UPSC Success Story: मां सड़कों पर बीनती थीं कचरा, बेटे गौतम पाडीभर ने IIT मद्रास के बाद IFS बनकर रचा इतिहास

UPSC Success Story: मां ने कचरा बीनकर बेटे को पढ़ाया। गौतम पाडीभर ने IIT मद्रास से पढ़ाई कर UPSC IFS परीक्षा में 139वीं रैंक हासिल की और अधिकारी बने।

गौतम पाडीभर की सफलता की कहानी संघर्ष और मेहनत की मिसाल है। पिता के निधन के बाद उनकी मां ने मजदूरी और कचरा बीनकर परिवार चलाया। गौतम ने नवोदय विद्यालय से पढ़ाई कर IIT मद्रास में प्रवेश लिया और UPSC IFS परीक्षा में 139वीं रैंक हासिल की।

गौतम पाडीभर UPSC सक्सेस स्टोरी: आर्थिक तंगी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद गौतम पाडीभर ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और भारतीय वन सेवा (IFS) के अधिकारी बने। उनके पिता के निधन के बाद मां ने दिहाड़ी मजदूरी और मुंबई में कबाड़ बीनकर परिवार का खर्च उठाया। गौतम ने जवाहर नवोदय विद्यालय से पढ़ाई की, बिना औपचारिक कोचिंग के JEE पास किया और IIT मद्रास से BTech की डिग्री हासिल करने के बाद UPSC परीक्षा में सफलता पाई।

मां ने कचरा बीनकर बेटे की पढ़ाई जारी रखी

गौतम पाडीभर की जिंदगी की कहानी बताती है कि मुश्किल हालात के बावजूद शिक्षा के जरिए आगे बढ़ने की कोशिश कैसे सफलता का रास्ता खोल सकती है। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनकी मां पर आ गई। परिवार का गुजारा करने के लिए उन्होंने गांव में दिहाड़ी मजदूरी की और बाद में मुंबई की झुग्गी-बस्ती में कबाड़ बीनने तथा सड़कों से कचरा उठाने का काम किया।

गौतम के मुताबिक, उनकी मां खुद कभी स्कूल नहीं गई थीं, लेकिन उन्होंने अपने बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दी। आर्थिक परेशानियों और अभावों के बावजूद उन्होंने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि उनके बच्चे पढ़ाई जारी रख सकें और बेहतर भविष्य का सपना देख सकें।

मां के इसी संघर्ष ने गौतम को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय मां के त्याग, मेहनत और हौसले को दिया है।

नवोदय विद्यालय से IIT मद्रास तक का सफर

गौतम की शुरुआती शिक्षा महाराष्ट्र के जालना स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में हुई। सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित किया और इंजीनियरिंग में दाखिला लेने का लक्ष्य बनाया।

उन्होंने बिना किसी औपचारिक कोचिंग के जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम (JEE) पास किया और IIT मद्रास में प्रवेश हासिल किया। यहां से उन्होंने BTech की पढ़ाई पूरी की। मुंबई की झुग्गी-बस्ती से देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थान तक पहुंचना उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि थी।

गौतम ने अपनी प्रेरणादायक कहानी में बताया कि उनके पास पढ़ाई के लिए पर्याप्त साधन और कोचिंग की सुविधा नहीं थी। इसके बावजूद मां ने उन्हें मेहनत करने, चुनौतियों का सामना करने और बड़े लक्ष्य तय करने का हौसला दिया।

UPSC IFS परीक्षा में हासिल की 139वीं रैंक

इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद गौतम ने सिविल सेवा में जाने का फैसला किया। उन्होंने UPSC की भारतीय वन सेवा परीक्षा 2022 में हिस्सा लिया और ऑल इंडिया रैंक 139 हासिल की। इसके बाद वह छत्तीसगढ़ कैडर के 2023 बैच में भारतीय वन सेवा अधिकारी बने।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्हें छत्तीसगढ़ के कांगेर वैली नेशनल पार्क में डायरेक्टर के पद पर नियुक्त किया गया। उनकी यह उपलब्धि उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो आर्थिक कठिनाइयों के बीच प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।

मां को दिया अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय

गौतम की कहानी का सबसे भावुक पहलू वह है, जब उनकी मां उनके कार्यालय पहुंचीं और उनकी आधिकारिक कुर्सी पर बैठीं। यह पल उन संघर्षों की याद दिलाता था, जिनसे गुजरकर परिवार यहां तक पहुंचा था।

गौतम ने अपनी सफलता का श्रेय मां को देते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि सिर्फ उनकी व्यक्तिगत कामयाबी नहीं है, बल्कि इसमें मां का योगदान सबसे बड़ा है। जिस मां ने परिवार का पेट पालने के लिए सड़कों पर कचरा बीनने और मजदूरी करने में वर्षों बिताए, उसी की मेहनत ने बेटे को एक प्रतिष्ठित सरकारी सेवा तक पहुंचने का अवसर दिया।

गौतम पाडीभर का सफर शिक्षा, दृढ़ संकल्प और पारिवारिक सहयोग की अहमियत को सामने रखता है। उनकी कहानी बताती है कि सीमित संसाधन किसी व्यक्ति की संभावनाओं को पूरी तरह तय नहीं करते। मेहनत, सही अवसर और अपनों का साथ जीवन की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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