अमेरिकी अदालत में एक पाकिस्तानी नागरिक ने दावा किया कि ईरानी एजेंट्स ने उसे Donald Trump, Joe Biden और Nikki Haley की हत्या की साजिश में शामिल होने को कहा था। मामले की जांच अब Federal Bureau of Investigation कर रही है।
World News: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के माहौल में एक बड़ा खुलासा सामने आया है। एक पाकिस्तानी नागरिक ने अमेरिकी अदालत में दावा किया है कि उसे ईरानी खुफिया एजेंट्स ने अमेरिका के शीर्ष नेताओं की हत्या की साजिश में शामिल होने के लिए कहा था। यह मामला उस समय सामने आया है जब पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा है और वैश्विक राजनीति पर इसका असर दिखाई दे रहा है।
ब्रुकलिन के फेडरल कोर्टरूम में पेश हुए पाकिस्तानी नागरिक आसिफ मर्चेंट ने खुद को निर्दोष बताते हुए कई चौंकाने वाले दावे किए। उसका कहना है कि उसने जानबूझकर किसी भी हत्या की साजिश को अंजाम नहीं दिया और वह शुरुआत से ही इस योजना से निकलने का रास्ता तलाश रहा था। हालांकि अमेरिकी जांच एजेंसियां इस मामले को बेहद गंभीरता से देख रही हैं और आरोप साबित होने पर उसे कड़ी सजा का सामना करना पड़ सकता है।
अमेरिकी नेताओं की हत्या की साजिश का आरोप
रिपोर्ट के अनुसार, आसिफ मर्चेंट पर आरोप है कि उसे ईरानी खुफिया नेटवर्क से जुड़े लोगों ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन और संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की पूर्व राजदूत निक्की हेली की हत्या की योजना में शामिल होने के लिए कहा था।
न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, आसिफ मर्चेंट को अगस्त 2024 में गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसियों का कहना है कि उसने दो लोगों को इस हत्या की योजना को अंजाम देने के लिए करीब 5 हजार डॉलर यानी लगभग 4.6 लाख रुपये देने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन जिन लोगों को उसने कॉन्ट्रैक्ट किलर समझा था, वे वास्तव में एफबीआई एजेंट थे जो पहले से ही इस मामले की निगरानी कर रहे थे।
इस खुलासे के बाद अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने इस पूरे मामले की गहराई से जांच शुरू कर दी थी। अधिकारियों का मानना है कि यह साजिश अमेरिकी चुनावों के दौरान देश की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित करने के उद्देश्य से रची गई हो सकती है।
परिवार को धमकी मिलने का दावा
कोर्ट में अपनी सफाई देते हुए आसिफ मर्चेंट ने कहा कि उसे यह काम करने के लिए मजबूर किया गया था। उसका दावा है कि उसके परिवार को गंभीर धमकियां मिल रही थीं और इसी वजह से उसने ईरानी एजेंट्स की बात मानने का फैसला किया।
आसिफ के अनुसार, उसकी एक पत्नी और तीन बच्चे पाकिस्तान में रहते हैं जबकि उसकी दूसरी पत्नी और बेटी ईरान में रहती हैं। उसने अदालत को बताया कि एक ईरानी हैंडलर ने उसकी पत्नी और बेटी को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी थी। इसी वजह से वह दबाव में आ गया और उसने उनकी बात मानने का नाटक किया।
उसने यह भी बताया कि एक बार उसका हैंडलर बिना किसी सूचना के उसके घर पहुंच गया और बातचीत के दौरान उसे बंदूक दिखाकर डराने की कोशिश की। इस घटना के बाद उसे महसूस हुआ कि उसके परिवार की सुरक्षा खतरे में है।
ईरानी हैंडलर के संपर्क में आने की कहानी

आसिफ मर्चेंट ने अदालत में यह भी बताया कि उसकी मुलाकात ईरानी एजेंट्स से कैसे हुई। उसके अनुसार, साल 2022 के अंत या 2023 की शुरुआत में वह खुद ईरानी एजेंट्स के संपर्क में आया था। उस समय उसने अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने के लिए मनी लॉन्ड्रिंग में उनकी मदद की थी।
आसिफ ने बताया कि वह पहले बैंक में काम करता था और बाद में उसने केले के एक्सपोर्ट का बिजनेस शुरू किया था। लेकिन यह कारोबार ज्यादा समय तक नहीं चल पाया और बाद में बंद हो गया।
उसका कहना है कि अप्रैल 2024 में एक ईरानी हैंडलर ने उससे संपर्क किया और उसे अमेरिका जाने का निर्देश दिया। उस समय उसे यह भी बताया गया कि वहां पहुंचने के बाद उसे किसी की हत्या करनी पड़ सकती है। बाद में उसे बताया गया कि संभावित टारगेट्स में डोनाल्ड ट्रंप, जो बाइडेन और निक्की हेली शामिल हो सकते हैं।
अमेरिकी चुनाव से जुड़ी साजिश का दावा
यह पूरा मामला उस समय का बताया जा रहा है जब अमेरिका में 2024 के राष्ट्रपति चुनाव होने वाले थे। उस चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप और जो बाइडेन के बीच कड़ी टक्कर मानी जा रही थी। वहीं निक्की हेली भी शुरुआत में राष्ट्रपति पद की दावेदार थीं, हालांकि बाद में वह चुनावी दौड़ से बाहर हो गई थीं।
आसिफ मर्चेंट ने अपने ईरानी संपर्क का नाम मेहरदाद यूसुफ बताया है। उसके अनुसार, यूसुफ ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से जुड़ा हुआ है। उसने दावा किया कि यूसुफ ने उसे हत्या की योजना बनाने और कुछ गोपनीय दस्तावेज हासिल करने का निर्देश दिया था।
जांच एजेंसियां अब इस दावे की भी जांच कर रही हैं कि क्या वास्तव में इस साजिश के पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।
जानबूझकर साजिश को अंजाम नहीं देने का दावा
आसिफ मर्चेंट ने अदालत में कहा कि उसने जानबूझकर इस साजिश को पूरा नहीं किया। उसका कहना है कि उसे पहले से ही अंदेशा था कि वह जल्द ही पकड़ा जाएगा। इसी वजह से उसने हत्या के लिए बहुत कम रकम ऑफर की थी।
उसके अनुसार, उसने करीब 4.6 लाख रुपये की रकम इसलिए ऑफर की क्योंकि उसे पता था कि इतनी कम रकम में कोई भी व्यक्ति इस तरह की खतरनाक वारदात को अंजाम देने के लिए तैयार नहीं होगा।
आसिफ का दावा है कि वह इस पूरी योजना के बारे में अमेरिकी सरकार को बताना चाहता था। उसे उम्मीद थी कि जब यह साजिश सामने आएगी तो वह खुद को बचा सकेगा और शायद उसे अमेरिका में रहने की अनुमति यानी ग्रीन कार्ड मिल सकता है।
उम्रकैद तक हो सकती है सजा
फिलहाल यह मामला अमेरिकी अदालत में सुनवाई के दौर में है। अभियोजन पक्ष अब आसिफ मर्चेंट से क्रॉस एग्जामिनेशन करने की तैयारी कर रहा है। अगर अदालत में उसके खिलाफ आरोप साबित हो जाते हैं तो उसे उम्रकैद की सजा हो सकती है।
जांच के दौरान कोर्ट में एक वीडियो भी पेश किया गया था जो जून 2024 का बताया जा रहा है। यह वीडियो न्यूयॉर्क के क्वींस इलाके के एक मोटेल का है जिसे एफबीआई एजेंट्स ने रिकॉर्ड किया था। वीडियो में आसिफ मर्चेंट एक रिपब्लिकन नेता की हत्या की योजना पर चर्चा करता दिखाई दे रहा है। जांचकर्ताओं का मानना है कि वह बातचीत संभवतः डोनाल्ड ट्रंप के बारे में कर रहा था।











