ईरान युद्ध के एक महीने के बाद भारतीय शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखी जा रही है। घरेलू शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 28 फरवरी से अब तक 7,700 अंक यानी करीब 9.5% नीचे चला गया है। इस गिरावट से भारतीय निवेशकों को कुल 41.4 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
बिजनेस न्यूज़: ईरान युद्ध को एक महीने पूरे हो चुके हैं और इस दौरान भारतीय निवेशकों को भारी आर्थिक चपत लगी है। 28 फरवरी को ईरान और अमेरिका/इजरायल के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से सेंसेक्स में 7,700 अंक से अधिक यानी करीब 9.5% की गिरावट दर्ज की गई है। इस गिरावट के चलते निवेशकों को कुल मिलाकर 41.4 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
एनएसडीएल और बीएसई के आंकड़ों के मुताबिक, इसी अवधि में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय बाजार से 1.1 लाख करोड़ रुपये की निकासी की है। इस स्थिति ने भारतीय शेयर बाजार और निवेशकों की धारणा पर गंभीर असर डाला है, जिससे आर्थिक अनिश्चितताओं में और इजाफा हुआ है।
सेंसेक्स में गिरावट का विवरण
27 फरवरी को सेंसेक्स 81,287 अंक पर था, जबकि 27 मार्च को यह 73,583 अंक पर आ गया। इस एक महीने की अवधि में बाजार में निवेशकों की भारी चिंता देखी गई। बीएसई लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 9 लाख करोड़ रुपये घटकर 422.2 लाख करोड़ रुपये रह गया। विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध की वजह से जियो-पॉलिटिकल रिस्क और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं ने भारतीय बाजारों को कमजोर किया है। सेंसेक्स के शेयरों का विश्लेषण करें तो इस अवधि में विभिन्न कंपनियों में मिश्रित प्रदर्शन देखने को मिला:
- मारुति सुजुकी के शेयर 17.8% गिर गए।
- बजाज फाइनेंस में 17.4% की गिरावट आई।
- रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर में शुक्रवार को 4.6% की गिरावट दर्ज हुई, जिससे सेंसेक्स 1,690 अंक यानी 2.3% टूटकर 73,583 अंक पर बंद हुआ।
- वहीं, टेक महिंद्रा में 2.2% और सन फार्मा में 1.7% की तेजी देखी गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि पेट्रो-प्रोडक्ट एक्सपोर्टर्स पर फिर से लगाया गया विंडफॉल टैक्स, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने और बॉन्ड यील्ड में वृद्धि ने रिलायंस सहित अन्य कंपनियों के शेयरों में गिरावट को और बढ़ावा दिया।

विदेशी निवेशकों की निकासी और बाजार पर असर
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने युद्ध की वजह से भारतीय बाजार से 1.1 लाख करोड़ रुपये की निकासी की। इसके साथ ही पश्चिमी बाजारों से मिले नकारात्मक संकेतों ने निवेशकों के मनोबल को और कम किया। जियो-पॉलिटिकल रिस्क, आपूर्ति बाधा और बढ़ते बॉन्ड यील्ड के कारण निकट भविष्य में भी बाजार में सुधार की संभावना फिलहाल कम नजर आ रही है।
जियोजित इनवेस्टमेंट्स के वरिष्ठ विश्लेषक विनोद नायर का कहना है कि बॉन्ड यील्ड में तेजी और वैश्विक बाजारों से मिले नकारात्मक संकेतों ने भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का प्रमुख कारण बने। उन्होंने चेतावनी दी कि जियो-पॉलिटिकल तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं के कारण नज़दीकी समय में बाजार के लिए माहौल कमजोर रहेगा।









