बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या पर ओवैसी की तीखी प्रतिक्रिया, बोले- ‘बहुसंख्यक राजनीति से जन्म लेती है लिंचिंग’

बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या पर ओवैसी की तीखी प्रतिक्रिया, बोले- ‘बहुसंख्यक राजनीति से जन्म लेती है लिंचिंग’

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने बांग्लादेश में हिंदू युवकों की कथित लिंचिंग की कड़ी निंदा की है। उन्होंने साफ कहा कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना वहां की सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है। 

नई दिल्ली: एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास और अमृत मंडल की अलग-अलग घटनाओं में हुई निर्मम हत्याओं की कड़ी निंदा की है। इसके साथ ही उन्होंने भारत में हुई कुछ दुखद घटनाओं का भी उल्लेख किया और यह संकेत दिया कि ऐसी वारदातों के पीछे बहुसंख्यक राजनीति का प्रभाव हो सकता है। 

ओवैसी ने बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस सरकार के कार्यकाल में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाए जाने और वहां की सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी से पीछे हटने पर वैश्विक विरोध का भी जिक्र किया। इस मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगियों ने भी चिंता व्यक्त की है।

बांग्लादेश में हिंदू युवकों की हत्या पर चिंता

ओवैसी ने बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास और अमृत मंडल की अलग-अलग घटनाओं में हुई हत्या को बेहद दुखद और निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा अस्वीकार्य है। ओवैसी के मुताबिक, मौजूदा हालात यह संकेत देते हैं कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं बढ़ रही हैं, जो वहां के संविधान की भावना के खिलाफ हैं।

उन्होंने कहा, हमारी पार्टी की ओर से दीपू चंद्र दास और अमृत मंडल के साथ जो हुआ, उसकी हम कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। भारत सरकार बांग्लादेश के साथ रिश्तों को मजबूत बनाए रखने के लिए जो भी कदम उठाएगी, हम उसका समर्थन करते हैं।

यूनुस सरकार से की अपील

ओवैसी ने बांग्लादेश की मौजूदा सरकार, जिसे मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व से जोड़ा जा रहा है, से अपील की कि वह अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार का पहला कर्तव्य अपने नागरिकों की जान-माल की रक्षा करना होता है, चाहे उनकी धार्मिक पहचान कुछ भी हो। ओवैसी ने उम्मीद जताई कि बांग्लादेश सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि वहां रहने वाले हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदाय सुरक्षित महसूस करें और उनके खिलाफ हो रही हिंसा पर सख्त कार्रवाई हो।

हालांकि, बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या की निंदा करते हुए ओवैसी ने भारत में हुई कुछ कथित लिंचिंग की घटनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केवल पड़ोसी देश की आलोचना करना काफी नहीं है, बल्कि अपने देश में हो रही घटनाओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ओवैसी ने कहा कि, 24 दिसंबर को पश्चिम बंगाल के एक मजदूर की ओडिशा के संबलपुर में लिंचिंग कर दी गई। इसके अलावा उत्तराखंड में एमबीए की पढ़ाई कर रहे आदिवासी युवक एंजेल चकमा की पिटाई के बाद मौत हो गई।

‘बहुसंख्यक राजनीति’ पर लगाया आरोप

ओवैसी के अनुसार, इस तरह की घटनाएं तब होती हैं जब बहुसंख्यक राजनीति कानून के शासन पर हावी हो जाती है। उन्होंने कहा कि जब राजनीतिक फायदे के लिए समाज को बांटने की कोशिश की जाती है, तब कानून कमजोर पड़ता है और लिंचिंग जैसी घटनाएं सामने आती हैं। उनका कहना था कि ये सभी घटनाएं इस बात का उदाहरण हैं कि कैसे कानून का राज कमजोर हो जाता है, जब बहुसंख्यक राजनीति सब पर हावी हो जाती है। ऐसी हर लिंचिंग की बिना किसी भेदभाव के निंदा होनी चाहिए।

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