Four More Shots Please Season 4 Review: दोस्ती का आखिरी जाम, लेकिन स्वाद फीका

सीजन 4 में दोस्ती और रिश्तों की कहानी जारी है, पर लेखन और निर्देशन में ताजगी की कमी और पुराने मुद्दों का दोहराव नजर आता है।

Amazon Prime Video की फोर मोर शॉट्स प्लीज का चौथा और आखिरी सीजन पुराने फॉर्मूले के साथ लौटता है। कहानी में दोस्ती और रिश्तों का सफर जारी है, लेकिन नई सोच और ताजगी की कमी खलती है। मजबूत अभिनय के बावजूद लेखन और निर्देशन दर्शकों को पूरी तरह बांध नहीं पाते।

Four More Shots Please Review: Amazon Prime Video पर रिलीज हुआ फोर मोर शॉट्स प्लीज का सीजन 4 चार सहेलियों दमयंती, अंजना, उमंग और सिद्धि की जिंदगी के अगले पड़ाव को दिखाता है। कहानी शादी, करियर और निजी उलझनों के इर्द-गिर्द घूमती है, लेकिन 2024-25 की बदली ऑडियंस के लिए यह प्रस्तुति अपेक्षाकृत पुरानी लगती है। मजबूत परफॉर्मेंस के बावजूद सीरीज वही ग्लॉसी दुनिया और दोहराए गए मुद्दों में उलझी नजर आती है।

कहानी में क्या नया और क्या पुराना

सीजन 4 की कहानी सिद्धि की शादी के इर्द-गिर्द घूमती है, जो चारों दोस्तों की जिंदगी में नए बदलावों का संकेत देती है। अंजना मां और प्रोफेशनल लाइफ के बीच संतुलन तलाशती दिखती है, दमयंती परिवार के साथ अपने रिश्ते सुलझाने की कोशिश में है, उमंग बीते रिश्तों से निकलकर आगे बढ़ना चाहती है, जबकि सिद्धि अब भी निजी और प्रोफेशनल उलझनों में फंसी है।

कहानी भावनात्मक मोड़ों से गुजरती जरूर है, लेकिन ज्यादातर ट्रैक्स पहले देखे हुए लगते हैं। दोस्ती का बंधन कायम है, पर उसमें पहले जैसी ऊर्जा और ताजगी नहीं बची।

निर्देशन और लेखन कितना असरदार

निर्देशक और लेखक इस सीजन में भी उसी ग्लॉसी दुनिया में नजर आते हैं, जहां महंगे कपड़े, आलीशान ऑफिस और हर मोड़ पर टकीला शॉट्स मौजूद हैं। Four More Shots Please Review के लिहाज से सबसे बड़ी कमजोरी यही है कि सीरीज अब भी पुराने मुद्दों को नए अंदाज में पेश करने की कोशिश करती है, लेकिन वह असर पैदा नहीं कर पाती।

डायलॉग्स में शॉक वैल्यू तो है, मगर आज की ऑडियंस को अब सिर्फ बोल्डनेस नहीं, ठोस कहानी चाहिए। कुछ सीन जबरदस्ती खिंचे हुए लगते हैं, जिससे कहानी का प्रवाह कमजोर पड़ता है।

एक्टिंग बनी सबसे बड़ी ताकत

परफॉर्मेंस के मामले में सीरीज अब भी मजबूत है। कीर्ति कुल्हारी सबसे ज्यादा प्रभावित करती हैं और उनका किरदार परिपक्व नजर आता है। सयानी गुप्ता और कुणाल रॉय कपूर के बीच का ट्रैक भावनात्मक रूप से सबसे असरदार है। मानवी गगरू ने सीमित राइटिंग के बावजूद अपने रोल को संभाला है, जबकि बानी जे का किरदार इस बार थोड़ा बिखरा हुआ लगता है। डिनो मोरिया की मौजूदगी सीरीज में ग्लैमर और संतुलन दोनों जोड़ती है।

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