गंगा एक्सप्रेसवे पर जल्द मिलेगी CNG, भारत सरकार से मंजूरी के बाद दो रेस्ट एरिया में खुलेंगे स्टेशन

गंगा एक्सप्रेसवे के पहले पैकेज के दो रेस्ट एरिया में जल्द CNG स्टेशन शुरू होंगे। भारत सरकार की मंजूरी के बाद 130 किमी मार्ग पर यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।

गंगा एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले सीएनजी वाहन चालकों के लिए राहत की खबर है। भारत सरकार से मंजूरी मिलने के बाद पहले पैकेज के दो रेस्ट एरिया में जल्द सीएनजी स्टेशन शुरू होंगे। शुरुआती दौर में टैंकर से और बाद में पाइपलाइन के जरिए गैस की आपूर्ति होगी।

मेरठ: गंगा एक्सप्रेसवे पर सीएनजी वाहनों से सफर करने वाले लोगों को जल्द बड़ी राहत मिलने वाली है। भारत सरकार से अनुमति मिलने के बाद एक्सप्रेसवे के पहले पैकेज में बने दो रेस्ट एरिया पर सीएनजी स्टेशन शुरू किए जाएंगे। इससे मेरठ से बदायूं के बीच लगभग 130 किलोमीटर के सफर में सीएनजी उपलब्ध न होने की समस्या खत्म हो जाएगी।

130 किलोमीटर तक नहीं थी सीएनजी की सुविधा

मेरठ से प्रयागराज तक बनने वाले 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे पर अभी तक सीएनजी से चलने वाले वाहनों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई थी। एक्सप्रेसवे के पहले पैकेज, जो मेरठ से बदायूं तक करीब 130 किलोमीटर लंबा है, वहां सीएनजी की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण कई वाहन चालक इस मार्ग का उपयोग करने से बच रहे थे।

हालांकि इस पूरे हिस्से में यात्रियों की सुविधा के लिए दो आधुनिक रेस्ट एरिया विकसित किए गए हैं, लेकिन सीएनजी स्टेशन शुरू न होने से सीएनजी वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।

दो रेस्ट एरिया में मिलेगी सीएनजी

यूपी एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने अमरोहा और संभल के पास दो रेस्ट एरिया विकसित किए हैं। यहां पहले से पेट्रोल, डीजल, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन, फूड कोर्ट, शौचालय और हवा भरने जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

इन दोनों रेस्ट एरिया में सीएनजी स्टेशन भी प्रस्तावित थे, लेकिन आवश्यक अनुमति नहीं मिलने के कारण उनका संचालन शुरू नहीं हो पाया था। अब भारत सरकार से मंजूरी मिलने के बाद दोनों स्थानों पर जल्द सीएनजी की आपूर्ति शुरू होने जा रही है।

युद्ध के कारण अटकी थी मंजूरी

यूपीडा और गंगा एक्सप्रेसवे के पहले पैकेज की संचालनकर्ता एजेंसी आईआरबी इंफ्रा के अधिकारियों के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण देश में सीएनजी आपूर्ति से जुड़े नए स्टेशनों की स्वीकृति प्रक्रिया प्रभावित हुई थी। इसी वजह से गंगा एक्सप्रेसवे पर प्रस्तावित सीएनजी स्टेशनों को भी समय पर अनुमति नहीं मिल सकी।

अब सरकार से आवश्यक स्वीकृति मिलने के बाद दोनों स्टेशनों को जल्द शुरू करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

पहले टैंकर से, बाद में पाइपलाइन से होगी गैस आपूर्ति

आईआरबी इंफ्रा के मुख्य महाप्रबंधक अनूप सिंह के अनुसार, इस क्षेत्र में सीएनजी आपूर्ति की जिम्मेदारी मेघा गैस एजेंसी को दी गई है। दोनों रेस्ट एरिया में सीएनजी स्टेशन तैयार हैं और आवश्यक तकनीकी तैयारियां भी पूरी कर ली गई हैं।

शुरुआती चरण में इन स्टेशनों पर सीएनजी की आपूर्ति टैंकरों के माध्यम से की जाएगी। इसके बाद गैस पाइपलाइन का कार्य पूरा होने पर ऑनलाइन (पाइपलाइन आधारित) आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी, जिससे नियमित और निर्बाध सेवा मिल सकेगी।

सीएनजी वाहन चालकों को मिलेगी बड़ी राहत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 अप्रैल को गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया था। एक्सप्रेसवे का निर्माण और संचालन चार पैकेजों में किया जा रहा है। पहले पैकेज पर सीएनजी सुविधा शुरू होने से न केवल निजी वाहन चालकों बल्कि टैक्सी, कैब और व्यावसायिक सीएनजी वाहनों को भी बड़ी राहत मिलेगी।

सीएनजी स्टेशन शुरू होने के बाद एक्सप्रेसवे पर सफर अधिक सुविधाजनक और किफायती होगा। साथ ही पर्यावरण के अनुकूल ईंधन का उपयोग बढ़ने से स्वच्छ परिवहन को भी प्रोत्साहन मिलेगा। अधिकारियों का कहना है कि दोनों स्टेशनों को जल्द से जल्द चालू करने के लिए प्रक्रिया अंतिम चरण में है और यात्रियों को बहुत जल्द सीएनजी की सुविधा मिलने लगेगी।

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