Iran-Israel War: क्या ईरान-इजरायल जंग में कूद सकता है पाकिस्तान? विदेश मंत्री इशाक डार के बयान से बढ़ी हलचल

Iran-Israel War: क्या ईरान-इजरायल जंग में कूद सकता है पाकिस्तान? विदेश मंत्री इशाक डार के बयान से बढ़ी हलचल

Ishaq Dar ने कहा कि यदि Saudi Arabia पर बड़ा हमला हुआ तो Pakistan रक्षा समझौते के तहत युद्ध में शामिल हो सकता है। Iran-Israel संघर्ष के बीच इस बयान से मिडिल ईस्ट में नई चिंता बढ़ गई है।

Iran-Israel War: मिडिल ईस्ट में जारी ईरान-इजरायल युद्ध के बीच पाकिस्तान के एक बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री Ishaq Dar ने संकेत दिया है कि अगर सऊदी अरब पर बड़ा हमला होता है तो पाकिस्तान इस युद्ध में शामिल हो सकता है।

दरअसल पाकिस्तान और Saudi Arabia के बीच हुए रक्षा समझौते को लेकर यह बयान सामने आया है। इस समझौते के तहत दोनों देशों ने एक दूसरे की सुरक्षा को लेकर सहयोग का वादा किया है। यही वजह है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान की भूमिका पर अब सवाल उठने लगे हैं।

ईरान को दी गई चेतावनी

पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने हाल ही में अपने ईरानी समकक्ष से बातचीत के दौरान साफ कहा कि सऊदी अरब पर किसी भी तरह का बड़ा हमला क्षेत्र की स्थिति को और गंभीर बना सकता है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान ने ईरान को स्पष्ट संदेश दिया है कि सऊदी अरब के साथ उसका रक्षा समझौता सक्रिय है।

डार के अनुसार उन्होंने ईरान को यह समझाया कि अगर सऊदी अरब पर हमला होता है तो पाकिस्तान को अपने समझौते के तहत प्रतिक्रिया देनी पड़ सकती है। यह पहला मौका है जब पाकिस्तान के किसी वरिष्ठ अधिकारी ने सार्वजनिक रूप से इस संभावना का जिक्र किया है।

इस बयान के बाद मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष को लेकर कई नए सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर क्षेत्र के अन्य देश भी इसमें शामिल होते हैं तो यह संघर्ष एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है।

सऊदी अरब पर कम हमलों का दावा

इशाक डार ने यह भी कहा कि हाल के दिनों में ईरान ने कई देशों के सैन्य ठिकानों और ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाया है। इसके बावजूद सऊदी अरब पर अपेक्षाकृत कम हमले हुए हैं।

उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच सुरक्षा सहयोग की वजह से रियाद को एक तरह की सुरक्षा ढाल मिली है। डार के मुताबिक इसी कारण सऊदी अरब पर बड़े पैमाने पर हमला नहीं हुआ।

इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि ईरान ने पाकिस्तान से यह आश्वासन मांगा था कि सऊदी अरब की जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ किसी सैन्य कार्रवाई के लिए नहीं किया जाएगा।

सऊदी-पाकिस्तान रक्षा समझौता

पिछले वर्ष सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच जो सुरक्षा समझौता हुआ था उसे कई विश्लेषक NATO जैसी व्यवस्था के समान मानते हैं। इस समझौते का मुख्य सिद्धांत यह है कि यदि किसी एक देश पर हमला होता है तो उसे दोनों देशों के खिलाफ हमला माना जाएगा।

यह समझौता दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सुरक्षा सहयोग को औपचारिक रूप देने की दिशा में बड़ा कदम था। इससे पहले भी पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच सैन्य प्रशिक्षण, रक्षा तकनीक और रणनीतिक सहयोग जारी रहा है।

ईरान-इजरायल संघर्ष लगातार तेज

इधर मिडिल ईस्ट में सैन्य कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। Iran ने हाल ही में Israel की ओर कई मिसाइलें दागीं। इन हमलों के बाद क्षेत्र में लगातार छठे दिन भी हवाई हमले जारी रहे।

इससे पहले अमेरिका की एक पनडुब्बी ने ईरान के एक युद्धपोत को डुबो दिया था। इसके जवाब में ईरान ने पूरे क्षेत्र में सैन्य और आर्थिक ठिकानों को निशाना बनाने की धमकी दी थी।

लेबनान में भी बढ़ी सैन्य कार्रवाई

इस संघर्ष का असर लेबनान में भी देखने को मिला है। इजरायल ने हाल ही में दक्षिणी बेरूत में स्थित हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले किए हैं।

हिजबुल्लाह को ईरान समर्थित संगठन माना जाता है और लंबे समय से इजरायल के साथ उसका टकराव चलता रहा है। इस वजह से लेबनान में हुए हमलों को भी व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का हिस्सा माना जा रहा है। इजरायल का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य उन समूहों को कमजोर करना है जो ईरान के समर्थन से क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां चला रहे हैं।

अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई

ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई भी लगातार जारी है। दोनों देशों ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों और रणनीतिक केंद्रों पर हमले किए हैं।

इन हमलों के कारण ईरान के अंदर भी स्थिति तनावपूर्ण हो गई है। रिपोर्टों के अनुसार हमलों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि ईरान के सरकारी टेलीविजन को कई कार्यक्रम स्थगित करने पड़े।

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