम में गमगीन रहा माहौल

बुधवार को चंबल नदी किनारे स्थित मुक्तिधाम में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। मृतकों के रिश्तेदारों और परिचितों के साथ स्थानीय लोग भी अंतिम संस्कार में शामिल हुए।

एक के बाद एक अर्थियों के पहुंचने से पूरा माहौल गमगीन हो गया। परिजनों की सिसकियां और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के बीच हर तरफ शोक का वातावरण था। शहर के लोगों ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई और उन्हें इस कठिन समय में संभलने की ताकत देने की प्रार्थना की।

इन हादसों ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। तेज रफ्तार, भारी वाहनों की आवाजाही और सड़क पर होने वाली दुर्घटनाएं परिवारों को पलभर में गहरे संकट में डाल सकती हैं। लगातार हो रहे सड़क हादसों को देखते हुए सुरक्षित ड्राइविंग और यातायात नियमों के पालन की जरूरत भी सामने आती है।

दो हादसों ने तीन परिवारों की दुनिया बदली

धौलपुर में मंगलवार को हुए दो अलग-अलग सड़क हादसों ने तीन परिवारों की जिंदगी पूरी तरह बदल दी। छह लोगों की मौत ने कई रिश्तों को हमेशा के लिए खत्म कर दिया। किसी ने मां खोई, किसी ने पत्नी, किसी ने भाई, किसी ने पिता और किसी ने बेटा।

त्रिवेदी परिवार के लिए यह हादसा इसलिए भी बेहद दुखद है क्योंकि परिवार धार्मिक यात्रा पर निकला था। वहीं जैन परिवार के लिए भी दर्शन से लौटते समय हुई दुर्घटना ने खुशियों को मातम में बदल दिया।

बुधवार को छह लोगों की अंतिम विदाई के साथ धौलपुर ने एक बार फिर सड़क हादसों का भयावह चेहरा देखा। 29 साल पुराने हादसे की याद के साथ इस घटना ने शहर को गहरे शोक में डुबो दिया।

सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

धौलपुर की यह घटना केवल छह परिवारों के निजी दुख तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़क सुरक्षा की गंभीर चुनौती की ओर भी ध्यान खींचती है। एक ही दिन दो अलग-अलग हादसों में छह लोगों की मौत ने यह सवाल खड़ा किया है कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा उपायों को और मजबूत कैसे किया जाए।

परिवारों ने अपने अपनों को अंतिम विदाई दे दी है, लेकिन उनके पीछे छूटे लोगों के लिए यह दुख लंबे समय तक बना रहेगा। हादसे के कारणों की जांच और जिम्मेदार परिस्थितियों की पहचान संबंधित अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण होगी।

बुधवार को धौलपुर की छह अर्थियां सिर्फ छह लोगों की अंतिम विदाई नहीं थीं, बल्कि उन परिवारों की खुशियों और भविष्य की योजनाओं के अचानक खत्म हो जाने की दर्दनाक कहानी भी थीं। चंबल किनारे जलती छह चिताओं ने पूरे शहर को यह याद दिलाया कि सड़क पर एक छोटी सी चूक भी कई जिंदगियों को हमेशा के लिए बदल सकती है।

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