हल्द्वानी में दूषित पानी बना जानलेवा! पीलिया से बीएससी छात्रा की मौत, दो बच्चे भी बीमार; शिकायतों के बाद जागा प्रशासन

हल्द्वानी की दुर्गा कॉलोनी में पीलिया से बीएससी छात्रा सुहानी पंत की मौत हुई। दो बच्चे भी बीमार हैं। जल संस्थान ने पानी के नमूने लेकर आपूर्ति रोकी।
हल्द्वानी में दूषित पानी बना जानलेवा! पीलिया से बीएससी छात्रा की मौत, दो बच्चे भी बीमार; शिकायतों के बाद जागा प्रशासन
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उत्तराखंड के हल्द्वानी में दूषित पेयजल की समस्या ने गंभीर चिंता पैदा कर दी है। शहर के वार्ड नंबर-9 स्थित दुर्गा कॉलोनी में पीलिया से बीएससी द्वितीय वर्ष की एक छात्रा की मौत हो गई। कॉलोनी के लोगों का आरोप है कि उनके घरों में करीब एक महीने से गंदा और बदबूदार पानी आ रहा था। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। छात्रा की मौत और दो अन्य बच्चों के पीलिया से बीमार पड़ने की जानकारी सामने आने के बाद जल संस्थान और स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। अधिकारियों ने पानी के नमूने लिए और संबंधित क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति रोक दी। घटना ने इलाके में पेयजल की गुणवत्ता और संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मृत छात्रा की पहचान सुहानी पंत के रूप में हुई है। वह पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट की रहने वाली थी और हल्द्वानी की दुर्गा कॉलोनी में अपनी बुआ के साथ रहकर पढ़ाई कर रही थी। सुहानी महिला महाविद्यालय में बीएससी द्वितीय वर्ष की छात्रा थी। कुछ दिन पहले उसकी तबीयत बिगड़ गई थी। निजी लैब में जांच कराने पर उसे पीलिया होने की पुष्टि हुई। हालत में सुधार नहीं होने पर परिजन उसे बरेली स्थित राममूर्ति अस्पताल ले गए, जहां उपचार के दौरान उसकी स्थिति गंभीर बनी रही। रिपोर्ट के अनुसार, सुहानी को तीन दिन तक वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। उसकी मौत के बाद परिवार में शोक का माहौल है।

सुहानी की मौत के बाद परिजनों और स्थानीय निवासियों ने कॉलोनी में लंबे समय से आ रही गंदे पानी की समस्या को लेकर चिंता जताई। परिवार की ओर से आशंका व्यक्त की गई कि दूषित पानी के कारण उसकी तबीयत बिगड़ी थी। हालांकि, पानी की गुणवत्ता और छात्रा की बीमारी के बीच प्रत्यक्ष संबंध की आधिकारिक पुष्टि जांच रिपोर्ट से ही हो सकेगी। इस घटना ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि उनका कहना है कि पानी की शिकायत काफी समय से की जा रही थी और इसके बावजूद समस्या बनी हुई थी।

दुर्गा कॉलोनी में केवल सुहानी ही नहीं, बल्कि दो अन्य बच्चों के भी पीलिया से पीड़ित होने की जानकारी सामने आई है। कॉलोनी निवासी राजेश कटारिया के बेटे को भी पीलिया होने के बाद बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। वहीं, स्थानीय निवासी आशीष रौतेला को अपने बेटे के उपचार के लिए दिल्ली जाना पड़ा। इन घटनाओं के बाद लोगों में डर है कि यदि पेयजल की समस्या जल्द दूर नहीं हुई, तो अन्य परिवारों के सदस्य भी बीमार पड़ सकते हैं।

छात्रा की मौत और बच्चों के बीमार होने की जानकारी सामने आने के बाद गुरुवार को जल संस्थान के अधिकारी दुर्गा कॉलोनी पहुंचे। अधिशासी अभियंता आरएस लोशाली, सहायक अभियंता रविंद्र कुमार और कनिष्ठ अभियंता दीपक शर्मा सहित विभागीय कर्मचारियों ने मौके का निरीक्षण किया। टीम ने पेयजल के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे और संबंधित क्षेत्र में पानी की आपूर्ति रोक दी। अधिकारियों ने पानी में संभावित संदूषण के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू की है। जब तक स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक लोगों के लिए स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था करना अहम रहेगा।

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भी कॉलोनी में पहुंचकर घर-घर सर्वेक्षण किया। हल्द्वानी ब्लॉक की प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. ममता सिंह के नेतृत्व में एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं ने स्थानीय लोगों की स्वास्थ्य जांच की। इस दौरान कुल 31 लोगों की जांच की गई। टीम ने पेयजल के नमूने लेकर क्लोरीनेशन की स्थिति भी देखी। विभाग के अनुसार, क्लोरीनेशन की जांच में नमूने सही पाए गए, जबकि तीन नमूनों को विस्तृत परीक्षण के लिए सुशीला तिवारी अस्पताल भेजा गया। इन नमूनों की विस्तृत जांच से पानी की गुणवत्ता को लेकर अधिक स्पष्ट जानकारी मिलने की उम्मीद है।

कॉलोनी के लोगों का कहना है कि सुबह नलकूप से पानी की आपूर्ति शुरू होने पर शुरुआती 10 से 15 मिनट तक गंदा पानी आता है। शाम के समय गौला नदी की लाइन से पानी की आपूर्ति की जाती है। स्थानीय निवासियों के मुताबिक, सुबह आने वाले पानी में गंदगी और बदबू महसूस होती है। कुछ परिवारों का कहना है कि वे पानी को उबालकर इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद पानी की गुणवत्ता को लेकर आशंका बनी हुई है। कॉलोनी की आबादी करीब 120 बताई गई है और लोगों का आरोप है कि समस्या लगभग एक महीने से जारी है।

स्थानीय निवासी राजेश कटारिया ने बताया कि उनके बेटे को तीन अक्टूबर को पीलिया हुआ था, जिसके बाद उसे बेस अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। अन्य निवासियों ने भी पानी की बदबू और गंदगी को लेकर चिंता जताई। लोगों का कहना है कि उन्हें रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए पानी की जरूरत होती है, लेकिन जब नलों से गंदा पानी आता है तो पीने और खाना बनाने के लिए सुरक्षित पानी जुटाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में परिवारों को पानी उबालने या अन्य स्रोतों से पानी की व्यवस्था करने पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

वार्ड के पार्षद राजेंद्र जीना ने भी कॉलोनी में गंदे पानी की आपूर्ति की शिकायतों का जिक्र किया। उनके अनुसार, स्थानीय लोगों ने संबंधित विभागों को समस्या के बारे में जानकारी दी थी। छात्रा की मौत के बाद मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। स्थानीय निवासियों की मांग है कि पानी की जांच केवल एक बार कराकर मामला समाप्त न किया जाए, बल्कि यह पता लगाया जाए कि गंदगी पेयजल लाइन में कहां से पहुंच रही है और समस्या बार-बार क्यों हो रही है।

जल संस्थान के अधिशासी अभियंता आरएस लोशाली के मुताबिक, विभाग को बुधवार रात शिकायत मिली थी और गुरुवार को मौके का निरीक्षण किया गया। उन्होंने कहा कि शुरुआती भौतिक निरीक्षण में पानी में संदूषण स्पष्ट रूप से नहीं दिखा, लेकिन बैक्टीरिया की जांच के लिए नमूने एकत्र किए गए हैं। इसका अर्थ है कि पानी की गुणवत्ता पर अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच के बाद ही निकाला जा सकेगा। दूसरी ओर, स्थानीय लोगों का कहना है कि नलों से आने वाले पानी की स्थिति उनके लिए रोजाना की समस्या बनी हुई है और उन्हें जल्द स्थायी समाधान चाहिए।

जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. मनोज कांडपाल ने बताया कि जलजनित बीमारियों के साथ डेंगू, मलेरिया और अन्य वेक्टर जनित रोगों की नियमित निगरानी की जाएगी। उन्होंने इस तरह की समस्या या बीमारी का मामला सामने आने पर 9410119773 नंबर पर संपर्क कर शिकायत दर्ज कराने की जानकारी दी है। स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और पानी के नमूनों की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

हल्द्वानी की दुर्गा कॉलोनी का यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब नैनीताल जिले के अन्य इलाकों में भी पीलिया और दूषित पानी को लेकर चिंता बनी हुई है। ऐसे मामलों में केवल मरीजों का इलाज करना पर्याप्त नहीं है; पेयजल आपूर्ति के स्रोत, पाइपलाइन की स्थिति, पानी की नियमित जांच और शिकायत मिलने पर त्वरित कार्रवाई भी जरूरी है। यदि पाइपलाइन में रिसाव या किसी अन्य कारण से गंदगी पहुंच रही है, तो उसकी पहचान कर समस्या का स्थायी समाधान करना होगा।

फिलहाल दुर्गा कॉलोनी में पेयजल के नमूनों की विस्तृत जांच और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी महत्वपूर्ण है। छात्रा की मौत ने स्थानीय निवासियों की चिंता बढ़ा दी है, जबकि दो बच्चों के बीमार होने से लोगों की आशंकाएं और गहरी हुई हैं। प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने अब दो अहम जिम्मेदारियां हैं—पानी की गुणवत्ता की जांच के जरिए वास्तविक कारण का पता लगाना और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पानी में किस प्रकार का संदूषण था और बीमारी के मामलों से उसका क्या संबंध है।

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