अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान की विशेषज्ञ सभा ने मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर घोषित किया है। सुरक्षा हालात के बीच यह फैसला आभासी बैठकों में लिया गया, जिससे वंशानुगत उत्तराधिकार पर बहस तेज हो गई है।
Iran Update: ईरान की विशेषज्ञ सभा (असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स) ने देश के नए सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) के रूप में मोजतबा खामेनेई के नाम पर मुहर लगा दी है। यह फैसला उस समय लिया गया जब पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों में मौत हो गई थी। उनकी मौत के बाद ईरान में उत्तराधिकार को लेकर गहरा संकट पैदा हो गया था। अब इस नियुक्ति के साथ देश में सत्ता का नया अध्याय शुरू हो गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया जब ईरान पहले से ही युद्ध जैसे हालात का सामना कर रहा है। क्षेत्रीय तनाव, अंतरराष्ट्रीय दबाव और आंतरिक अस्थिरता के बीच नए सुप्रीम लीडर का चयन बेहद अहम माना जा रहा है। मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
आभासी बैठकों में हुआ चयन
ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, विशेषज्ञ सभा की पूर्ण बैठक मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों के कारण संभव नहीं हो सकी। इसलिए यह निर्णय आभासी बैठकों (virtual meetings) और आंतरिक परामर्श के जरिए लिया गया। सूत्रों का दावा है कि इस प्रक्रिया में शक्तिशाली Islamic Revolutionary Guard Corps यानी IRGC की अहम भूमिका रही।

बताया जा रहा है कि IRGC ने कट्टरपंथी गुटों को एकजुट कर मोजतबा खामेनेई के पक्ष में माहौल बनाया। उनका तर्क था कि मौजूदा हालात में ऐसे व्यक्ति की जरूरत है जो सुरक्षा तंत्र को अच्छी तरह समझता हो और पहले से सत्ता के केंद्र में प्रभाव रखता हो। मोजतबा को उनके पिता के कार्यकाल के दौरान सुरक्षा और राजनीतिक मामलों में सक्रिय माना जाता रहा है।
कौन हैं मोजतबा खामेनेई
मोजतबा खामेनेई की उम्र लगभग 56 वर्ष है और वे एक मध्यम स्तर के शिया धर्मगुरु हैं। उन्हें हुज्जतुल इस्लाम (Hojjatoleslam) की धार्मिक उपाधि प्राप्त है। हालांकि यह रैंक सर्वोच्च नेता के पद के लिए पारंपरिक रूप से उच्चतम धार्मिक योग्यता नहीं मानी जाती, लेकिन उनके राजनीतिक संबंध और सुरक्षा तंत्र में प्रभाव को निर्णायक माना गया।
वे लंबे समय से पर्दे के पीछे प्रभावशाली भूमिका निभाते आए हैं। ईरान की राजनीति में उनका नाम अक्सर सामने आता रहा है, खासकर 2009 के चुनावी विवादों के दौरान। माना जाता है कि उनका बसिज मिलिशिया और IRGC से गहरा संबंध है। यही वजह है कि संकट की घड़ी में उन्हें एक मजबूत विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया गया।
वंशानुगत उत्तराधिकार पर उठे सवाल
मोजतबा की नियुक्ति को लेकर सबसे बड़ा विवाद वंशानुगत उत्तराधिकार (hereditary succession) को लेकर है। ईरान की 1979 की इस्लामी क्रांति की मूल भावना में राजशाही व्यवस्था का विरोध शामिल था। ऐसे में पिता के बाद बेटे का सर्वोच्च नेता बनना कई लोगों को राजशाही जैसा कदम लगता है।

कुछ कट्टरपंथी समूह भी इस फैसले से पूरी तरह संतुष्ट नहीं बताए जा रहे। उनका मानना है कि सुप्रीम लीडर का चयन केवल धार्मिक योग्यता और व्यापक समर्थन के आधार पर होना चाहिए। हालांकि मौजूदा हालात में स्थिरता को प्राथमिकता देते हुए इस नियुक्ति को आगे बढ़ाया गया।
खामेनेई की मौत के बाद बना था अंतरिम तंत्र
28 फरवरी 2026 को हुए हवाई हमलों में अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान में तीन सदस्यीय अंतरिम परिषद ने अस्थायी रूप से सत्ता संभाली थी। इस परिषद में राष्ट्रपति, न्यायपालिका प्रमुख और गार्जियन काउंसिल के एक ज्यूरिस्ट शामिल थे। इस दौरान देश में आपात हालात बने रहे और नए नेता के चयन को लेकर लगातार बैठकों का दौर चलता रहा।
विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने पहले ही संकेत दिया था कि नया सुप्रीम लीडर जल्द चुना जाएगा। अब मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति के साथ उस प्रक्रिया पर विराम लग गया है।
मोजतबा खामेनेई ऐसे समय में सत्ता संभाल रहे हैं जब ईरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़े दबाव का सामना कर रहा है। अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते तनाव ने देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था दोनों पर असर डाला है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने हालात और जटिल बना दिए हैं।










