ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हमलों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयारी कर ली है। IRGC ने 16वीं बार ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस के तहत हमला किया और कहा कि निशाना केवल सैन्य प्रतिष्ठानों का होगा।
Middle East: ईरान ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह अपने देश की सुरक्षा के लिए दृढ़ है और अमेरिका-इजरायल के हमलों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने प्रेस टीवी के हवाले से कहा कि तेहरान किसी भी तरह की आक्रामकता का जवाब देने में सक्षम है और उसका इरादा पूरी तरह से आत्मरक्षा पर केंद्रित है।
अराघची ने अपने बयान में कहा कि ईरान ने पिछले दो दशकों में अपने पूरब और पश्चिम में अमेरिकी सैन्य ताकतों के खिलाफ युद्ध की रणनीतियों का अध्ययन किया है। उन्होंने बताया कि इस दौरान सीखे गए सबक ईरान की सुरक्षा और युद्ध प्रबंधन प्रणाली का हिस्सा बन गए हैं। उन्होंने कहा कि राजधानी में हुई बमबारी से ईरान की युद्ध क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ा है और उनका डीसेंट्रलाइज्ड मोजेक डिफेंस सिस्टम युद्ध की योजना बनाने में मदद करता है।
सेल्फ डिफेंस हमारा अधिकार
ईरानी सरकार ने बार-बार यह भी स्पष्ट किया है कि उसने कभी कोई आक्रामक युद्ध शुरू नहीं किया और न ही किसी पड़ोसी देश पर हमला किया है। हालांकि, यूनाइटेड नेशंस चार्टर के तहत सेल्फ-डिफेंस ईरान का अधिकार है। अराघची ने कहा कि ईरान का हर जवाब उन ठिकानों पर केंद्रित होगा, जहां से उसकी सीमा के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका उद्देश्य केवल सुरक्षा सुनिश्चित करना है और किसी भी आक्रामकता का जवाब देना है।
16वीं बार ईरानी हमला

इस बीच, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4 के तहत 16वीं बार हमला करने की घोषणा की है। इस हमले का मकसद पिछले अमेरिकी और इजरायली हमलों का जवाब देना और उनके सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना बताया गया है। IRGC ने स्पष्ट किया कि इस कार्रवाई में कोई भी क्षेत्रीय नागरिक प्रभावित नहीं होंगे और निशाना केवल सैन्य प्रतिष्ठानों का होगा।
ईरान के इस लगातार आत्मरक्षा के कदमों ने मिडिल ईस्ट के तनावपूर्ण माहौल को और बढ़ा दिया है। विश्लेषकों का कहना है कि IRGC की यह रणनीति अमेरिका और इजरायल के खिलाफ संकेत है कि ईरान किसी भी हमले के खिलाफ पूरी तरह सतर्क और तैयार है।
वैश्विक परिदृश्य पर असर
ईरान के 16वें हमले ने वैश्विक राजनीति और तेल बाजारों पर भी असर डाला है। इस कदम से खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ गई हैं और वहां सुरक्षा का स्तर उच्चतम स्तर पर रखा गया है। विश्लेषक मानते हैं कि ईरान की यह रणनीति अमेरिका-इजरायल की आक्रामकता को सीमित करने के साथ-साथ अपने पड़ोसी देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह संदेश देने के लिए है कि तेहरान किसी भी हमले का जवाब देने में सक्षम है।











