किसान संगठनों ने सांसदों और विधायकों से व्यापार समझौतों के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की है। संगठनों ने सरकार से किसानों के हितों को देखते हुए मौजूदा Free Trade Agreements की समीक्षा और उन्हें रद्द करने की मांग की।
New Delhi: किसान संगठनों ने भारत के मौजूदा और प्रस्तावित Trade Deals को लेकर राजनीतिक प्रतिनिधियों से हस्तक्षेप की अपील की है। संगठनों का कहना है कि Free Trade Agreements का कृषि क्षेत्र पर असर पड़ सकता है। उन्होंने MPs और MLAs से किसानों के हितों की आवाज उठाने तथा सरकार पर सभी FTAs की समीक्षा कर उन्हें खत्म करने का दबाव बनाने की मांग की है।
किसान संगठनों ने Trade Deals का विरोध तेज किया
किसान संगठनों ने देश में किए जा रहे विभिन्न व्यापार समझौतों को लेकर अपनी आपत्ति जताई है। संगठनों ने सांसदों और विधायकों से अपील की है कि वे Trade Deals से जुड़े मुद्दे को संसद और विधानसभा स्तर पर उठाएं। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों का असर किसानों, कृषि उत्पादों के बाजार और घरेलू कीमतों पर पड़ सकता है।

किसान समूहों ने सरकार से सभी Free Trade Agreements यानी FTAs की समीक्षा करने और उन्हें समाप्त करने की मांग की है। उनका तर्क है कि व्यापार नीति तय करते समय घरेलू कृषि क्षेत्र और किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। संगठनों ने राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधियों से भी इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाने की अपील की है।
किसान संगठनों की Trade Deals पर आपत्ति
किसान संगठनों के मुताबिक अलग-अलग देशों के साथ होने वाले व्यापार समझौतों में आयात और निर्यात से जुड़े प्रावधान कृषि बाजार को प्रभावित कर सकते हैं। विदेशी कृषि उत्पादों की आसान एंट्री से घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है, जिसका असर किसानों को मिलने वाली कीमतों पर पड़ने की आशंका जताई गई है।
संगठनों का कहना है कि भारत में बड़ी संख्या में किसान अपनी आय के लिए कृषि उपज की बिक्री पर निर्भर हैं। ऐसे में किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते का मूल्यांकन केवल व्यापार बढ़ाने के नजरिए से नहीं, बल्कि उसके कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रभाव को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
MPs-MLAs से मुद्दा उठाने की अपील
किसान संगठनों ने सांसदों और विधायकों से कहा है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के किसानों की चिंताओं को सरकार तक पहुंचाएं। संगठनों के अनुसार जनप्रतिनिधियों को व्यापार समझौतों के कृषि क्षेत्र पर संभावित प्रभाव पर चर्चा करनी चाहिए और किसानों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग करनी चाहिए।
उनका जोर इस बात पर है कि व्यापार नीति में किसानों की भागीदारी और उनकी चिंताओं को पर्याप्त महत्व मिले। संगठनों ने जनप्रतिनिधियों से इस विषय को संसद और विधानसभाओं में उठाने की अपील की है, ताकि सरकार पर नीति की समीक्षा का दबाव बनाया जा सके।
सभी FTAs की समीक्षा की मांग
किसान संगठनों की प्रमुख मांग मौजूदा Free Trade Agreements को लेकर व्यापक समीक्षा की है। उनका कहना है कि सरकार को प्रत्येक समझौते के कृषि क्षेत्र पर प्रभाव का आकलन करना चाहिए। यदि किसी समझौते से घरेलू किसानों को नुकसान होने की आशंका है, तो उसके प्रावधानों पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए।
संगठनों ने सभी FTAs को खत्म करने की मांग भी रखी है। उनका कहना है कि भारत की व्यापार नीति ऐसी होनी चाहिए, जिससे घरेलू उत्पादन और किसानों की आय को नुकसान न पहुंचे।
Trade Deals को लेकर किसानों की यह चिंता ऐसे समय सामने आई है, जब भारत विभिन्न देशों और व्यापारिक समूहों के साथ आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए बातचीत कर रहा है। किसान संगठन चाहते हैं कि भविष्य के समझौतों में कृषि क्षेत्र से जुड़े हितों और किसानों की आजीविका को पर्याप्त सुरक्षा मिले।











