पोप लियो XIV ने अपने भाषण में दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी युद्धों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि आज कूटनीति की जगह ताकत का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है और कई देशों में ‘युद्ध की भूख’ साफ नजर आ रही है।
World News: वैश्विक राजनीति में बढ़ते तनाव और लगातार भड़कते युद्धों के बीच वेटिकन ने खुलकर अपनी चिंता जाहिर की है। कैथोलिक ईसाइयों के सर्वोच्च धर्मगुरु पोप लियो XIV ने ताकत के दम पर की जा रही कूटनीति और युद्ध की बढ़ती प्रवृत्ति को शांति के लिए गंभीर खतरा बताया है। रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिका-वेनेजुएला तनाव और अन्य वैश्विक विवादों के बीच पोप का यह बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खास महत्व रखता है।
वेटिकन से दुनिया को कड़ा संदेश
वेटिकन सिटी में राजनयिकों को संबोधित करते हुए पोप लियो XIV ने कहा कि आज की दुनिया में संवाद और सहमति पर आधारित कूटनीति की जगह ताकत के इस्तेमाल का चलन बढ़ता जा रहा है। उन्होंने चेताया कि चाहे कोई अकेला देश हो या देशों का समूह, जब कूटनीति का आधार सैन्य शक्ति बन जाता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक शांति पर पड़ता है।
पोप ने कहा, हम एक बार फिर ऐसे दौर में प्रवेश कर रहे हैं जहां युद्ध को सामान्य समाधान के रूप में देखा जाने लगा है। यह कानून के शासन और आम नागरिकों के शांतिपूर्ण जीवन के लिए बड़ा खतरा है।

रूस-यूक्रेन युद्ध की पृष्ठभूमि में बयान
पोप लियो XIV का यह बयान ऐसे समय आया है जब रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध एक बार फिर तेज होता दिख रहा है। हालिया दिनों में रूस द्वारा यूक्रेन पर नए हमले किए गए हैं, जिससे यूरोप समेत पूरी दुनिया में चिंता बढ़ गई है। इसके अलावा अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की कई क्षेत्रों में आक्रामक नीति ने भी वैश्विक तनाव को और गहरा किया है। ऐसे माहौल में वेटिकन की ओर से आया यह संदेश युद्धग्रस्त देशों और वैश्विक शक्तियों के लिए एक नैतिक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
पोप लियो XIV ने अपने संबोधन में कहा कि आज युद्ध सिर्फ मजबूरी नहीं, बल्कि कई बार एक “जुनून” या “भूख” के रूप में सामने आ रहा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह मानसिकता अंतरराष्ट्रीय कानून, मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करती है। उनका कहना था कि, जब युद्ध को समाधान के रूप में स्वीकार कर लिया जाता है, तो शांति, संवाद और समझौते की संभावनाएं स्वतः समाप्त होने लगती हैं।
वेनेजुएला को लेकर पोप की अपील
अपने भाषण में पोप लियो XIV ने किसी भी वैश्विक नेता का नाम लिए बिना वेनेजुएला का जिक्र किया। उन्होंने वेनेजुएला की जनता के अधिकारों की रक्षा और उनके लोकतांत्रिक फैसलों का सम्मान करने की अपील की। पोप ने कहा, मैं वेनेजुएला के लोगों की इच्छा का सम्मान करने और सभी नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा की आवश्यकता को दोहराता हूं, ताकि वहां स्थायित्व और एक मैत्रीपूर्ण भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और वेनेजुएला के संबंध बेहद तनावपूर्ण हैं और वहां की राजनीतिक स्थिति लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। वर्तमान वैश्विक हालात पर नजर डालें तो कई मोर्चों पर तनाव साफ दिखाई देता है। अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को लेकर की गई कार्रवाई, लैटिन अमेरिका में अस्थिरता का संकेत मानी जा रही है।












