Lee Jae-myung का भारत दौरा दोनों देशों के रिश्तों में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। अपने पहले आधिकारिक भारत दौरे पर नई दिल्ली पहुंचे दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति का गर्मजोशी से स्वागत किया गया।
नई दिल्ली: Lee Jae-myung के भारत आगमन के साथ India और South Korea के रिश्तों में एक अहम पड़ाव जुड़ गया है। राष्ट्रपति ली का यह पहला भारत दौरा है, जिसे दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरे की जानकारी Ministry of External Affairs India के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने सोशल मीडिया के जरिए दी और राष्ट्रपति ली का भारत में गर्मजोशी से स्वागत किया।
भारत-कोरिया संबंधों को नई दिशा
भारत और दक्षिण कोरिया के बीच पहले से मौजूद ‘स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ को इस दौरे से नई गति मिलने की उम्मीद है। राष्ट्रपति ली की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियां तेजी से बदल रही हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया के माध्यम से राष्ट्रपति के आगमन की पुष्टि करते हुए इसे द्विपक्षीय संबंधों के लिए अहम बताया। नई दिल्ली पहुंचने पर केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने उनका औपचारिक स्वागत किया।
पीएम मोदी के साथ अहम बैठक

राष्ट्रपति ली आज, सोमवार को भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। यह बैठक कई अहम वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर केंद्रित होगी।दोनों नेताओं के बीच यह हाल के महीनों में तीसरी आमने-सामने की मुलाकात होगी, इससे पहले वे जी7 और जी20 शिखर सम्मेलनों के दौरान मिल चुके हैं। इस बार बातचीत में खास तौर पर ऊर्जा संकट, वैश्विक सप्लाई चेन और आर्थिक सहयोग पर फोकस रहने की संभावना है।
मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। ऐसे में भारत और दक्षिण कोरिया के बीच ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित और स्थिर बनाने पर रणनीतिक चर्चा होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक दोनों देशों को ऊर्जा सुरक्षा, आवश्यक खनिजों की आपूर्ति और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का अवसर दे सकती है।
टेक्नोलॉजी और रक्षा सहयोग पर जोर
इस दौरे के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, शिपबिल्डिंग, मैरीटाइम इंडस्ट्री और रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी बातचीत होगी। दक्षिण कोरिया इन क्षेत्रों में अग्रणी देशों में शामिल है, जबकि भारत तेजी से उभरता हुआ वैश्विक टेक्नोलॉजी हब बन रहा है। दोनों देश मिलकर इन क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाएं और निवेश के नए अवसर तलाश सकते हैं, जिससे आर्थिक विकास को गति मिल सकती है।
भारत दक्षिण कोरियाई कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण उत्पादन केंद्र और बड़ा उपभोक्ता बाजार बन चुका है। इस यात्रा के दौरान राष्ट्रपति ली एक बिजनेस फोरम में भी शामिल हो सकते हैं, जहां वे भारतीय और कोरियाई उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।










