बॉलीवुड एक्ट्रेस दीया मिर्जा ने देश के माता-पिता के नाम एक भावुक संदेश साझा करते हुए बेटों की परवरिश को लेकर जरूरी बात कही है। दिल्ली-NCR और बिहार में बेटियों के साथ सामने आईं यौन हिंसा की घटनाओं के बीच उन्होंने लड़कियों पर पाबंदियां लगाने के बजाय बेटों को सही-गलत की समझ देने पर जोर दिया।
एंटरटेनमेंट न्यूज़: बॉलीवुड अभिनेत्री दीया मिर्जा ने महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण संदेश साझा किया है। हालिया घटनाओं के बीच अभिनेत्री ने माता-पिता से बेटियों पर पाबंदियां बढ़ाने के बजाय बेटों की परवरिश और उनके व्यवहार पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों को कम उम्र से ही सम्मान, सहमति यानी Consent, व्यक्तिगत सीमाओं यानी Boundaries और अस्वीकृति यानी Rejection को समझना सिखाया जाना चाहिए।
दीया मिर्जा ने यह विचार सोशल मीडिया पर साझा किए हैं। उनका संदेश ऐसे समय आया है जब दिल्ली-NCR और बिहार के कुछ हिस्सों में महिलाओं और नाबालिग लड़कियों से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न के मामलों को लेकर सार्वजनिक सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी पर चर्चा हो रही है।
‘लड़कियों को नुकसान से बचने के लिए नहीं, लड़कों को नुकसान न पहुंचाने के लिए पालें’
दीया मिर्जा ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक संदेश साझा किया, जिसमें बेटियों की सुरक्षा के नजरिए को बदलने की बात कही गई। इसके साथ अभिनेत्री ने माता-पिता की भूमिका और बेटों को दिए जाने वाले संस्कारों पर विस्तार से अपनी बात रखी। अभिनेत्री ने बताया कि वह अपने बेटे को बचपन से ही दूसरों के प्रति देखभाल, सम्मान, सहानुभूति और दयालुता का महत्व समझाने की कोशिश करती हैं।
उनके अनुसार, बच्चों की परवरिश में केवल यह बताना पर्याप्त नहीं है कि उन्हें क्या करना चाहिए, बल्कि यह समझाना भी जरूरी है कि दूसरे व्यक्ति की इच्छा और सीमाओं का सम्मान कैसे किया जाए।
Consent का मतलब सिर्फ ‘ना’ का न होना नहीं

दीया मिर्जा ने Consent यानी सहमति को लेकर भी अपनी बात स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि सहमति का अर्थ केवल किसी व्यक्ति की ओर से ‘ना’ नहीं कहना नहीं है। उनके संदेश के मुताबिक, वास्तविक सहमति ऐसी ‘हां’ है जो अपनी इच्छा से और सहज तरीके से दी गई हो। उन्होंने यह भी समझाने की कोशिश की कि किसी व्यक्ति को किसी दूसरे इंसान का ध्यान, स्नेह या निजी संबंध देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। अभिनेत्री ने Rejection यानी अस्वीकृति को स्वीकार करने की क्षमता को भी बच्चों की परवरिश का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
उनके अनुसार, किसी व्यक्ति का मना करना अपमान नहीं माना जाना चाहिए और न ही उसे बदलने, चुनौती देने या बहस के जरिए अपनी इच्छा के मुताबिक करने की कोशिश होनी चाहिए।
बच्चों को Boundaries का सम्मान सिखाने पर जोर
दीया ने व्यक्तिगत सीमाओं यानी Boundaries को पहचानने और उनका सम्मान करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि असहजता हमेशा स्पष्ट शब्दों में व्यक्त नहीं होती। इसलिए बच्चों को दूसरे व्यक्ति के व्यवहार और संकेतों को समझने के साथ-साथ यह भी सिखाया जाना चाहिए कि असहज स्थिति में पीछे हटना क्यों जरूरी है।
उनका संदेश मुख्य रूप से इस विचार पर केंद्रित है कि सुरक्षित समाज बनाने की जिम्मेदारी केवल लड़कियों को सावधान रहने की सलाह देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। परिवारों में लड़कों को भी सम्मानजनक व्यवहार और जिम्मेदारी के बारे में समान रूप से शिक्षित करना जरूरी है।
हालिया घटनाओं के बीच सामने आया संदेश
दीया मिर्जा की पोस्ट ऐसे समय सामने आई जब दिल्ली-NCR में महिलाओं और नाबालिगों से जुड़े कुछ कथित यौन अपराधों के मामले चर्चा में रहे। बिहार के कुछ जिलों में भी महिलाओं और लड़कियों के साथ कथित उत्पीड़न की घटनाओं को लेकर सवाल उठे। इन घटनाओं ने सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था तथा सामाजिक जिम्मेदारी को लेकर बहस को फिर सामने ला दिया है। दिल्ली-NCR से जुड़े कुछ मामलों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी संज्ञान लिए जाने की बात सामने आई है।
हालांकि, सोशल मीडिया पर अभिनेत्री का संदेश किसी एक मामले तक सीमित नहीं है। उन्होंने इसे बच्चों की परवरिश और समाज में सम्मानजनक व्यवहार की व्यापक जरूरत से जोड़ा है।












