ईरान में पिछले 37 दिनों से इंटरनेट पूरी तरह ठप है, जिससे देशवासियों का डिजिटल संपर्क कट गया है। अमेरिका और इज़राइल के साथ बढ़ते सैन्य तनाव के बीच यह अब तक की सबसे लंबी राष्ट्रीय स्तर की इंटरनेट बंदी मानी जा रही है। इससे व्यापार, शिक्षा और जरूरी सेवाओं पर गंभीर असर पड़ा है और आम लोग अपनों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं।
Iran internet shutdown: ईरान में 28 फरवरी 2026 से इंटरनेट पूरी तरह ठप है, जिससे देश का डिजिटल नेटवर्क पूरी तरह बाधित हो गया है। यह बंदी अमेरिका और इज़राइल के साथ बढ़ते सैन्य टकराव के बीच लागू की गई है, जिसमें पूरे देश के नागरिक शामिल हैं। नेटब्लॉक्स के अनुसार, यह अब तक की सबसे लंबी राष्ट्रीय इंटरनेट बंदी है, जिसने व्यापार, शिक्षा और रोजमर्रा की जरूरी सेवाओं पर सीधा प्रभाव डाला है और लोगों को अपने परिवार और मित्रों से संपर्क करने से वंचित कर दिया है।
ईरान में इंटरनेट ठप
ईरान में पिछले 37 दिनों से इंटरनेट पूरी तरह ठप है, जिससे देश की लगभग सभी डिजिटल गतिविधियां रुक गई हैं। अमेरिका और इज़राइल के साथ बढ़ते सैन्य टकराव के बीच, नेटब्लॉक्स के अनुसार यह अब तक की सबसे लंबी राष्ट्रीय स्तर की इंटरनेट बंदी है। पूरे देश में लोग अपनों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं और व्यापार, शिक्षा और जरूरी सेवाओं पर गंभीर असर पड़ रहा है।

‘डिजिटल वनवास’ का असर
नेटब्लॉक्स के मुताबिक, 28 फरवरी 2026 से ईरान ने ग्लोबल इंटरनेट से अपना संपर्क काट लिया था। अब तक यह बंदी 864 घंटे से अधिक समय तक जारी है। देश में व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका सीधा असर महसूस किया जा रहा है। अधिकारी अब ‘टियर वाइटलिस्टिंग सिस्टम’ लागू करने पर विचार कर रहे हैं, जिससे कुछ सीमित इंटरनेट सेवाओं को ही बहाल किया जा सके।
सामान्य लोग अपने परिवार और मित्रों तक पहुंच नहीं बना पा रहे हैं। इस लंबी डिजिटल नाकेबंदी ने ईरान को दुनिया के बाकी देशों से पूरी तरह अलग कर दिया है, जिससे आम नागरिक मानसिक तनाव और चिंता का शिकार हैं।
वीपीएन और सैटेलाइट पर भी रोक
इस इंटरनेट बंदी के दौरान वीपीएन और सैटेलाइट कनेक्शन जैसे वैकल्पिक विकल्पों पर भी कड़ा नियंत्रण लगाया गया है। नेटब्लॉक्स ने अधिकारियों से अपील की है कि संकट के समय लोगों को अपने प्रियजनों से संपर्क करने का मौका दिया जाए।
युद्ध और सैन्य हमलों के बीच नागरिक पूरी तरह डिजिटल दुनिया से कटे हुए हैं। मिसाइल हमलों और सुरक्षा खतरों के बीच इंटरनेट की गैर-उपलब्धता ने देशवासियों के लिए जीवन और भी कठिन बना दिया है।











