होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकरों का अचानक रुकना वैश्विक ऊर्जा बाजार में तनाव पैदा कर रहा है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अमेरिका की भू-राजनीतिक रणनीति के चलते भारत समेत कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
America: होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकरों का अचानक रुकना दुनिया के ऊर्जा बाजार में तनाव पैदा कर रहा है। कुछ विशेषज्ञ इसे अमेरिका की जियोपॉलिटिकल स्ट्रैटेजी का पहला कदम भी मान रहे हैं। एनर्जी इकोनॉमिस्ट के अनुसार, यह संकट केवल सैन्य कार्रवाई का परिणाम नहीं है, बल्कि ग्लोबल फाइनेंशियल और इंश्योरेंस फैसलों का असर भी है।
होर्मुज स्ट्रेट ग्लोबल एनर्जी ट्रेड का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है। दुनिया की तेल सप्लाई का लगभग 15 से 20 प्रतिशत और एलएनजी शिपमेंट का लगभग 20 प्रतिशत इसी रास्ते से गुजरता है। इस मार्ग पर अचानक रुकावट ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है।
क्यों रुके टैंकर?
विशेषज्ञों का कहना है कि टैंकरों पर ईरान का हमला मुख्य वजह नहीं है। बल्कि बड़ी यूरोपियन और ग्लोबल इंश्योरेंस कंपनियों ने अचानक होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों के लिए वॉर रिस्क कवर रद्द कर दिया या प्रीमियम इतना बढ़ा दिया कि जहाज मालिकों ने अपनी शिपिंग एक्टिविटी रोक दी। इसके कारण तेल और एलएनजी सप्लाई रुक गई और वैश्विक ऊर्जा बाजार में हड़कंप मच गया।
एनर्जी इकोनॉमिस्ट ने बताया कि ग्लोबल एनर्जी सिस्टम अब “अनदेखे इलाके” में पहुंच गया है। यह संकट क्रूड ऑयल, रिफाइंड प्रोडक्ट्स, एलएनजी, नेचुरल गैस लिक्विड्स, फर्टिलाइजर्स और मेथनॉल जैसे कई पेट्रोलियम डेरिवेटिव्स के बाजार को प्रभावित कर रहा है।
पहले कभी नहीं हुआ ऐसा

विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के दशकों में शिपिंग में रुकावटें होती रही हैं, लेकिन इतनी अचानक और व्यापक रुकावट कभी नहीं देखी गई। इंश्योरेंस कवरेज रद्द होने के कारण जहाज मालिकों ने टैंकर चलाना बंद कर दिया। इसका असर वैश्विक तेल और ऊर्जा बाजार पर सीधा पड़ा है और कीमतों में बढ़ोतरी हुई है।
एनर्जी मार्केट में यह संकट बताता है कि एक छोटे से फाइनेंशियल झटके से भी ग्लोबल ट्रेड में बड़ा असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट की संवेदनशीलता और वहां की शिपिंग रुकावटें दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधे खतरा डाल सकती हैं।
ट्रंप की भूमिका
यूएस प्रेसिडेंट डोनल्ड ट्रंप ने अक्सर तेल की कीमतों और ऊर्जा बाजार पर टिप्पणियां की हैं, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट के इस इंश्योरेंस संकट पर उनकी प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत शांत रही। कई विश्लेषकों का मानना है कि यह चुप्पी अमेरिका की रणनीति का हिस्सा हो सकती है। ट्रंप की नीति के पीछे यह मकसद हो सकता है कि ग्लोबल ऊर्जा बाजार पर दबाव बनाए रखा जाए और कुछ भू-राजनीतिक लाभ हासिल किए जाएं।
विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि इस स्थिति में भारत समेत कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। भारत जैसे देश जो फारस की खाड़ी से आयात करते हैं, उन्हें तेल की कीमतों और सप्लाई में अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है।
भारत के लिए खतरा
एनर्जी इकोनॉमिस्ट के अनुसार, भारत को इस समय सतर्क रहने की जरूरत है। होर्मुज स्ट्रेट से तेल की आपूर्ति में बाधा होने पर देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसके अलावा, एलएनजी और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई भी प्रभावित होगी।











