Iran-Israel युद्ध का 8वां दिन, Middle East में तेज हुए हमले, UN ने जताई बड़ी चिंता

Iran-Israel युद्ध का 8वां दिन, Middle East में तेज हुए हमले, UN ने जताई बड़ी चिंता

मिडिल ईस्ट में Iran और Israel के बीच युद्ध का आठवां दिन है। तेहरान से तेल अवीव तक मिसाइल-ड्रोन हमले जारी हैं। United Nations ने चेतावनी दी कि जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो संघर्ष और खतरनाक हो सकता है।

Iran-Israel War: मिडिल ईस्ट में जारी सैन्य टकराव का आज आठवां दिन है और हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी किसी पक्ष की ओर से पीछे हटने के संकेत नहीं मिले हैं। इसके उलट क्षेत्र में हमले और जवाबी हमले तेज होते जा रहे हैं। तेहरान से लेकर तेल अवीव तक मिसाइलों और ड्रोन हमलों की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और अस्थिरता बढ़ गई है।

स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ती जा रही है। संयुक्त राष्ट्र यानी यूएन ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द कूटनीतिक प्रयास नहीं किए गए तो यह संघर्ष नियंत्रण से बाहर जा सकता है। यूएन प्रमुख ने सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।

ऑपरेशन ‘Epic Fury’ से शुरू हुआ बड़ा सैन्य अभियान

मौजूदा संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को हुई, जब अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त सैन्य अभियान ‘Operation Epic Fury’ के तहत ईरान की राजधानी तेहरान में बड़े पैमाने पर हमले किए। इन हमलों में कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।

इन हमलों के दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबर सामने आई, जिसने पूरे क्षेत्र में तनाव को और भड़का दिया। इस घटना के बाद ईरान ने इसे सीधे युद्ध की कार्रवाई मानते हुए जवाबी हमले शुरू कर दिए।

इसके बाद से ईरान ने इजरायल के साथ-साथ खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। जवाब में अमेरिका और इजरायल ने भी ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर लगातार हमले जारी रखे हैं।

ट्रंप का सख्त रुख

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संघर्ष को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में स्पष्ट कहा है कि ईरान के साथ कोई समझौता नहीं होगा जब तक वह बिना किसी शर्त के सरेंडर नहीं करता।

व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट के अनुसार यह सैन्य संघर्ष चार से छह सप्ताह तक चल सकता है। उनका कहना है कि अमेरिका के पास इस अभियान को जारी रखने के लिए पर्याप्त सैन्य संसाधन और गोला-बारूद मौजूद है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि इस अभियान का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और क्षेत्र में सुरक्षा संतुलन स्थापित करना है।

हमलों में बढ़ता जानमाल का नुकसान

28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष के बाद से ईरान में भारी नुकसान की खबरें सामने आई हैं। रिपोर्टों के अनुसार अब तक 1,230 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा कई शहरों में बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है।

तेहरान समेत कई क्षेत्रों में लगातार हवाई हमले और मिसाइल हमले होने से आम लोगों में भय का माहौल बना हुआ है। कई इलाकों में आपातकाल जैसी स्थिति देखी जा रही है और नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है।

तेहरान में बंकर पर इजरायल का बड़ा हमला

इजरायली वायुसेना ने तेहरान में एक बड़े ऑपरेशन के तहत लगभग 50 फाइटर जेट्स का इस्तेमाल किया। इस हमले का लक्ष्य ईरान के सर्वोच्च नेता के परिसर के नीचे बने भूमिगत बंकर को बताया गया।

इजरायल के अनुसार यह ऑपरेशन मिलिट्री इंटेलिजेंस की सटीक जानकारी के आधार पर किया गया था। इस अभियान में खुफिया एजेंसी मोसाद के साथ समन्वय भी किया गया। इजरायली अधिकारियों का कहना है कि यह बंकर खास तौर पर सुप्रीम लीडर के लिए तैयार किया गया था और इसे रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता था।

तेहरान एयरपोर्ट पर धमाकों से मचा हड़कंप

ईरान की राजधानी तेहरान स्थित मेहराबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास शनिवार तड़के जोरदार धमाकों की आवाज सुनाई दी। इन धमाकों के बाद आसपास के क्षेत्रों में अफरातफरी का माहौल बन गया।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार धमाके इतने तेज थे कि आसपास की इमारतों की खिड़कियां तक हिल गईं। हालांकि इस हमले के पीछे किसका हाथ है, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

इजरायल का दावा, ईरान का एयर डिफेंस कमजोर

इजरायली सेना ने दावा किया है कि उनके सैन्य अभियान से ईरान की लगभग 80 प्रतिशत हवाई रक्षा प्रणालियां नष्ट हो चुकी हैं। उनका कहना है कि इससे ईरान की रक्षा क्षमता काफी कमजोर हो गई है।

इजरायल का यह भी दावा है कि उसने ईरान के मिसाइल लॉन्चर और हथियार भंडार को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। इससे ईरान की हमले की क्षमता पहले की तुलना में काफी कम हो गई है। हालांकि ईरान ने इन दावों को पूरी तरह खारिज नहीं किया है, लेकिन उसने यह जरूर कहा है कि उसके मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रहेंगे।

अमेरिका का दावा, ईरान की वायुसेना लगभग खत्म

अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि युद्ध के पहले दिन के बाद से ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल हमलों में लगभग 90 प्रतिशत की कमी आई है। इसी तरह ड्रोन हमलों में भी करीब 83 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

अमेरिकी केंद्रीय कमान के अनुसार पिछले 72 घंटों में ईरान के लगभग 200 सैन्य ठिकानों पर हमला किया गया है। इन लक्ष्यों में मिसाइल लॉन्चर, नौसैनिक जहाज और सैन्य सुविधाएं शामिल थीं।

ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान को ऐसे स्तर पर नुकसान पहुंचाया जा रहा है जैसा पहले कभी नहीं देखा गया। उन्होंने यहां तक कहा कि ईरान की वायुसेना लगभग समाप्त हो चुकी है।

खाड़ी देशों में बढ़ी सुरक्षा

ईरान के जवाबी हमलों के बाद खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कुवैत की एयर डिफेंस सिस्टम ने कई मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही नष्ट करने का दावा किया है।

इन घटनाओं के बाद अमेरिका ने कुवैत सिटी स्थित अपने दूतावास में कुछ समय के लिए परिचालन निलंबित कर दिया है। इसके अलावा बहरीन की एक सरकारी तेल रिफाइनरी पर भी मिसाइल हमला हुआ, जिसमें आग लग गई थी। हालांकि बाद में आग पर काबू पा लिया गया।

यूएई ने भी कहा कि उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने कई मिसाइलों और 120 से अधिक ड्रोन को रोक लिया। इसी तरह कतर की राजधानी दोहा में भी धमाकों की आवाज सुनी गई, जिसके बाद मिसाइलों को इंटरसेप्ट किए जाने की जानकारी दी गई।

हिजबुल्लाह ठिकानों पर इजरायल की कार्रवाई

इस बीच इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर भी बड़े पैमाने पर हमले किए। इजरायली सेना के अनुसार इन हमलों का लक्ष्य कमांड सेंटर, बहुमंजिला इमारतें और ड्रोन स्टोरेज फैसिलिटी थीं। इजरायल का कहना है कि इन ठिकानों का इस्तेमाल उसके खिलाफ हमलों की योजना बनाने के लिए किया जा रहा था। इसलिए उन्हें निशाना बनाया गया।

Leave a comment