गिरिडीह के पंचम्बा में 1821 कलशों की भव्य शोभायात्रा, 6 हजार श्रद्धालुओं ने लगाए मां दुर्गा के जयकारे; 1880 से जुड़ा है मंदिर का इतिहास

गिरिडीह के पंचम्बा में 1821 कलशों की शोभायात्रा से शारदीय नवरात्र शुरू हुआ। करीब छह हजार श्रद्धालु शामिल हुए। मंदिर में 1880 से पूजा की परंपरा है।
गिरिडीह के पंचम्बा में 1821 कलशों की भव्य शोभायात्रा, 6 हजार श्रद्धालुओं ने लगाए मां दुर्गा के जयकारे; 1880 से जुड़ा है मंदिर का इतिहास
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शारदीय नवरात्र के शुभारंभ के साथ ही झारखंड के गिरिडीह जिले के पंचम्बा में भक्ति और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। रविवार को पंचम्बा स्थित सार्वजनिक दुर्गा माता मंदिर में नवरात्र की शुरुआत भव्य कलश शोभायात्रा के साथ हुई। इस धार्मिक आयोजन में करीब छह हजार श्रद्धालु शामिल हुए, जबकि 1821 कलशों के साथ निकली यात्रा आकर्षण का मुख्य केंद्र रही। सिर पर कलश लेकर चलती महिलाएं, युवतियां और अन्य श्रद्धालु मां दुर्गा के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ते रहे। ढोल-नगाड़ों और डीजे की धुन के बीच पूरा इलाका भक्तिमय माहौल में डूब गया। मंदिर में विधि-विधान के साथ कलश स्थापना की गई और इसके साथ ही नवरात्र की पूजा-अर्चना शुरू हो गई। इस आयोजन ने पंचम्बा की धार्मिक परंपरा और स्थानीय लोगों की गहरी आस्था को एक बार फिर सामने ला दिया। 

कलश शोभायात्रा की शुरुआत पंचम्बा स्थित नर्मदा धाम से हुई। यहां से श्रद्धालुओं का जत्था धार्मिक उत्साह के साथ आगे बढ़ा। यात्रा बारतर काली मंदिर और पंचम्बा बाजार होते हुए सार्वजनिक दुर्गा माता मंदिर पहुंची। पूरे रास्ते श्रद्धालु मां दुर्गा की आराधना करते और जयकारे लगाते रहे। महिलाओं और युवतियों ने सिर पर कलश रखकर यात्रा में हिस्सा लिया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी से यात्रा भव्य हो गई। रास्ते में धार्मिक उत्साह और मां के प्रति आस्था का माहौल देखने को मिला। श्रद्धालुओं के लिए यह केवल कलश लेकर मंदिर पहुंचने का आयोजन नहीं था, बल्कि नवरात्र के पावन पर्व की शुरुआत में सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना और भक्ति में शामिल होने का अवसर भी था। 

इस बार की शोभायात्रा में 1821 कलशों की संख्या विशेष रूप से चर्चा में रही। कलश स्थापना को नवरात्र पूजा की महत्वपूर्ण परंपरा माना जाता है। श्रद्धालु पूजा-अर्चना के साथ कलश स्थापित कर मां दुर्गा का आह्वान करते हैं और पूरे नवरात्र श्रद्धा के साथ पूजा-पाठ करते हैं। पंचम्बा में भी कलश यात्रा के बाद मंदिर परिसर में धार्मिक विधि-विधान के साथ स्थापना की गई। इस आयोजन में महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही। उनके साथ युवतियां, बच्चे और अन्य श्रद्धालु भी शामिल हुए। हजारों लोगों की भागीदारी ने नवरात्र के पहले दिन को क्षेत्र के लिए एक बड़े धार्मिक उत्सव में बदल दिया।

यात्रा के दौरान ढोल-नगाड़ों और डीजे की धुन पर श्रद्धालु भक्ति भाव से आगे बढ़ते रहे। धार्मिक झांकियों और सजे हुए वाहनों ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। भगवान शंकर, भगवान गणेश और मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों से सुसज्जित वाहनों ने शोभायात्रा की भव्यता बढ़ाई। श्रद्धालुओं के जयकारों से मार्ग गूंजता रहा और स्थानीय लोगों में उत्साह दिखाई दिया। यात्रा के मंदिर पहुंचने के बाद पूजा-अर्चना की गई और कलश स्थापना के साथ शारदीय नवरात्र का अनुष्ठान आरंभ हुआ। 

पंचम्बा के सार्वजनिक दुर्गा माता मंदिर की खासियत केवल यहां आयोजित होने वाला भव्य नवरात्र उत्सव नहीं है, बल्कि इसका ऐतिहासिक महत्व भी है। इस मंदिर में दुर्गा पूजा की परंपरा वर्ष 1880 से जुड़ी हुई है। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, उस समय राजा टिकैत सिद्धनाथ सिंह ने यहां मां दुर्गा की पूजा शुरू कराई थी। उस दौर में यह क्षेत्र टिकैत शासन के अधीन था और पूजा का आयोजन राजपरिवार से जुड़ी परंपरा के रूप में किया जाता था। समय के साथ मंदिर की धार्मिक पहचान मजबूत होती गई और यहां होने वाला आयोजन आसपास के लोगों के लिए आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बन गया। 

मंदिर के इतिहास में वर्ष 1955 को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, राजा टिकैत सिद्धनाथ सिंह की तबीयत खराब होने के बाद मंदिर को सार्वजनिक दुर्गा स्थान घोषित किया गया। इसके बाद पूजा का आयोजन सार्वजनिक स्वरूप में आगे बढ़ा और स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ती गई। मंदिर की पूजा समिति के गठन के साथ आयोजन की जिम्मेदारियां भी सामूहिक रूप से निभाई जाने लगीं। इसी परंपरा ने पंचम्बा के दुर्गा स्थान को एक ऐसे धार्मिक केंद्र के रूप में स्थापित किया, जहां नवरात्र के दौरान आसपास के गांवों और क्षेत्रों से श्रद्धालु पूजा करने पहुंचते हैं। 

1880 से चली आ रही इस पूजा परंपरा के कारण पंचम्बा का सार्वजनिक दुर्गा माता मंदिर स्थानीय इतिहास और धार्मिक संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। कई पीढ़ियों से यहां मां दुर्गा की आराधना होती रही है। समय के साथ मंदिर के स्वरूप और सुविधाओं में बदलाव आया, लेकिन नवरात्र में पूजा-अर्चना की परंपरा जारी रही। मंदिर में हर वर्ष होने वाले धार्मिक आयोजनों में श्रद्धालुओं की भागीदारी क्षेत्र की सामूहिक आस्था को दर्शाती है। इस बार 1821 कलशों के साथ निकली शोभायात्रा ने इस ऐतिहासिक परंपरा को नए उत्साह के साथ आगे बढ़ाया।

मंदिर के विकास और रखरखाव के लिए समय-समय पर सुधार कार्य भी किए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सार्वजनिक दुर्गा माता मंदिर का जीर्णोद्धार दिसंबर 2022 से अक्टूबर 2023 के बीच कराया गया था। इस दौरान मंदिर के पुनर्निर्माण और सुधार से जुड़े कार्य किए गए। ऐतिहासिक मंदिर का जीर्णोद्धार धार्मिक गतिविधियों के लिए सुविधाजनक वातावरण तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण रहा। आज यह मंदिर पंचम्बा क्षेत्र में नवरात्र और दुर्गा पूजा के प्रमुख केंद्रों में शामिल है। 

नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना के साथ ही मंदिर में अगले दिनों के धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हो गई। श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के सामने माथा टेककर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। नवरात्र को भारतीय परंपरा में शक्ति की आराधना का पर्व माना जाता है। इन नौ दिनों में श्रद्धालु अलग-अलग रूपों में मां दुर्गा की पूजा करते हैं और धार्मिक नियमों के अनुसार व्रत, पूजा तथा अन्य अनुष्ठान करते हैं। पंचम्बा में भी कलश स्थापना के साथ श्रद्धालुओं की पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हो गया।

इस तरह के सामूहिक धार्मिक आयोजन स्थानीय समाज को भी एक साथ जोड़ते हैं। कलश यात्रा की तैयारी से लेकर श्रद्धालुओं की भागीदारी और मंदिर में पूजा की व्यवस्था तक, कई स्तरों पर सामूहिक सहयोग की आवश्यकता होती है। हजारों श्रद्धालुओं के एक साथ जुटने से आयोजन का स्वरूप व्यापक हो जाता है। पंचम्बा की इस यात्रा में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने दिखाया कि मंदिर की ऐतिहासिक परंपरा आज भी लोगों के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।

गिरिडीह में नवरात्र का यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को भी सामने लाता है। वर्ष 1880 से जुड़ी पूजा परंपरा, वर्ष 1955 में मंदिर का सार्वजनिक स्वरूप और समय-समय पर हुए जीर्णोद्धार ने इस स्थल के इतिहास को कई पड़ाव दिए हैं। इस बार 1821 कलशों के साथ निकली शोभायात्रा और करीब छह हजार श्रद्धालुओं की भागीदारी ने शारदीय नवरात्र की शुरुआत को खास बना दिया। मां दुर्गा के जयकारों और पूजा-अर्चना के बीच पंचम्बा में नवरात्र उत्सव का आगाज हुआ, जिसके साथ पूरे क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियां तेज हो गईं।

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