Elon Musk की मदद से अमेरिका के 11 स्कूलों में लगा एडवांस्ड वॉटर फिल्ट्रेशन सिस्टम, जानें कैसे करता है काम

Elon Musk की मदद से अमेरिका के 11 स्कूलों में 130 वॉटर फिल्ट्रेशन स्टेशन लगाए गए। तीन-स्टेज सिस्टम सीसा और बैक्टीरिया हटाने में मदद करता है।

Elon Musk की मदद से अमेरिका के फ्लिंट कम्युनिटी स्कूल्स में 11 स्कूलों और प्रशासनिक इमारतों में 130 वॉटर फिल्ट्रेशन स्टेशन लगाए गए। सिस्टम तीन चरणों में पानी साफ करता है और सीसा व बैक्टीरिया हटाने में मदद करता है।

Tech: अमेरिका के फ्लिंट कम्युनिटी स्कूल्स में साफ पीने के पानी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए एडवांस्ड फिल्ट्रेशन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इस प्रोजेक्ट के लिए Elon Musk ने लगभग 4 करोड़ रुपये का दान दिया था। सिस्टम में एक्टिवेटेड कार्बन, अल्ट्राफिल्ट्रेशन और UV लाइट के तीन चरण शामिल हैं, जिससे छात्रों तक पहुंचने वाले पानी की गुणवत्ता बेहतर हुई है।

11 स्कूलों में लगाए गए 130 फिल्ट्रेशन स्टेशन

फ्लिंट के 11 स्कूलों और प्रशासनिक इमारतों में कुल 130 फिल्ट्रेशन स्टेशन लगाए गए हैं। इन सिस्टम्स का उद्देश्य छात्रों और स्टाफ को स्कूल परिसर में सीधे नलों से पीने योग्य पानी उपलब्ध कराना है।

फिल्ट्रेशन सिस्टम पानी को तीन अलग-अलग चरणों से गुजारता है। पहले चरण में एक्टिवेटेड कार्बन फिल्टर पानी से लेड, कॉपर और दूसरे हानिकारक कणों को हटाने में मदद करता है। इसके बाद अल्ट्राफिल्टर अधिकांश बैक्टीरिया को अलग करता है। आखिरी चरण में UV लाइट का इस्तेमाल बचे हुए बैक्टीरिया और वायरस को खत्म करने के लिए किया जाता है।

2018 में शुरू हुआ था प्रोजेक्ट

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 2018 में हुई थी। फ्लिंट जल संकट के बाद Elon Musk ने वॉटर फिल्ट्रेशन स्टेशनों के लिए लगभग 4 करोड़ रुपये का दान दिया था।

फिल्ट्रेशन स्टेशन 2019-20 में लगाए गए थे, लेकिन टेस्टिंग के दौरान शुरुआती यूनिट्स में कुछ कमियां सामने आईं। इन फिल्टरों को अपेक्षित सर्टिफिकेशन भी नहीं मिल पाया। इसके बाद रिसर्चर्स ने सिस्टम को दोबारा डिजाइन किया और 2021 में नए यूनिट्स की टेस्टिंग शुरू की।

फिल्ट्रेशन के बाद सीसे का स्तर हुआ जीरो

फिल्टर लगाने से पहले अलग-अलग स्कूलों में पानी में सीसे का स्तर 219 पार्ट्स प्रति बिलियन से 620 पीपीबी तक पाया गया था। रिपोर्ट में 15 पीपीबी से अधिक स्तर को खतरनाक बताया गया है।

नए फिल्ट्रेशन सिस्टम लगाए जाने के बाद पानी में सीसे का स्तर जीरो दर्ज किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्टर किए गए पानी में सीसा या हानिकारक बैक्टीरिया नहीं पाए गए, जिसके बाद छात्रों के लिए स्कूल के नलों से सीधे पानी पीना संभव हुआ।

भारत के लिए क्यों अहम है यह तकनीक

स्कूलों में सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता भारत के लिए भी एक महत्वपूर्ण बुनियादी जरूरत है। एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में करीब 1.2 करोड़ बच्चों के लिए स्कूलों में पीने के साफ पानी की बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं है।

फ्लिंट में इस्तेमाल की गई तरह की मल्टी-स्टेज फिल्ट्रेशन तकनीक पानी में मौजूद अलग-अलग प्रकार के प्रदूषकों को लक्षित करने का एक तरीका हो सकती है। हालांकि, किसी भी जगह सिस्टम लगाने से पहले स्थानीय पानी की गुणवत्ता, प्रदूषकों के प्रकार और संबंधित सुरक्षा मानकों के आधार पर तकनीक का चयन जरूरी होगा।

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