एअर इंडिया फ्लाइट AI2651 लैंडिंग के दौरान रनवे से टकराई, बेंगलुरु एयरपोर्ट पर टेल स्ट्राइक की घटना

दिल्ली-बेंगलुरु एअर इंडिया फ्लाइट AI2651 लैंडिंग के दौरान रनवे से टकराई। टेल स्ट्राइक की घटना में विमान को स्क्रैच आया, सभी यात्री और क्रू सुरक्षित हैं।

एअर इंडिया की दिल्ली-बेंगलुरु फ्लाइट AI2651 बेंगलुरु एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान रनवे से टकरा गई। विमान के पिछले हिस्से में स्क्रैच आया, लेकिन सभी यात्री और क्रू सदस्य सुरक्षित रहे। घटना की जांच डीजीसीए और एयरलाइन द्वारा शुरू कर दी गई है।

 नई दिल्ली: दिल्ली से बेंगलुरु जा रही एअर इंडिया की फ्लाइट AI2651 गुरुवार को केंपेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान एक घटना का शिकार हो गई। लैंडिंग प्रक्रिया के समय विमान का पिछला हिस्सा (टेल सेक्शन) रनवे से हल्का टकरा गया, जिसे एविएशन की भाषा में “टेल स्ट्राइक” कहा जाता है।

हालांकि घटना के बावजूद विमान को सुरक्षित तरीके से लैंड करा लिया गया और सभी यात्री तथा क्रू मेंबर्स पूरी तरह सुरक्षित रहे। किसी के घायल होने की कोई सूचना नहीं है, जिससे राहत की स्थिति बनी हुई है।

क्या है ‘टेल स्ट्राइक’ और कैसे हुई घटना?

एविएशन विशेषज्ञों के अनुसार, टेल स्ट्राइक तब होती है जब लैंडिंग या टेकऑफ के दौरान विमान का पिछला हिस्सा रनवे या जमीन को छू लेता है। यह स्थिति आमतौर पर तब बनती है जब विमान का बैलेंस बिगड़ जाता है या पिच (nose-up angle) अधिक हो जाता है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, AI2651 फ्लाइट के साथ भी ऐसी ही स्थिति बनी। लैंडिंग के दौरान विमान का पिछला हिस्सा रनवे से टकरा गया, जिससे स्क्रैच और हल्का डैमेज देखा गया।

सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरें, जांच जारी

घटना के बाद विमान की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आईं, जिनमें उसके पिछले हिस्से पर खरोंच (स्क्रैच) दिखाई दे रही है। हालांकि इन तस्वीरों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

एअर इंडिया और एयरपोर्ट प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। विमान को फिलहाल ग्राउंड कर दिया गया है ताकि तकनीकी और संरचनात्मक जांच पूरी की जा सके।

संभावित कारण: वेक टर्बुलेंस की आशंका

सूत्रों के मुताबिक, लैंडिंग से कुछ समय पहले रनवे से एक बड़े विमान के टेकऑफ करने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि यह एक बोइंग 747 विमान था, जिसके टेकऑफ के बाद उत्पन्न हुई वेक टर्बुलेंस (Wake Turbulence) ने हवा में अस्थिरता पैदा की।

वेक टर्बुलेंस उस स्थिति को कहते हैं जब बड़े विमान के पीछे हवा में तेज और अस्थिर प्रवाह बन जाता है, जो उसके पीछे आने वाले विमानों को प्रभावित कर सकता है। आशंका जताई जा रही है कि इसी वजह से एअर इंडिया विमान का बैलेंस प्रभावित हुआ। हालांकि, अभी तक किसी भी एजेंसी ने इस कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

पायलट ने दिखाई सतर्कता, ‘गो-अराउंड’ का लिया फैसला

सूत्रों के अनुसार, फ्लाइट के पायलट को लैंडिंग से पहले ही स्थिति सामान्य नहीं लग रही थी। जैसे ही उन्हें अस्थिरता का अंदाजा हुआ, उन्होंने मानक सुरक्षा प्रक्रिया के तहत ‘गो-अराउंड’ (Go-Around) का निर्णय लिया।

गो-अराउंड प्रक्रिया में पायलट विमान को लैंडिंग से पहले दोबारा हवा में ले जाता है और सुरक्षित ऊंचाई पर जाकर पुनः लैंडिंग की कोशिश करता है। यह प्रक्रिया तब अपनाई जाती है जब लैंडिंग सुरक्षित न लग रही हो।

पायलट की यह त्वरित प्रतिक्रिया संभावित बड़े हादसे को टालने में अहम साबित हुई।

सुरक्षित लैंडिंग के बाद विमान ग्राउंडेड

घटना के बाद एअर इंडिया ने विमान को अस्थायी रूप से ग्राउंड कर दिया है। इसका मतलब है कि जब तक पूरी तकनीकी जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस विमान का संचालन नहीं किया जाएगा।

एयरलाइन इंजीनियरिंग टीम विमान के स्ट्रक्चर, टेल सेक्शन और लैंडिंग सिस्टम की विस्तृत जांच कर रही है।

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को भी इस घटना की जानकारी दे दी गई है और नियामक स्तर पर जांच प्रक्रिया शुरू हो गई है।

वापसी फ्लाइट रद्द, यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था

घटना के चलते बेंगलुरु से दिल्ली जाने वाली वापसी फ्लाइट AI2652 को रद्द कर दिया गया है। एअर इंडिया ने कहा है कि प्रभावित यात्रियों के लिए वैकल्पिक उड़ान और अन्य यात्रा विकल्पों की व्यवस्था की जा रही है।

एयरलाइन की ग्राउंड टीम बेंगलुरु एयरपोर्ट पर यात्रियों की सहायता में जुटी हुई है। यात्रियों को टिकट रीबुकिंग, रिफंड और अन्य सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।

एयरलाइन और एयरपोर्ट प्रशासन का बयान

एअर इंडिया और एयरपोर्ट अधिकारियों ने संयुक्त रूप से कहा है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। घटना की पूरी तकनीकी जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि लैंडिंग के दौरान वास्तव में क्या हुआ और किन परिस्थितियों में विमान का बैलेंस प्रभावित हुआ।

प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तकनीकी पहलुओं की जांच की जाएगी।

एविएशन सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

इस घटना के बाद एक बार फिर विमानन सुरक्षा और रनवे संचालन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि व्यस्त एयरपोर्ट्स पर टेकऑफ और लैंडिंग के बीच उचित दूरी और समय का अंतर बनाए रखना बेहद जरूरी होता है, ताकि वेक टर्बुलेंस जैसी स्थितियों से बचा जा सके।

हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया है कि आधुनिक एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम ऐसी स्थितियों को संभालने में सक्षम होते हैं, और हर घटना को अलग-अलग तकनीकी दृष्टि से जांचना जरूरी होता है।

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