केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने जयराम रमेश की EU-FTA और RCEP टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि यूपीए सरकार ने मुक्त व्यापार समझौतों में देरी कर देश के आर्थिक और राष्ट्रीय हितों को खतरे में डाला।
New Delhi: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश की हालिया टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। रमेश ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (EU-FTA) पर आलोचना की थी, जिस पर गोयल ने इसे "अंगूर खट्टे हैं" वाला मामला बताया। उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाया कि यूपीए सरकार ने इस समझौते को अंतिम रूप देने में विफल रहकर देश के विकास और राष्ट्रीय हितों को खतरे में डाला।
गोयल ने कहा कि जयराम रमेश और कांग्रेस का इतिहास विकास विरोधी रहा है और उन्होंने पर्यावरण मंत्री रहते हुए कई ऐसे कदम उठाए, जिन्होंने देश के विकास की राह को अवरुद्ध किया।
कांग्रेस पर आरसीईपी के फैसले को लेकर आरोप
गोयल ने कांग्रेस पर आरसीईपी (Regional Comprehensive Economic Partnership) के माध्यम से भारत को चीन के साथ हानिकारक मुक्त व्यापार समझौते में धकेलने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने भारत के हितों की परवाह किए बिना चीन के साथ एफटीए की अनुमति दे दी, जो देश के आर्थिक सुरक्षा और व्यापारिक संतुलन के लिए गंभीर खतरा था।
उन्होंने सीधे सवाल उठाया, "आपने भारत को आरसीईपी में शामिल होने देने के बारे में कभी सोचा भी?" गोयल ने इसे कांग्रेस की बड़ी गलती बताते हुए कहा कि इस कदम से भारत के रणनीतिक और आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचा।
इतिहास का हवाला देते हुए गोयल की आलोचना
गोयल ने इस पूरे मामले में कांग्रेस के पुराने रिकॉर्ड को भी सामने रखा। उन्होंने बताया कि 2006 में भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौतों पर चर्चा शुरू हुई थी और 2007 में इसे आगे बढ़ाया गया। लेकिन 2013 तक समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया गया।

गोयल ने कहा, "उन्हें साहस या इच्छाशक्ति नहीं थी कि वे निर्णायक कदम उठाएं। डर के मारे यूपीए और कांग्रेस सरकारें हमेशा पीछे रही। जयराम रमेश जैसे नेता तो विकास विरोधी माने जाते हैं। उन्होंने पर्यावरण मंत्री रहते हुए देश के विकास की राह रोक दी।"
चीन के साथ एफटीए को लेकर चिंता
गोयल ने जोर देते हुए कहा कि कांग्रेस ने चीन के साथ मुक्त व्यापार समझौते को आगे बढ़ाकर देश को आर्थिक नुकसान में डालने का काम किया। उन्होंने कहा कि आरसीईपी के तहत भारत का चीन के साथ सीधे व्यापारिक संबंध स्थापित होना भारत के हितों के खिलाफ था।
उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि वे जनता को कैसे जवाब देंगे कि उन्होंने देश के हितों को खतरे में डालकर चीन को फायदा पहुंचाने की अनुमति क्यों दी। गोयल ने इसे कांग्रेस की "सांठ-गांठ और गंभीर गलती" बताया।
गोयल ने एफटीए और आरसीईपी के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि किसी भी मुक्त व्यापार समझौते का उद्देश्य देश के आर्थिक हितों की सुरक्षा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने यह नहीं देखा कि चीन के साथ समझौते से भारत का घरेलू उद्योग और व्यापारिक संतुलन प्रभावित होगा।
गोयल ने इसे देश की आर्थिक सुरक्षा और राष्ट्रीय हित के खिलाफ बताते हुए कहा कि यह फैसला केवल तत्काल लाभ देने के लिए लिया गया था, जिससे चीन को फायदा हुआ। उन्होंने कहा कि देश को ऐसे समझौतों से सतर्क रहना चाहिए और भविष्य में किसी भी निर्णय में राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देना जरूरी है।
जयराम रमेश पर व्यक्तिगत तंज
गोयल ने रमेश पर व्यक्तिगत तंज भी कसा और कहा कि उनकी सोच देश के विकास के अनुकूल नहीं रही। उन्होंने कहा कि जयराम रमेश ने पर्यावरण मंत्रालय के पद पर रहते हुए कई ऐसे निर्णय लिए, जो विकास विरोधी थे। इसके चलते देश के आर्थिक विकास और व्यापारिक अवसरों को नुकसान हुआ।
गोयल ने कांग्रेस और जयराम रमेश को चुनौती देते हुए कहा कि वे जनता को जवाब दें कि उन्होंने देश को चीन के साथ आर्थिक समझौतों में शामिल होने की अनुमति क्यों दी।










