संभल में गंगा एक्सप्रेसवे के आसपास बढ़ती औद्योगिक गतिविधियों को देखते हुए प्रशासन ने सरकारी जमीनों के सत्यापन का अभियान शुरू किया है। लेखपालों को स्थलीय निरीक्षण कर अतिक्रमण और रिकॉर्ड में गड़बड़ी की जांच के निर्देश दिए गए हैं।
संभल: गंगा एक्सप्रेसवे के आसपास औद्योगिक निवेश की संभावनाओं को देखते हुए प्रशासन ने सरकारी जमीनों के व्यापक सत्यापन की प्रक्रिया तेज कर दी है। अधिकारियों को ग्राम समाज और आरक्षित भूमि का रिकॉर्ड मिलान, स्थलीय निरीक्षण तथा किसी भी अनियमितता की रिपोर्ट समय पर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
औद्योगिक विकास से पहले सरकारी जमीनों की होगी जांच
गंगा एक्सप्रेसवे के आसपास तेजी से बढ़ रही औद्योगिक संभावनाओं को देखते हुए संभल प्रशासन ने सरकारी जमीनों की सुरक्षा और रिकॉर्ड की जांच के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि औद्योगिक परियोजनाएं शुरू होने से पहले सरकारी भूमि पर किसी तरह का अतिक्रमण, अवैध कब्जा या रिकॉर्ड में हेराफेरी न हो। साथ ही उन क्षेत्रों की भी पहचान की जाएगी जहां औद्योगिक गतिविधियों की संभावना के चलते भूमि की खरीद-फरोख्त में तेजी आई है।
जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी सत्यप्रिय सिंह ने गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़े गांवों के राजस्व लेखपालों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में सभी लेखपालों को अपने-अपने क्षेत्रों में ग्राम समाज और अन्य आरक्षित सरकारी भूमि का स्थलीय निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए।
खतौनी का रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का होगा मिलान
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि लेखपाल वर्तमान खतौनी का आधार वर्ष की खतौनी से मिलान करेंगे, ताकि यह पता लगाया जा सके कि सरकारी भूमि की स्थिति में कोई बदलाव, अतिक्रमण, रिकॉर्ड में हेराफेरी या अन्य अनियमितता तो नहीं हुई है।
यदि जांच के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है, तो उसका पूरा विवरण तैयार कर निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रशासन को रिपोर्ट भेजनी होगी। अधिकारियों ने निर्देश दिए हैं कि अभिलेखीय और स्थलीय सत्यापन पूरी पारदर्शिता और गंभीरता के साथ किया जाए।
भविष्य की परियोजनाओं के लिए तैयार होगी भूमि की सही तस्वीर
प्रशासन का मानना है कि सत्यापन अभियान पूरा होने के बाद सरकारी भूमि का वास्तविक रिकॉर्ड स्पष्ट होगा। इससे भविष्य में औद्योगिक इकाइयों, आधारभूत संरचना और अन्य जनहित परियोजनाओं के लिए उपलब्ध भूमि का सही आकलन किया जा सकेगा।
अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा मजबूत करना और विकास परियोजनाओं के दौरान भूमि से जुड़े विवादों की संभावना को पहले ही समाप्त करना है। प्रशासन का कहना है कि यदि किसी स्तर पर अनियमितता या अवैध कब्जा पाया जाता है, तो संबंधित मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही राजस्व विभाग को नियमित निगरानी बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि गंगा एक्सप्रेसवे के आसपास प्रस्तावित विकास कार्य बिना किसी भूमि विवाद के आगे बढ़ सकें।









