नेपाल के आम चुनाव में बड़ा उलटफेर, Balendra Shah की RSP को Gen Z का समर्थन, ऐतिहासिक जीत की संभावना

नेपाल के आम चुनाव में बड़ा उलटफेर, Balendra Shah की RSP को Gen Z का समर्थन, ऐतिहासिक जीत की संभावना

नेपाल के आम चुनाव में Balendra Shah उर्फ ‘बालेन’ की Rastriya Swatantra Party को Gen Z मतदाताओं का मजबूत समर्थन मिला है। शुरुआती रुझानों में पार्टी 18 सीटें जीतकर और कई पर बढ़त के साथ ऐतिहासिक जीत की ओर बढ़ रही है।

Nepal General Election 2026: नेपाल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है। रैपर से राजनेता बने Balendra Shah, जिन्हें आम तौर पर ‘बालेन’ के नाम से जाना जाता है, उनकी अगुवाई वाली Rastriya Swatantra Party (RSP) आम चुनाव में ऐतिहासिक जीत की ओर बढ़ती नजर आ रही है। चुनाव के शुरुआती रुझानों ने पारंपरिक राजनीतिक दलों की मजबूत पकड़ को चुनौती दे दी है। 

पिछले वर्ष सितंबर में हुए Gen Z विरोध प्रदर्शनों के बाद आयोजित यह पहला आम चुनाव है, जिसने देश की राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव का संकेत दिया है। राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहे नेपाल में युवा मतदाताओं का रुझान नई राजनीति की ओर जाता दिखाई दे रहा है, जिससे आरएसपी के सबसे बड़ी पार्टी बनने की संभावना बढ़ गई है।

निर्वाचन आयोग के आंकड़ों में RSP आगे

Election Commission of Nepal के हालिया आंकड़ों के अनुसार, आरएसपी ने अब तक 18 सीटों पर जीत दर्ज कर ली है, जबकि 99 अन्य सीटों पर वह बढ़त बनाए हुए है। यह रुझान साफ संकेत देता है कि पार्टी चुनाव में बड़ी सफलता हासिल कर सकती है। दूसरी ओर, पारंपरिक दलों का प्रदर्शन अपेक्षा से कमजोर रहा है। Nepali Congress ने चार सीटों पर जीत हासिल की है और 11 सीटों पर आगे चल रही है। 

वहीं Communist Party of Nepal (Unified Marxist–Leninist) ने एक सीट जीती है और 11 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। इसके अलावा Communist Party of Nepal (Maoist Centre) ने दो सीटों पर जीत दर्ज की है और 10 सीटों पर आगे है। इन परिणामों से यह स्पष्ट हो रहा है कि नेपाल की राजनीति में पारंपरिक दलों की पकड़ कमजोर होती दिख रही है।

भारत की नजर नेपाल के चुनाव परिणामों पर

नेपाल के आम चुनावों पर India भी करीब से नजर बनाए हुए है। दोनों देशों के बीच गहरे आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध हैं, इसलिए राजनीतिक स्थिरता भारत के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। भारत सरकार ने उम्मीद जताई है कि चुनाव के बाद नेपाल में एक स्थिर सरकार बनेगी, जिससे दोनों देशों के बीच विकासात्मक सहयोग को और मजबूत किया जा सकेगा। 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने दिल्ली में कहा कि भारत नेपाल की नई सरकार के साथ मिलकर द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत लगातार नेपाल में शांति, प्रगति और स्थिरता का समर्थन करता रहा है। इसी प्रतिबद्धता के तहत नेपाल सरकार के अनुरोध पर भारत ने चुनाव प्रक्रिया के लिए आवश्यक लॉजिस्टिक सहायता भी उपलब्ध कराई थी।

संसद की संरचना और मतदान प्रक्रिया

नेपाल की संसद, जिसे House of Representatives of Nepal कहा जाता है, कुल 275 सदस्यों से मिलकर बनती है। इनमें से 165 सदस्यों का चुनाव प्रत्यक्ष मतदान प्रणाली के तहत होता है, जबकि शेष 110 सदस्यों का चयन आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली से किया जाता है। इस चुनाव में लगभग 1.89 करोड़ मतदाता प्रतिनिधि सभा के लिए मतदान करने के पात्र थे। 

मतदान के दौरान लगभग 60 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया, जो नेपाल जैसे राजनीतिक रूप से सक्रिय देश के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रत्यक्ष चुनाव के तहत 165 सीटों के लिए लगभग 3,400 उम्मीदवार मैदान में थे, जबकि आनुपातिक प्रणाली की 110 सीटों के लिए करीब 3,135 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे थे। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि चुनाव में बड़ी संख्या में उम्मीदवारों ने भाग लिया और प्रतिस्पर्धा काफी तीव्र रही।

Gen Z विरोध प्रदर्शनों से बदली राजनीतिक दिशा

नेपाल की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर पिछले वर्ष सितंबर में हुए Gen Z विरोध प्रदर्शनों का बड़ा प्रभाव पड़ा है। आठ और नौ सितंबर को दो दिनों तक चले इन प्रदर्शनों ने सरकार के खिलाफ व्यापक जन असंतोष को सामने लाया था। इन विरोध प्रदर्शनों के बाद उस समय के प्रधानमंत्री K. P. Sharma Oli को सत्ता से हटना पड़ा था। ओली उस समय नेपाली कांग्रेस के समर्थन से बनी गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रहे थे, जिसे लगभग दो-तिहाई बहुमत प्राप्त था। 

राजनीतिक संकट के बाद Ram Chandra Poudel ने 12 सितंबर को प्रतिनिधि सभा को भंग कर दिया और नई राजनीतिक व्यवस्था के लिए कदम उठाए। इसके बाद Sushila Karki को कार्यवाहक प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया था।

Gen Z के मुद्दे बने चुनाव का केंद्र

Gen Z पीढ़ी से तात्पर्य उन युवाओं से है जिनका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ है। नेपाल में यह पीढ़ी अब राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रही है और उनके मुद्दे चुनावी चर्चा के केंद्र में रहे हैं। युवाओं ने भ्रष्टाचार विरोधी अभियान, सुशासन, भाई-भतीजावाद का अंत और राजनीतिक नेतृत्व में पीढ़ीगत बदलाव जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है।

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