ईरान ने गुरुवार सुबह इजरायल पर कई मिसाइल हमले किए, जिससे मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया। अमेरिका तथा इजरायल की संयुक्त कार्रवाई के बाद यह जवाबी हमला माना जा रहा है। संघर्ष के कारण तेल सप्लाई तथा क्षेत्रीय सुरक्षा पर दबाव बढ़ा है।
Iran Israel War: मिडिल ईस्ट में तनाव अब छठे दिन में भी बढ़ता जा रहा है। गुरुवार सुबह ईरान ने इजरायल पर कई मिसाइल हमले किए, जिससे युद्ध की स्थितियां और गंभीर हो गई हैं। यह हमला अमेरिका और इजरायल के पिछले हमलों का जवाब माना जा रहा है। दोनों देशों ने ईरान के सैन्य ठिकानों और परमाणु कार्यक्रम को निशाना बनाया था। इसके बाद ईरान ने लगातार कई देशों को निशाने पर लेकर जवाबी कार्रवाई जारी रखी है।
मध्य पूर्व में युद्ध की स्थिति
ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष ने पूरे मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा दिया है। गुरुवार सुबह ईरान ने ताबड़तोड़ मिसाइल हमले किए और इजरायल ने तुरंत अपने सुरक्षा बलों को सक्रिय कर लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्लाह समूह के ठिकानों पर हमला किया। इजरायल ने बेरूत के दक्षिणी इलाकों को निशाना बनाया। यह हमला उस समय हुआ जब अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया था। इससे पहले ईरानी राज्य टीवी ने अपने सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की शोक सभा को स्थगित कर दिया था।
अमेरिकी और इजरायली हमलों की पृष्ठभूमि
शनिवार को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले शुरू किए थे। इन हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरान के नेतृत्व, मिसाइल स्टॉक और परमाणु कार्यक्रम को नष्ट करना बताया गया। अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों का कहना है कि उनका अंतिम लक्ष्य ईरान की वर्तमान सरकार को भी उखाड़ फेंकना है। हालांकि, युद्ध की रणनीति और समय-सीमा बार-बार बदल रही है, जिससे यह स्पष्ट है कि यह संघर्ष लंबा चल सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सैनिकों की तारीफ करते हुए कहा कि युद्ध के मोर्चे पर अमेरिका बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। अमेरिकी सीनेट में रिपब्लिकन सदस्यों ने ट्रंप का समर्थन करते हुए युद्ध रोकने वाले प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका इस संघर्ष में ईरान के खिलाफ कड़े कदम उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

ईरान की जवाबी कार्रवाई
ईरान ने अपनी जवाबी कार्रवाई में बहरीन, कुवैत और इजरायल को भी निशाना बनाया। तुर्की ने बताया कि ईरान से छोड़ी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को NATO के डिफेंस सिस्टम ने तुर्की हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही तबाह कर दिया। इस संघर्ष में अब तक ईरान में 1000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं, लेबनान में 70 से अधिक और इजरायल में लगभग एक दर्जन लोग मारे गए हैं।
युद्ध की वजह से दुनिया की तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो चुकी है। मध्य पूर्व में लाखों यात्री फंसे हुए हैं और ईरान के पड़ोसी देशों को लगातार नुकसान झेलना पड़ रहा है। इस संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दबाव डाल दिया है और तेल की कीमतों में तेजी आई है।
अमेरिकी पनडुब्बी ने डुबोया ईरानी युद्धपोत
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बताया कि मंगलवार रात भारतीय महासागर में अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो के जरिए एक ईरानी युद्धपोत डुबो दिया। इस जहाज पर 119 लोग सवार थे। श्रीलंका के अधिकारियों ने कहा कि जहाज से 32 लोगों को बचाया गया, जबकि नौसेना ने 87 शव बरामद किए। यह हमला अमेरिकी और इजरायली संयुक्त कार्रवाई का हिस्सा था।
इजरायल ने भी बढ़ाई कार्रवाई
इजरायल ने ईरान की बसिज फोर्स से जुड़ी इमारतों को निशाना बनाया। यह वही फोर्स है जिसने जनवरी में प्रदर्शनकारियों पर खूनी दमन किया था। इसके अलावा इजरायल ने ईरान की आंतरिक सुरक्षा कमान की इमारतों पर भी हमले किए। दोनों देशों का उद्देश्य ईरानी लोगों में सत्ता को चुनौती देने और सरकार को कमजोर करने का भरोसा जगाना है।











