कर्नाटक CM डीके शिवकुमार ने कहा कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की चुनावी प्रक्रिया पर उठाई गई चिंताएं सही साबित हुई हैं। ECI के दो आयुक्तों की 14 आपत्तियों की रिपोर्ट के बीच आयोग ने SIR फैसले सर्वसम्मत बताए हैं।
बेंगलुरु: कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने रविवार को कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चुनावी प्रक्रिया में कथित “वोट चोरी” को लेकर जो चिंताएं जताई थीं, वे चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े हालिया खुलासों के बाद सही साबित हुई हैं। शिवकुमार ने कहा कि इस मुद्दे पर कांग्रेस की अगली रणनीति कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक में तय की जाएगी। इसके बाद विपक्षी दल भी अलग से बैठक कर आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे।
हालिया विवाद उस रिपोर्ट के बाद तेज हुआ है, जिसमें दावा किया गया कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के दौरान मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और बहाली, Form 6 में बदलाव तथा चुनावी डेटाबेस से जुड़े फैसलों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज कराई थी। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों के बीच स्पष्ट किया है कि SIR समेत उसके सभी अंतिम फैसले तीनों निर्वाचन आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए थे।
शिवकुमार बोले- देश के सामने आया पूरा मामला
शिवकुमार ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने जो बातें उठाई थीं, वे अब सामने आई जानकारी से पुष्ट होती दिखाई दे रही हैं। उन्होंने कहा कि वह इसी मुद्दे पर आगे की रणनीति पर चर्चा करने आए हैं और अब पूरा देश इस मामले से अवगत हो चुका है।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली अब सार्वजनिक जांच के दायरे में आ गई है और इस मुद्दे पर सभी दलों के बीच चर्चा जरूरी है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब निर्वाचन आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, संधू और जोशी ने अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच कई फैसलों और आदेशों पर आपत्तियां दर्ज की थीं।
BJP के आरोप पर शिवकुमार का जवाब
भारतीय जनता पार्टी की ओर से कांग्रेस पर चुनावी हार की निराशा में “वोट चोरी” का मुद्दा उठाने का आरोप लगाया गया है। इसके जवाब में शिवकुमार ने कहा कि जिन मुद्दों पर कांग्रेस ने सवाल उठाए थे, उन्हीं से मिलते-जुलते मुद्दों पर चुनाव आयोग के भीतर भी आपत्तियां दर्ज की गई थीं।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में बहुमत महत्वपूर्ण होता है, लेकिन आयोग के दो सदस्यों ने कथित तौर पर कुछ फैसलों को लेकर असहमति दर्ज की थी।
हालांकि, BJP ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। पार्टी की ओर से कहा गया है कि राहुल गांधी के आरोप आधारहीन हैं और विपक्ष को चुनाव जीतने के लिए राजनीतिक और संगठनात्मक स्तर पर काम करना चाहिए।
चुनाव आयोग ने SIR पर क्या कहा?
चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेदों की खबरों के बीच स्पष्ट किया है कि Special Intensive Revision (SIR) से जुड़े उसके आदेश तीनों निर्वाचन आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी के बाद जारी किए गए थे।
26 सितंबर को हुई पूर्ण आयोग की बैठक के बाद आयोग ने कहा कि देशभर में SIR लागू करने के आदेश को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी, तीनों की मंजूरी हासिल थी। आयोग ने यह भी कहा कि Form 6 में किए गए बदलावों को सुप्रीम कोर्ट की ओर से बरकरार रखा गया है।
आयोग ने यह भी कहा कि व्यक्तिगत स्तर पर दर्ज टिप्पणियां या अलग-अलग राय अपने आप में आयोग का अंतिम निर्णय नहीं होतीं। उसके अनुसार, अंतिम फैसले संस्थागत प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं।
14 आपत्तियों की रिपोर्ट से कैसे बढ़ा विवाद?
विवाद की शुरुआत उस रिपोर्ट से हुई जिसमें दावा किया गया कि निर्वाचन आयुक्त संधू और जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की।
रिपोर्ट में जिन मुद्दों का उल्लेख किया गया, उनमें Form 6 में बदलाव, मतदाता डेटाबेस के केंद्रीकरण, मतदाता नाम हटाने से संबंधित प्रक्रियाएं और चुनावी आईटी सिस्टम की निगरानी शामिल थीं।
इसके बाद चुनाव आयोग ने कहा कि दोनों निर्वाचन आयुक्तों की ओर से कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र आयोग की नीति या आईटी व्यवस्था से संबंधित नहीं थे, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी के कामकाज से जुड़े थे। आयोग ने यह भी कहा कि संबंधित अधिकारी के कार्यों से जुड़े पुनर्वितरण आदेश लागू नहीं हुए थे।
कांग्रेस तय करेगी आगे की रणनीति
डीके शिवकुमार ने कहा कि कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इसके बाद विपक्षी दल भी बैठक कर आगे की कार्रवाई पर विचार करेंगे।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की भूमिका और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवाल अब व्यापक सार्वजनिक चर्चा का विषय बन चुके हैं। कांग्रेस इस मुद्दे को आगे किस मंच पर और किस तरीके से उठाएगी, इसका फैसला पार्टी की आगामी बैठकों में किया जाएगा।
इस राजनीतिक विवाद के बीच चुनाव आयोग ने अपनी तरफ से SIR और उससे जुड़े फैसलों को सर्वसम्मत बताया है। इसलिए फिलहाल इस पूरे मामले में कांग्रेस और चुनाव आयोग के दावों के बीच स्पष्ट अंतर बना हुआ है।
कर्नाटक में बोर्ड और निगमों में नियुक्तियों पर भी बोले
डीके शिवकुमार ने कर्नाटक में बोर्ड और निगमों के अध्यक्षों की नियुक्ति से जुड़े सवालों का भी जवाब दिया।
उन्होंने कहा कि इस विषय पर दिल्ली में पहले ही फैसला हो चुका है। उन्होंने बताया कि वरिष्ठ विधायकों को समायोजित करने का निर्णय लिया गया है और पार्टी के कार्यकर्ताओं को भी जल्द जिम्मेदारियां दी जाएंगी।
मंत्रिमंडल में महिलाओं को प्रतिनिधित्व दिए जाने से जुड़े सवाल पर शिवकुमार ने कहा कि इस विषय पर उनकी अगली दिल्ली यात्रा के दौरान चर्चा की जाएगी।
गडग में लापता इंजीनियर पर क्या बोले शिवकुमार?
कर्नाटक के गडग जिले में एक सहायक कार्यकारी अभियंता के लापता होने के मामले पर भी मुख्यमंत्री ने जानकारी दी।
शिवकुमार ने कहा कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ पहले शिकायतें मिल चुकी थीं और मामले की जांच चल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी कानून के तहत अपेक्षित तरीके से काम नहीं कर रहा था और साइटों का दौरा नहीं करता था।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, अधिकारी पहले भी लापता हुआ था और उसका पता अजमेर तथा हैदराबाद समेत अन्य स्थानों पर लगाया गया था। उन्होंने कहा कि उसकी गतिविधियों का पता लगाया जा रहा है और उसे वापस लाया जाएगा।
काम की वीडियो रिकॉर्डिंग के निर्देश
शिवकुमार ने सरकारी निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और फर्जी बिलिंग रोकने के लिए वीडियो रिकॉर्डिंग व्यवस्था का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि किसी भी काम की शुरुआत से पहले और काम पूरा होने के बाद उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग की जाए। उनके अनुसार, संबंधित अधिकारी ने इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया था।
सरकार का कहना है कि काम की शुरुआत और पूरा होने की स्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड होने से सरकारी परियोजनाओं की निगरानी और भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाई जा सकती है।
Byramangala में जमीन अधिग्रहण पर किसानों का प्रदर्शन
रमनगरा के पास प्रस्तावित Bidadi township के लिए जमीन अधिग्रहण के विरोध में Byramangala में किसानों द्वारा सड़क रोके जाने के सवाल पर भी शिवकुमार ने प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति पर जमीन देने के लिए दबाव नहीं बनाया जा रहा है। उनके मुताबिक, जो लोग अपनी जमीन देना चाहते हैं, वे ऐसा कर सकते हैं और जो नहीं देना चाहते, उन्हें मजबूर नहीं किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि सड़क रोकने से आम लोगों को परेशानी होती है और प्रदर्शन के बजाय इस मुद्दे को संबंधित प्रक्रिया के तहत उठाया जाना चाहिए।
चुनाव आयोग विवाद में आगे क्या?
फिलहाल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, SIR और मतदाता सूची से जुड़े फैसले राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं। एक तरफ कांग्रेस और विपक्षी नेता आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग ने SIR समेत अपने फैसलों को तीनों निर्वाचन आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी वाला बताया है।
डीके शिवकुमार के ताजा बयान के बाद यह मुद्दा कांग्रेस कार्यसमिति और विपक्षी दलों की बैठकों में आगे बढ़ने की संभावना है। आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की ओर से अतिरिक्त स्पष्टीकरण और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं इस विवाद की दिशा तय करेंगी।









