फौजी बनकर युवती से ठगी का आरोप, पहचान छिपाने का दावा; पैसे ऐंठने की शिकायत पर जांच शुरू

फौजी बनकर युवती से ठगी का आरोप, पहचान छिपाने का दावा; पैसे ऐंठने की शिकायत पर जांच शुरू
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पटना: एक युवती ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि एक व्यक्ति ने अपनी पहचान छिपाकर खुद को भारतीय सेना का जवान बताया और लंबे समय तक उससे संपर्क में रहा। युवती का कहना है कि आरोपी ने विश्वास जीतने के बाद अलग-अलग बहाने बनाकर उससे पैसे लिए। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है।

पीड़िता के अनुसार, आरोपी ने खुद को सेना में तैनात बताया और बाद में यह कहकर पैसे मांगे कि वह किसी गंभीर संकट में फंस गया है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपी ने कथित तौर पर आतंकियों के कब्जे में होने जैसी कहानी सुनाकर सहानुभूति हासिल की और आर्थिक मदद मांगी।

युवती का आरोप है कि जब उसे आरोपी पर शक हुआ और उसने उसके बारे में जानकारी जुटाई, तब उसे पता चला कि आरोपी सेना में नहीं है। उसने दावा किया कि आरोपी का वास्तविक पेशा कुछ और है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच के दौरान होना बाकी है।

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आरोपी की पहचान, मोबाइल नंबर, बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन और चैट रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है। साइबर और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में यह साबित होता है कि आरोपी ने फर्जी पहचान बनाकर धोखाधड़ी की है, तो उसके खिलाफ भारतीय कानून के तहत उचित धाराओं में कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि कहीं इस तरह की शिकायतें अन्य लोगों से भी तो नहीं मिली हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अनजान लोगों की पहचान की पुष्टि किए बिना उन पर भरोसा करना और आर्थिक लेनदेन करना जोखिम भरा हो सकता है। किसी भी व्यक्ति द्वारा नौकरी, सरकारी पद या सेना से जुड़ी पहचान बताने पर उसकी आधिकारिक पुष्टि करना आवश्यक है।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति भावनात्मक कहानियां सुनाकर या आपात स्थिति का हवाला देकर पैसे मांगे, तो पहले उसकी पहचान और दावों की पुष्टि करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन को दें।

महत्वपूर्ण: इस मामले में धर्म, पेशे और अन्य व्यक्तिगत दावों से जुड़ी बातें शिकायतकर्ता के आरोपों पर आधारित हैं। इनकी पुष्टि अभी जांच या अदालत द्वारा नहीं हुई है। मामले का अंतिम निष्कर्ष पुलिस जांच, उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

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