शिवाजी जयंती: पंडित गागभट्ट ने क्या कहा था और शिवनेरी किले से क्या है जुड़ाव?

शिवाजी जयंती: पंडित गागभट्ट ने क्या कहा था और शिवनेरी किले से क्या है जुड़ाव?

कलियुग में क्षत्रिय कर्तव्य के सभी स्वरूप पूरी तरह लुप्त हो गए हैं। पृथ्वी यवनों (मुसलमानों) से भरी पड़ी है, जिन्होंने राजाओं के सिंहासन हथिया लिए हैं। सूर्यवंशी और चंद्रवंशी योद्धाओं में वीरता का कोई अंश नहीं बचा है।

Shivaji Jayanti: भारत और महाराष्ट्र के इतिहास में छत्रपति शिवाजी महाराज का नाम वीरता, दूरदर्शिता और राज्य निर्माण के प्रतीक के रूप में हमेशा याद किया जाता है। हर साल 19 फरवरी को उनकी जयंती पूरे देश में मनाई जाती है। इस अवसर पर पुणे जिले के शिवनेरी किले में भारी संख्या में श्रद्धालु इकट्ठा होते हैं, क्योंकि यही किला शिवाजी महाराज का जन्मस्थल है। इस साल भी शिवनेरी किले में जयंती के अवसर पर बड़ी भीड़ जमा हुई, जिसमें अचानक भगदड़ मच गई और कई महिलाएं व बच्चे घायल हुए।

शिवाजी महाराज के जन्म और राज्याभिषेक से जुड़ी कई ऐतिहासिक घटनाओं और अनुष्ठानों का उल्लेख इतिहासकारों और पुरालेखों में मिलता है। इनमें सबसे खास भूमिका निभाई थी काशी से आए पंडित गागभट्ट ने, जिन्होंने शिवाजी को राज्याभिषेक के दौरान मंत्रों और परंपराओं के अनुसार छत्रपति का ताज पहनाया।

पंडित गागभट्ट ने शिवाजी से क्या कहा था?

इतिहास में दर्ज है कि 1674 में जब शिवाजी महाराज ने अपना राज्याभिषेक करवाया, तब पंडित गागभट्ट ने उन्हें शाब्दिक रूप से प्रेरित किया। गागभट्ट ने कहा था:

'कलियुग में क्षत्रिय कर्तव्य के सभी स्वरूप पूरी तरह लुप्त हो गए हैं। पृथ्वी यवनों (मुसलमानों) से भरी पड़ी है, जिन्होंने राजाओं के सिंहासन हथिया लिए हैं। सूर्यवंशी और चंद्रवंशी योद्धाओं में वीरता का कोई अंश नहीं बचा है। यज्ञ बंद हो गए हैं, कर्तव्य भुला दिए गए हैं, धर्म पर ग्रहण लग गया है। केवल आप ही हैं जिन्होंने महान वीरता का परिचय देते हुए मुस्लिम सुल्तानों को परास्त किया, औरंगजेब को शांत किया और उसके सलाहकारों को पराजित किया।'

गागभट्ट ने आगे कहा:

'आपने एक विशाल राज्य, एक लाख घुड़सवार सेना, 360 किले और अपार संपत्ति पर अधिकार किया। फिर भी आप किसी प्रतिष्ठित सिंहासन से वंचित हैं। हमारी और स्वराज के अन्य लोगों की इच्छा है कि आप राजा का ताज पहनें और अन्य शासकों के सामने राजसी छत्र के राजा के रूप में सम्मानित हों। औपचारिक राज्याभिषेक के बिना शासक राजा का कोई सम्मान नहीं होता। अपना राज्याभिषेक करवाकर आप औरंगजेब और अन्य सुल्तानों का घमंड चूर करेंगे।'

इन शब्दों ने शिवाजी को प्रेरित किया और 6 जून 1674 को रायगढ़ किले में वैदिक मंत्रों के साथ उनका राज्याभिषेक हुआ।

पंडित गागभट्ट कौन थे?

वास्तविक नाम विश्वेश्वर पंडित था। वह 17वीं सदी के वाराणसी के प्रतिष्ठित विद्वान और संस्कृत विशेषज्ञ थे। गागभट्ट ने शिवाजी महाराज का उपनयन संस्कार किया और उन्हें छत्रपति का ताज पहनाने के लिए रीति-रिवाजों और वैदिक मंत्रों का प्रयोग किया। राज्याभिषेक के समय पंडित गागभट्ट ने सात पवित्र नदियों का पानी (गंगा, यमुना, नर्मदा, सिंधु, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी) सोने के पात्र में मंगवाया और शिवाजी महाराज को सिर पर डालकर नहलाया। इस अनुष्ठान ने शिवाजी को क्षत्रिय धर्म और मराठा शक्ति का प्रतीक बनाया।

शिवाजी का राज्याभिषेक और इंद्राभिषेक

राज्याभिषेक के बाद शिवाजी ने इंद्राभिषेक अनुष्ठान भी कराया, जो उस समय लगभग लुप्त हो चुका था। इसे 9वीं शताब्दी से सामान्य तौर पर नहीं किया जाता था। इस अनुष्ठान के माध्यम से शिवाजी को 'शककर्ता' की उपाधि दी गई, जिससे यह संदेश गया कि मराठा साम्राज्य अब स्वतंत्र और शक्तिशाली है।राज्याभिषेक के बाद सबसे पहले शिवाजी ने अपनी माता जीजाबाई के पांव छुए और आशीर्वाद लिया। उस समय रायगढ़ किले में लगभग 50,000 लोग इस ऐतिहासिक अवसर का गवाह बने।

शिवनेरी किले का इतिहास

शिवनेरी किला, जो पुणे जिले के जुन्नार क्षेत्र में स्थित है, शिवाजी महाराज का जन्मस्थल है। उनका जन्म 19 फरवरी, 1630 को इस किले में हुआ। 1632 में मां जीजाबाई उन्हें किले से ले गईं। 1637 में निजाम ने शिवनेरी किले को मुगलों के हवाले कर दिया। इसके बाद 1650 में स्थानीय मछुआरों के समुदाय कोलियों ने किले पर विद्रोह किया, लेकिन मुगलों ने किला कब्जे में रखा।

शिवाजी महाराज ने 1673 और 1678 में किले पर कब्जा करने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हुए। अंततः 1716 में उनके पोते शाहू जी महाराज ने किला अपने साम्राज्य में शामिल कर लिया और बाद में इसे पेशवाओं को सौंप दिया गया। शिवाजी महाराज ने अपने राज्याभिषेक और शासन से स्पष्ट कर दिया कि राजनीतिक शक्ति और सैन्य सामर्थ्य का संतुलन किस प्रकार से बनाए रखा जाता है। 

पंडित गागभट्ट की सलाह ने उन्हें औपचारिक रूप से छत्रपति बनाया और औरंगजेब सहित अन्य मुगलों के घमंड को चुनौती दी। उनका जन्मस्थल शिवनेरी किला और राज्याभिषेक स्थल रायगढ़ किला आज भी इतिहास प्रेमियों और श्रद्धालुओं के लिए तीर्थस्थान हैं।

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