दून अस्पताल में मरीजों को बड़ी राहत, अब सप्ताह में पांच दिन चलेगी न्यूरो ओपीडी; इलाज के लिए कम करना होगा इंतजार

देहरादून के दून अस्पताल में न्यूरो ओपीडी अब मंगलवार से शनिवार तक चलेगी। मरीजों को विशेषज्ञ परामर्श, नियमित जांच और फॉलोअप के लिए अधिक दिन मिलेंगे।
दून अस्पताल में मरीजों को बड़ी राहत, अब सप्ताह में पांच दिन चलेगी न्यूरो ओपीडी; इलाज के लिए कम करना होगा इंतजार
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उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित दून अस्पताल में न्यूरो संबंधी बीमारियों से परेशान मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। अस्पताल प्रशासन ने न्यूरो ओपीडी के संचालन के दिनों में बढ़ोतरी की है। अब यह ओपीडी सप्ताह में पांच दिन संचालित होगी। नई व्यवस्था के तहत मरीज मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार को विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श ले सकेंगे। इससे उन मरीजों को खास फायदा मिलने की उम्मीद है, जिन्हें न्यूरोलॉजी से जुड़ी समस्याओं के उपचार, नियमित जांच या फॉलोअप के लिए अस्पताल आना पड़ता है। पहले ओपीडी सीमित दिनों में चलने के कारण मरीजों को अपनी बारी और डॉक्टर से परामर्श के लिए निर्धारित दिन का इंतजार करना पड़ता था। नई व्यवस्था से मरीजों को सप्ताह में अधिक दिन इलाज कराने का विकल्प मिलेगा।

दून अस्पताल में देहरादून के अलावा उत्तराखंड के विभिन्न जिलों और दूरदराज के क्षेत्रों से भी मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। न्यूरो संबंधी बीमारियों में कई बार मरीजों को नियमित रूप से विशेषज्ञ चिकित्सक को दिखाने, दवाओं की समीक्षा कराने और स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार आगे का उपचार तय कराने की जरूरत होती है। ऐसे में ओपीडी के सीमित दिनों में संचालित होने से मरीजों को अपनी यात्रा और इलाज की योजना उसी हिसाब से बनानी पड़ती थी। खासकर दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के लिए एक तय दिन पर अस्पताल पहुंचना मुश्किल हो सकता है। ओपीडी के दिन बढ़ने से अब उन्हें अपनी सुविधा के अनुसार परामर्श लेने का बेहतर अवसर मिलेगा।

अस्पताल प्रशासन ने मरीजों की बढ़ती संख्या और उनकी सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव किया है। उम्मीद है कि सप्ताह में पांच दिन ओपीडी चलने से किसी एक दिन मरीजों की अत्यधिक भीड़ का दबाव कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही नियमित जांच कराने वाले मरीजों को भी सुविधा मिल सकती है। हालांकि, मरीजों को अस्पताल पहुंचने से पहले ओपीडी के समय और संबंधित विभाग की उपलब्धता की जानकारी ले लेनी चाहिए, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

अस्पताल की प्राचार्य डॉ. गीता जैन के निर्देश पर नई व्यवस्था लागू की गई है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि विशेषज्ञ सेवाओं को मरीजों के लिए अधिक सुलभ बनाने के उद्देश्य से ओपीडी संचालन में बदलाव किया गया है। न्यूरो ओपीडी के दिन बढ़ने से उन मरीजों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है, जिन्हें लंबे समय तक उपचार जारी रखना होता है या चिकित्सक की सलाह के अनुसार समय-समय पर जांच करानी पड़ती है।

दून अस्पताल में न्यूरो ओपीडी के विस्तार के साथ ही रेडियोलॉजी विभाग में भर्ती मरीजों की जांच में देरी का मामला भी सामने आया है। अस्पताल प्रशासन ने अल्ट्रासाउंड जांच समय पर नहीं होने की शिकायत पर सख्ती दिखाई है। जानकारी के अनुसार, बुधवार को रेडियोलॉजिस्ट करीब तीन घंटे की देरी से पहुंचे थे। इसके कारण अस्पताल में भर्ती मरीजों को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए इंतजार करना पड़ा। भर्ती मरीजों की जांच में देरी होने से उनके उपचार की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है, इसलिए अस्पताल प्रशासन ने संबंधित डॉक्टर को समय पर पहुंचने और निर्धारित समय से जांच शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

दून अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग में प्रतिदिन लगभग 15 से 20 भर्ती मरीजों का अल्ट्रासाउंड किया जाता है। बुधवार को डॉक्टर के देर से पहुंचने के कारण इन मरीजों को जांच के लिए इंतजार करना पड़ा। मामला संज्ञान में आने के बाद अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरएस बिष्ट ने संबंधित रेडियोलॉजिस्ट को समय की पाबंदी बरतने के निर्देश दिए। अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भर्ती मरीजों की जांच में अनावश्यक देरी और ड्यूटी में लापरवाही को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार को संबंधित डॉक्टर समय पर अस्पताल पहुंचे और दोपहर 12 बजे तक भर्ती मरीजों के अल्ट्रासाउंड कर दिए गए। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि डॉक्टर को सुबह नौ बजे अस्पताल पहुंचकर जांच शुरू करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। चिकित्सा अधीक्षक ने यह भी कहा है कि भर्ती मरीजों की जांच में देरी उनके इलाज को प्रभावित कर सकती है। इसलिए समय पर जांच शुरू करना जरूरी है और भविष्य में देरी की शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जा सकती है।

दून अस्पताल में न्यूरो ओपीडी के दिनों में बढ़ोतरी और रेडियोलॉजी विभाग में समयबद्ध जांच पर जोर, दोनों का सीधा संबंध मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने से है। एक ओर न्यूरो संबंधी बीमारियों के मरीजों को विशेषज्ञ से परामर्श के लिए सप्ताह में पांच दिन का विकल्प मिलेगा, वहीं दूसरी ओर भर्ती मरीजों की जांच में देरी रोकने के लिए अस्पताल प्रशासन ने निगरानी सख्त करने के संकेत दिए हैं। मरीजों के लिए इन व्यवस्थाओं का लाभ तभी पूरी तरह मिल सकेगा, जब ओपीडी संचालन और जांच की प्रक्रिया तय समय के अनुसार नियमित रूप से चलती रहेगी।

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