सितंबर तिमाही में महंगे हो सकते हैं साबुन, बिस्किट और तेल, ₹5-10 वाले पैकेट पर ज्यादा असर

सितंबर तिमाही में चीनी, पाम ऑयल और कच्चे माल की बढ़ती लागत से साबुन, बिस्किट और तेल महंगे हो सकते हैं। ₹5-10 के छोटे पैकेट पर ज्यादा असर होगा।

सितंबर तिमाही में कई FMCG कंपनियां कच्चे माल की बढ़ती लागत के चलते रोजमर्रा के उत्पादों की कीमतें बढ़ाने या पैकेट का वजन घटाने की तैयारी में हैं। इसका असर बिस्किट, साबुन और तेल जैसे सामान पर पड़ सकता है।

Business: महंगाई का असर अब रोजमर्रा के FMCG उत्पादों पर और बढ़ सकता है। ब्रिटानिया, डाबर, हिंदुस्तान यूनिलीवर और गोदरेज कंज्यूमर जैसी कंपनियां सितंबर तिमाही में लागत के दबाव को देखते हुए चुनिंदा उत्पादों की कीमतों में बदलाव की तैयारी कर रही हैं। खासतौर पर चीनी, पाम ऑयल और अन्य कच्चे माल की बढ़ती कीमतों का असर छोटे पैकेट वाले उत्पादों पर पड़ सकता है।

छोटे पैकेट के बिस्किट पर पड़ सकता है ज्यादा असर

FMCG कंपनियों के लिए बढ़ती इनपुट लागत इस समय बड़ी चुनौती बनी हुई है। चीनी और पाम ऑयल जैसी प्रमुख जिंसों की कीमतों में तेजी के कारण कंपनियां अपने मार्जिन को बनाए रखने के लिए उत्पादों की कीमत या पैक साइज में बदलाव पर विचार कर रही हैं।

ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज ने संकेत दिया है कि उसके ₹5 और ₹10 वाले बिस्किट पैकेट में वजन कम किया जा सकता है। इससे ग्राहक को पैकेट की कीमत समान दिखाई देगी, लेकिन उसमें मिलने वाले उत्पाद की मात्रा कम हो सकती है। इसे FMCG सेक्टर में Shrinkflation कहा जाता है।

कंपनी के मुताबिक, इस बदलाव से प्रभावी कीमत में करीब 1.5 से 2 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। यदि कच्चे माल की लागत आगे भी ऊंची रहती है तो कीमतों में अतिरिक्त बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।

डाबर और HUL भी कीमतों पर कर रहीं विचार

डाबर इंडिया ने भी कच्चे माल की लागत को लेकर चिंता जताई है। कंपनी के मुताबिक, यदि इनपुट कॉस्ट ऊंची बनी रहती है तो चुनिंदा उत्पादों के दाम बढ़ाए जा सकते हैं। इसके साथ ही कंपनी लागत दक्षता बढ़ाने पर भी काम कर रही है, ताकि बढ़ती लागत का असर मुनाफे पर सीमित रखा जा सके।

हिंदुस्तान यूनिलीवर यानी HUL का अनुमान है कि सितंबर तिमाही में लागत संबंधी महंगाई अप्रैल-जून तिमाही के मुकाबले 2 से 5 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। कंपनी ने संकेत दिया है कि कीमतों में बदलाव इस तरह किया जाएगा कि बिक्री और उपभोक्ता मांग पर ज्यादा असर न पड़े।

साबुन, तेल और अन्य रोजमर्रा के सामान भी प्रभावित

गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स भी कच्चे तेल और दूसरी प्रमुख जिंसों की कीमतों पर नजर बनाए हुए है। कंपनी ने फिलहाल बड़े स्तर पर कीमत बढ़ाने से परहेज किया है, लेकिन सितंबर तिमाही में लागत का दबाव बढ़ने पर कीमतों में बदलाव की संभावना बनी हुई है।

कंपनियों के सामने फिलहाल दो प्रमुख विकल्प हैं—उत्पादों की कीमत बढ़ाना या समान कीमत में पैकेट का वजन कम करना। जून तिमाही में कई कंपनियां पहले ही 2 से 5 प्रतिशत तक कीमतों में बढ़ोतरी कर चुकी हैं।

मानसून की अनिश्चितता और वैश्विक कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव भी कंपनियों की लागत को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में सितंबर तिमाही में साबुन, बिस्किट, तेल और अन्य रोजमर्रा के FMCG सामान खरीदने वाले ग्राहकों पर अतिरिक्त कीमत या कम मात्रा के रूप में असर देखने को मिल सकता है।

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