एनसीईआरटी की 8वीं कक्षा की किताब के एक चैप्टर को लेकर विवाद को लेकर कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि प्रधानमंत्री इस मामले में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' जैसे मुद्दे पर केवल 'बनावटी आक्रोश' दिखा रहे हैं।
नई दिल्ली: एनसीईआरटी की आठवीं कक्षा की पाठ्यपुस्तक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ वाले अध्याय को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने इस मामले में सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि वह विवाद को लेकर केवल बनावटी आक्रोश दिखा रहे हैं। कांग्रेस सांसद और संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री की नाराजगी का यह प्रदर्शन केवल डैमेज कंट्रोल का हिस्सा है।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में लिखा, इजरायल में वास्तविक नैतिक कायरता दिखाने के बाद प्रधानमंत्री, अब एनसीईआरटी की पुस्तकों के मुद्दे पर बनावटी आक्रोश जता रहे हैं। यह साफ तौर पर हिपोक्रेसी है। उनका संदेश केवल इतना है कि वे एनसीईआरटी की पाठ्य पुस्तकों में न्यायपालिका के आलोचनात्मक उल्लेख से नाखुश हैं।
पीएम मोदी की नाराजगी के संकेत
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विवाद से पहले ही कैबिनेट की बैठक के दौरान एनसीईआरटी की किताब में न्यायपालिका को लेकर कुछ विवादास्पद सामग्री शामिल किए जाने पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था, “आठवीं क्लास के बच्चों को सोशल साइंस की पाठ्यपुस्तक में हम क्या पढ़ा रहे हैं?
हालांकि कांग्रेस का आरोप है कि यह नाराजगी केवल सतही दिखावा है और पूरे विवाद की जिम्मेदारी स्वयं पीएम मोदी पर है। पार्टी ने कहा कि पिछले एक दशक से प्रधानमंत्री ऐसे शिक्षाविदों और नेटवर्क का नेतृत्व कर रहे हैं जिन्होंने अपने वैचारिक एजेंडे से पाठ्य पुस्तकों को प्रभावित किया।

कांग्रेस का आरोप: सुनियोजित वैचारिक अभियान
कांग्रेस ने इसे सिर्फ आकस्मिक चूक नहीं बल्कि एक सुनियोजित वैचारिक घुसपैठ अभियान बताया है। जयराम रमेश ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी स्वयं नागपुर कम्युनल इकोसिस्टम फॉर रिराइटिंग ऑफ टेक्स्टबुक्स की दिशा और आकार निर्धारित करते रहे हैं। उनके नेतृत्व में पाठ्य पुस्तकों को राजनीतिक और वैचारिक हिसाब-किताब चुकाने के औजार में बदल दिया गया है।
कांग्रेस का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट को नाराज करने वाली किताबों से खुद को अलग दिखाने की कोशिश केवल हिपोक्रेसी है। पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से विस्तृत जांच की मांग की है कि किस तरह से पाठ्य पुस्तकों को दोबारा लिखा गया और उनका उद्देश्य क्या था।
सुप्रीम कोर्ट ने लगाया बैन
इस विवाद को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया और गुरुवार को विवादित अध्याय वाली एनसीईआरटी आठवीं कक्षा की किताब पर बैन लगा दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने इस किताब के किसी भी रूप में सर्कुलेशन पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल शिक्षा सचिव और एनसीईआरटी चेयरपर्सन को नोटिस जारी कर पूछा कि उनके खिलाफ न्यायपालिका की अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बच्चों को दी जा रही शिक्षा में न्यायपालिका की छवि को प्रभावित करने वाले विवादास्पद अध्याय शामिल करना स्वीकार्य नहीं है।












