दुर्गा आंगन का शिलान्यास करेंगी ममता बनर्जी, क्या हुमायूं कबीर की बाबरी मस्जिद बनी वजह

दुर्गा आंगन का शिलान्यास करेंगी ममता बनर्जी, क्या हुमायूं कबीर की बाबरी मस्जिद बनी वजह

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कोलकाता में 263 करोड़ रुपये के दुर्गा आंगन का शिलान्यास करेंगी। इसे हालिया धार्मिक विवादों और आने वाले चुनावों से जोड़कर एक अहम राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।

West Bengal: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक बार फिर राज्य की राजनीति के केंद्र में हैं। इस बार वजह है कोलकाता के न्यू टाउन इलाके में बनने वाला दुर्गा आंगन। मुख्यमंत्री सोमवार को इस भव्य मंदिर परिसर का शिलान्यास करने जा रही हैं। इस प्रोजेक्ट के लिए राज्य सरकार ने करीब 263 करोड़ रुपये का फंड तय किया है। इसे हाल के दिनों में मुर्शिदाबाद में हुमायूं कबीर द्वारा बाबरी मस्जिद के नाम पर रखी गई नींव के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है।

दुर्गा आंगन क्या है और कहां बनेगा

दुर्गा आंगन कोलकाता के न्यू टाउन इलाके में इको पार्क के पास बनाया जाएगा। यह मंदिर परिसर करीब 15 एकड़ क्षेत्र में फैला होगा। राज्य सरकार के मुताबिक यह केवल एक धार्मिक स्थल नहीं होगा बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों का भी केंद्र बनेगा। दुर्गा आंगन में मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा के साथ पूजा स्थल, सांस्कृतिक मंच और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

263 करोड़ रुपये का फंड

सरकार की योजना के अनुसार दुर्गा आंगन के निर्माण पर करीब 263 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह राशि पूरी तरह राज्य सरकार के फंड से दी जाएगी। मंदिर परिसर का निर्माण दो साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रशासन का दावा है कि यह परियोजना बंगाल की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करेगी और धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा देगी।

शहीदी दिवस पर हुआ था ऐलान

ममता बनर्जी ने दुर्गा आंगन के निर्माण का ऐलान पहले ही कर दिया था। शहीदी दिवस कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा था कि मां दुर्गा बंगाल की आस्था और संस्कृति का प्रतीक हैं और उनके नाम पर एक भव्य परिसर बनना चाहिए। उसी ऐलान के तहत अब इस परियोजना का शिलान्यास होने जा रहा है।

हुमायूं कबीर की बाबरी मस्जिद की नींव से जुड़ा विवाद

इस पूरे घटनाक्रम को हाल की एक और घटना से जोड़कर देखा जा रहा है। 6 दिसंबर को हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के नाम पर एक मस्जिद की नींव रखी थी। इसके बाद से बंगाल में धार्मिक और राजनीतिक बहस तेज हो गई। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम आने वाले चुनावों को ध्यान में रखकर उठाया गया था।

बाबरी मस्जिद का नाम भारतीय राजनीति में लंबे समय से भावनात्मक और संवेदनशील मुद्दा रहा है। मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के नाम पर नींव रखे जाने के बाद यह साफ हो गया कि राज्य में धार्मिक पहचान से जुड़ी राजनीति फिर से तेज होने वाली है। इसी पृष्ठभूमि में ममता बनर्जी का दुर्गा आंगन का शिलान्यास और भी ज्यादा अहम माना जा रहा है।

ममता बनर्जी का संदेश क्या है

दुर्गा आंगन के जरिए ममता बनर्जी एक स्पष्ट संदेश देना चाहती हैं। वह खुद को सभी धर्मों के सम्मान की बात करने वाली नेता के रूप में पेश करती रही हैं लेकिन साथ ही बंगाल की हिंदू सांस्कृतिक पहचान को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहतीं। दुर्गा पूजा बंगाल का सबसे बड़ा त्योहार है और मां दुर्गा से जुड़ी आस्था राज्य की राजनीति में भी गहरी भूमिका निभाती है।

हुमायूं कबीर का बयान

दुर्गा आंगन के शिलान्यास की खबर सामने आने के बाद हुमायूं कबीर का बयान भी आ गया है। उन्होंने कहा है कि ममता बनर्जी अपनी मर्जी से मंदिर बनवा रही हैं। हुमायूं कबीर ने साफ कहा कि उन्हें सरकार के फंड से मंदिर निर्माण अच्छा नहीं लग रहा। उन्होंने ऐलान किया कि वह इस फैसले के खिलाफ पूरे राज्य में आवाज उठाएंगे।

सरकारी फंड से मंदिर पर सवाल

हुमायूं कबीर का मुख्य विरोध इस बात को लेकर है कि मंदिर का निर्माण सरकारी पैसे से किया जा रहा है। उनका कहना है कि राज्य सरकार को सभी धर्मों के प्रति समान दूरी रखनी चाहिए और सरकारी फंड का इस्तेमाल धार्मिक निर्माण में नहीं होना चाहिए। यह बयान बंगाल की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे सकता है।

तृणमूल कांग्रेस लंबे समय से खुद को सेक्युलर पार्टी के तौर पर पेश करती आई है। लेकिन हाल के वर्षों में पार्टी पर तुष्टीकरण की राजनीति के आरोप भी लगते रहे हैं। दुर्गा आंगन जैसे प्रोजेक्ट के जरिए ममता बनर्जी इन आरोपों का जवाब देने की कोशिश कर रही हैं। 

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