एलीना और जादुई मुकुट का रहस्य

एलीना और जादुई मुकुट का रहस्य

'चमकीला वन' दुनिया की सबसे खूबसूरत जगह थी, जहाँ परियाँ रहती थीं। उनकी रानी, 'रानी परी', के पास एक अद्भुत जादुई मुकुट था। यह मुकुट सिर्फ सुंदरता के लिए नहीं था; इसकी जादुई रोशनी से ही पूरे जंगल के फूल खिलते थे और नदियों का पानी मीठा रहता था। एक सुबह, जब परियाँ उठीं, तो उन्होंने देखा कि जंगल की चमक फीकी पड़ गई है। रानी परी का मुकुट गायब था! अगर जल्द ही मुकुट नहीं मिला, तो पूरा चमकीला वन हमेशा के लिए अंधेरे में डूब जाएगा।

कहानी

पूरे परी लोक में हाहाकार मच गया। रानी परी बहुत उदास थीं। उनकी शक्ति कमज़ोर पड़ रही थी। सभी बड़ी और ताकतवर परियाँ डरी हुई थीं।

तभी भीड़ में से एक छोटी सी परी आगे आई, जिसका नाम 'एलीना' था। एलीना बाकी परियों जितनी तेज़ उड़ नहीं सकती थी और उसके पंख भी बहुत छोटे थे, लेकिन उसका हौसला पहाड़ जैसा बड़ा था।

एलीना ने रानी से कहा, 'महारानी, मैं आपका मुकुट ढूँढ कर लाऊँगी।'

कुछ परियाँ हँसीं, लेकिन रानी ने एलीना की आँखों में सच्चाई देखी। उन्होंने उसे आशीर्वाद दिया।

एलीना अपनी यात्रा पर निकल पड़ी। उसने सुना था कि जंगल के पार, 'काली पहाड़ियों' में रहने वाले शरारती बौने (Gnomes) अक्सर चमकती चीज़ें चुरा लेते हैं।

रास्ते में उसे एक बूढ़ा और समझदार जुगनू (Glow-worm) मिला, जिसका नाम 'टिमटिम' था। टिमटिम ने कहा, 'एलीना, रास्ता बहुत कठिन है। काली पहाड़ियों में बहुत अंधेरा होता है।'

एलीना बोली, 'मुझे डर नहीं लगता, टिमटिम काका।'

टिमटिम उसकी बहादुरी से खुश हुआ और बोला, 'मैं तुम्हारे साथ चलूँगा और अंधेरे में तुम्हें रास्ता दिखाऊँगा।'

वे आगे बढ़े। रास्ते में उन्हें 'कांटेदार झाड़ियों' का सामना करना पड़ा। एलीना के छोटे पंख उसमें फँस सकते थे। तभी उनकी मदद के लिए एक गिलहरी आई, जिसका नाम 'चिक्की' था। चिक्की ने कहा, 'मेरे ऊपर बैठ जाओ छोटी परी, मैं तुम्हें इन कांटों के पार ले जाऊँगी।'

टिमटिम की रोशनी और चिक्की की फुर्ती के साथ, एलीना आखिरकार काली पहाड़ियों की एक गहरी गुफा के पास पहुँची। गुफा के अंदर से अजीब सी आवाज़ें आ रही थीं।

एलीना ने हिम्मत करके अंदर झाँका। वहाँ 'गोलू' नाम का एक बौना बैठा था। उसके हाथ में रानी परी का जादुई मुकुट था। गोलू मुकुट को सिर पर रखने की कोशिश कर रहा था, लेकिन वह उसके लिए बहुत बड़ा था। वह बस उसकी चमक देखकर खुश हो रहा था।

एलीना समझ गई कि गोलू बुरा नहीं है, उसे बस चमकती चीज़ें पसंद हैं।

एलीना चुपके से अंदर गई। गोलू उसे देखकर डर गया। एलीना ने प्यार से कहा, 'नमस्ते गोलू! तुम्हारा यह खिलौना बहुत सुंदर है।'

गोलू ने मुकुट छिपाते हुए कहा, 'यह मेरा है! मुझे चमकती चीज़ें पसंद हैं।'

एलीना ने मुस्कुराते हुए अपनी जेब से एक कांच की कंची (Marble) निकाली, जो सूरज की रोशनी में बहुत तेज़ चमक रही थी। उसने कहा, 'देखो, मेरे पास इससे भी ज़्यादा चमकने वाली चीज़ है। क्या तुम अदला-बदली करोगे?'

गोलू ने कंची देखी। वह मुकुट से भी ज़्यादा रंगीन और चमकदार लग रही थी। उसने तुरंत मुकुट नीचे रखा और खुशी-खुशी कंची ले ली।

एलीना ने झटपट जादुई मुकुट उठाया। उसने गोलू को धन्यवाद दिया और टिमटिम व चिक्की के साथ वापस परी लोक की ओर दौड़ पड़ी।

जैसे ही वे चमकीला वन पहुँचे, जंगल के पेड़-पौधे मुरझा रहे थे। एलीना ने दौड़कर रानी परी के सिर पर मुकुट रख दिया।

मुकुट रखते ही एक तेज़ सुनहरी रोशनी निकली। देखते ही देखते, मुरझाए हुए फूल फिर से खिल उठे, नदियों का पानी साफ़ हो गया और पूरा जंगल पहले से भी ज़्यादा चमकने लगा।

रानी परी ने एलीना को गले लगा लिया। उस दिन सभी ने जाना कि साहस का आकार से कोई लेना-देना नहीं होता। छोटी सी एलीना चमकीला वन की सबसे बड़ी हीरो बन गई थी।

सीख 

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि 'किसी भी समस्या को हल करने के लिए सिर्फ़ ताकत की नहीं, बल्कि साहस और सूझ-बूझ की भी ज़रूरत होती है। कभी-कभी प्यार और समझदारी से बड़े से बड़े झगड़े भी सुलझाए जा सकते हैं।'

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