नेपाल में जारी मतदान के बीच झापा-5 सीट पर K. P. Sharma Oli और Balen Shah के बीच मुकाबला चर्चा में है। Gen-Z की नाराजगी के बीच यह चुनाव नेपाल की नई और पुरानी राजनीति के टकराव के रूप में देखा जा रहा है।
Nepal Election: नेपाल में इस समय मतदान जारी है और इस बार का चुनाव कई मायनों में अलग माना जा रहा है। काठमांडू सहित देश के कई बड़े शहरों में युवा मतदाताओं यानी Gen-Z की भूमिका सबसे ज्यादा चर्चा में है। बड़ी संख्या में युवा पारंपरिक राजनीतिक नेतृत्व से असंतुष्ट दिखाई दे रहे हैं और वे नई राजनीति की मांग कर रहे हैं। इसी माहौल के बीच नेपाल की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक K. P. Sharma Oli फिर से चुनाव मैदान में हैं।
इस चुनाव का सबसे दिलचस्प मुकाबला झापा-5 सीट पर माना जा रहा है। यह सीट लंबे समय से ओली का राजनीतिक गढ़ रही है। हालांकि इस बार यहां उन्हें कड़ा चुनौती मिल रही है। खास बात यह है कि जिस दौर में युवाओं ने बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए थे, उस समय ओली सत्ता में थे।
कई लोगों को लगा था कि उस विरोध के बाद उनका राजनीतिक करियर कमजोर पड़ सकता है। लेकिन मौजूदा चुनाव में उनका दोबारा मैदान में उतरना यह दिखाता है कि वे अभी भी नेपाल की राजनीति में मजबूत स्थिति बनाए हुए हैं।
झापा-5 सीट पर दिलचस्प मुकाबला
झापा-5 सीट इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा का केंद्र बनी हुई है। यहां से K. P. Sharma Oli एक बार फिर किस्मत आजमा रहे हैं। दूसरी ओर काठमांडू के लोकप्रिय मेयर और युवा राजनीति के प्रतीक माने जाने वाले Balen Shah ने भी इस सीट पर चुनौती दी है।
इस मुकाबले को नेपाल में नई और पुरानी राजनीति के बीच संघर्ष के रूप में देखा जा रहा है। एक तरफ दशकों का राजनीतिक अनुभव रखने वाले ओली हैं तो दूसरी तरफ युवा नेतृत्व की नई छवि सामने रखने वाले बालेन शाह हैं। चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर भी इस मुकाबले को लेकर काफी चर्चा देखने को मिल रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव सिर्फ एक सीट का मुकाबला नहीं है बल्कि नेपाल की राजनीति के भविष्य की दिशा तय करने वाला भी हो सकता है। खासकर युवा मतदाताओं का रुख इस चुनाव के परिणाम पर बड़ा असर डाल सकता है।
Gen-Z विरोध प्रदर्शन और इस्तीफे की चर्चा
नेपाल में पिछले साल बड़े पैमाने पर युवा विरोध प्रदर्शन देखने को मिले थे। इन प्रदर्शनों में बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया बैन जैसे मुद्दे प्रमुख थे। हजारों की संख्या में युवा सड़कों पर उतर आए थे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की थी।
उस समय देश में गठबंधन सरकार थी और प्रधानमंत्री के तौर पर K. P. Sharma Oli सत्ता में थे। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव भी हुआ, जिसमें कई लोगों की मौत होने की खबरें सामने आई थीं। इन घटनाओं के बाद राजनीतिक माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया था।
विरोध प्रदर्शनों के बाद यह चर्चा भी तेज हो गई थी कि ओली को पद छोड़ना पड़ सकता है और उनका राजनीतिक भविष्य कमजोर हो सकता है। हालांकि समय के साथ राजनीतिक परिस्थितियां बदलीं और अब वे फिर से चुनाव लड़ते हुए नजर आ रहे हैं।
किशोरावस्था से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

K. P. Sharma Oli का जन्म 1952 में हुआ था। उनका राजनीतिक जीवन नेपाल के उस दौर में शुरू हुआ जब देश में पंचायत व्यवस्था थी और राजनीतिक दलों पर प्रतिबंध लगा हुआ था।
सिर्फ किशोरावस्था में ही वे कम्युनिस्ट विचारधारा से प्रभावित हो गए थे और राजतंत्र के खिलाफ आंदोलन में शामिल होने लगे थे। 1970 के दशक की शुरुआत में उन्होंने सक्रिय राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेना शुरू कर दिया।
उनका शुरुआती राजनीतिक जीवन संघर्ष से भरा रहा। उस समय सरकार विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के कारण उन्हें कई बार परेशानियों का सामना करना पड़ा।
झापा विद्रोह और 14 साल की जेल
नेपाल के इतिहास में झापा आंदोलन एक महत्वपूर्ण घटना माना जाता है। अक्टूबर 1973 में राजतंत्र के खिलाफ गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में K. P. Sharma Oli को गिरफ्तार कर लिया गया था।
गिरफ्तारी के बाद उन्हें लंबी अवधि तक जेल में रहना पड़ा। बताया जाता है कि वे करीब 14 साल तक जेल में रहे, जिनमें से लगभग 4 साल उन्होंने एकांत कारावास में बिताए। यह समय उनके राजनीतिक जीवन का सबसे कठिन दौर माना जाता है।
बहुदलीय लोकतंत्र के बाद राजनीति में उभार
1990 में नेपाल में जनआंदोलन के बाद बहुदलीय लोकतंत्र बहाल हुआ। इसके बाद K. P. Sharma Oli ने खुलकर राजनीति में भाग लेना शुरू किया।
वे Communist Party of Nepal (Unified Marxist–Leninist) से जुड़े और संसद तक पहुंचे। संसद में उनकी पहचान एक तेजतर्रार वक्ता और व्यंग्यपूर्ण शैली वाले नेता के रूप में बनी।
उनकी राजनीतिक शैली में अक्सर कटाक्ष और व्यंग्य का इस्तेमाल देखने को मिलता है। यही वजह है कि वे अपने विरोधियों को भी तीखे राजनीतिक जवाब देने के लिए जाने जाते हैं।
2015 के बाद राष्ट्रीय राजनीति में मजबूत पकड़
नेपाल की राष्ट्रीय राजनीति में K. P. Sharma Oli का सबसे बड़ा उभार 2015 के बाद देखा गया। इसी साल नेपाल ने नया संविधान अपनाया था और उसी समय भारत के साथ संबंधों में भी तनाव पैदा हो गया था।
दक्षिणी सीमा पर विरोध प्रदर्शनों के कारण ईंधन, दवाइयों और अन्य जरूरी सामान की सप्लाई महीनों तक प्रभावित रही। नेपाल में इसे भारत की अनौपचारिक नाकाबंदी के रूप में देखा गया।
उस समय ओली ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय संप्रभुता और सम्मान से जोड़ा। उनका यह रुख जनता के एक बड़े वर्ग को पसंद आया और देश में राष्ट्रवादी भावना मजबूत हुई।
2017 चुनाव और मजबूत सरकार
2017 के चुनाव में वाम गठबंधन को भारी समर्थन मिला। इस जीत के बाद K. P. Sharma Oli एक मजबूत सरकार के साथ प्रधानमंत्री बने। उस समय उन्हें नेपाल की राजनीति का सबसे प्रभावशाली नेता माना जाने लगा था।
हालांकि बाद में उनकी ही पार्टी के अंदर असंतोष बढ़ने लगा। राजनीतिक मतभेदों के कारण दिसंबर 2020 में उन्होंने संसद भंग करने का फैसला लिया।
लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को रद्द कर दिया और संसद को बहाल कर दिया। इसके बाद मई 2021 में फिर संसद भंग करने की कोशिश हुई, जिससे बड़ा संवैधानिक संकट पैदा हुआ और अंततः उन्हें पद छोड़ना पड़ा।











