सोने और चांदी की कीमतों में इस सप्ताह तेजी का रुख बने रहने की उम्मीद है। हालांकि ऊंचे स्तर पर मुनाफावसूली से बढ़त सीमित हो सकती है। अमेरिकी महंगाई, जीडीपी और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम अहम रहेंगे।
नई दिल्ली: घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में तेजी बनी हुई है। विश्लेषकों के अनुसार, इस सप्ताह भी सर्राफा बाजार का रुझान सकारात्मक रह सकता है, हालांकि ऊंचे स्तर पर मुनाफावसूली से तेजी की रफ्तार प्रभावित हो सकती है। निवेशकों की नजर अमेरिकी मुद्रास्फीति और जीडीपी आंकड़ों के साथ पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति पर रहेगी।
इस सप्ताह भी तेजी का अनुमा
सोने और चांदी की कीमतों में पिछले सप्ताह मजबूत बढ़त के बाद इस सप्ताह भी तेजी का रुख बने रहने की उम्मीद है। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि ऊंचे स्तर पर निवेशकों की मुनाफावसूली से कीमतों की बढ़त कुछ धीमी हो सकती है।

जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रणव मेर के अनुसार, आगामी कारोबारी सत्र में सर्राफा बाजार का रुझान सकारात्मक रह सकता है, लेकिन ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
MCX पर सोने ने 5 फीसदी से ज्यादा चढ़ा
घरेलू बाजार में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना वायदा पिछले सप्ताह 7,932 रुपये यानी 5.13 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1.62 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ।
इसी तरह सितंबर डिलीवरी वाली चांदी 10,673 रुपये यानी 4.52 प्रतिशत बढ़कर 2.46 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। एलकेपी सिक्योरिटीज के विश्लेषक जतिन त्रिवेदी ने बताया कि सोने में पांच प्रतिशत से अधिक की तेजी देखने को मिली।
उनके अनुसार, सर्राफा बाजार में नई खरीदारी, बॉन्ड यील्ड में नरमी और नकदी की बेहतर उपलब्धता ने सोने की कीमतों को मजबूती दी।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने-चांदी की चमक
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी पिछले सप्ताह सोने और चांदी में मजबूत तेजी देखने को मिली। कॉमेक्स पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना वायदा 243.3 डॉलर यानी 5.5 प्रतिशत बढ़कर 4,680.6 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ।
न्यूयॉर्क में सितंबर डिलीवरी वाली चांदी 4.42 डॉलर यानी करीब सात प्रतिशत की तेजी के साथ 69.53 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।
अमेरिकी महंगाई और पश्चिम एशिया पर नजर
आने वाले दिनों में अमेरिकी मुद्रास्फीति और GDP के आंकड़े सोने-चांदी की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक हो सकते हैं। निवेशक इन आंकड़ों के जरिए अमेरिकी मौद्रिक नीति और ब्याज दरों को लेकर आगे की संभावनाओं का आकलन करेंगे।
इसके अलावा पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति भी सर्राफा बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। अमेरिका-ईरान शांति समझौते और होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने से जुड़े घटनाक्रमों पर बाजार की नजर रहेगी।
जैक्सन हॉल संगोष्ठी भी अहम
सर्राफा कारोबारियों की नजर 27 से 29 अगस्त के बीच होने वाली जैक्सन हॉल संगोष्ठी पर भी रहेगी। इस दौरान फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श अपना पहला मुख्य भाषण देने वाले हैं।
उनके भाषण से अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर संकेत मिलने की संभावना है। इससे डॉलर, बॉन्ड यील्ड और आगे चलकर सोने-चांदी की कीमतों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, ऊंचे दामों के बीच मुनाफावसूली बाजार की तेजी को सीमित कर सकती है।











