गोरखपुर कैंट से उनौला तक डबल रेल लाइन का निर्माण पूरा हो गया है। रेलवे 16 जुलाई से प्री-नॉन इंटरलॉकिंग और 19 से 21 जुलाई तक नॉन इंटरलॉकिंग कार्य करेगा, जिससे कई ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहेगा।
गोरखपुर: गोरखपुर कैंट-उनौला डबल लाइन परियोजना का पहला चरण पूरा होने के बाद रेलवे ने नॉन इंटरलॉकिंग (एनआई) कार्य का कार्यक्रम जारी कर दिया है। 16 जुलाई से प्री-एनआई और 19 से 21 जुलाई तक एनआई कार्य होगा। इस दौरान कई ट्रेनों के संचालन में बदलाव किया जाएगा।
डबल लाइन निर्माण पूरा, अब होगा नॉन इंटरलॉकिंग कार्य
गोरखपुर कैंट से उनौला तक लगभग 15 किलोमीटर लंबे रेलखंड पर डबल रेल लाइन का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। इसके बाद रेलवे प्रशासन ने इस खंड पर नॉन इंटरलॉकिंग (एनआई) कार्य की तैयारी शुरू कर दी है। रेलवे के अनुसार, 16 जुलाई से प्री-नॉन इंटरलॉकिंग (Pre-NI) का कार्य शुरू होगा, जबकि 19 से 21 जुलाई तक मुख्य नॉन इंटरलॉकिंग कार्य किया जाएगा।

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इस तकनीकी कार्य के दौरान सिग्नल और ट्रैक सिस्टम को नई डबल लाइन से जोड़ा जाएगा, ताकि भविष्य में ट्रेनों का संचालन अधिक सुरक्षित और सुचारु रूप से किया जा सके। इस अवधि में गोरखपुर-नरकटियागंज समेत कई ट्रेनों के संचालन पर असर पड़ेगा। प्रभावित ट्रेनों की सूची रेलवे अलग से जारी करेगा।
21 जुलाई के बाद डबल लाइन पर दौड़ेंगी ट्रेनें
रेलवे प्रशासन ने बताया कि उनौला से पिपराइच तक पहले ही डबल लाइन बिछाई जा चुकी है और इस खंड पर ट्रेनों का संचालन भी शुरू हो चुका है। अब गोरखपुर कैंट से उनौला तक का कार्य पूरा होने के बाद 21 जुलाई के बाद गोरखपुर कैंट से पिपराइच तक पूरी डबल लाइन पर ट्रेनों का संचालन शुरू होने की संभावना है।
डबल लाइन शुरू होने से इस रूट पर ट्रेनों की आवाजाही आसान होगी, परिचालन क्षमता बढ़ेगी और ट्रेनों के लेट होने की समस्या में भी कमी आने की उम्मीद है।
पांच चरणों में पूरा होगा गोरखपुर-वाल्मीकिनगर दोहरीकरण
रेल मंत्रालय ने गोरखपुर कैंट से वाल्मीकिनगर तक 95.95 किलोमीटर रेलखंड के दोहरीकरण के लिए 1,120.66 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। यह परियोजना पांच चरणों में पूरी की जाएगी।
पहले चरण में गोरखपुर कैंट से पिपराइच, दूसरे चरण में पिपराइच से कप्तानगंज, तीसरे चरण में कप्तानगंज से सिसवा बाजार, चौथे चरण में सिसवा बाजार से पनियहवा और पांचवें चरण में पनियहवा से वाल्मीकिनगर तक डबल लाइन बिछाई जाएगी।
रेलवे के अनुसार, परियोजना के तहत नौ क्रॉसिंग स्टेशन, तीन हॉल्ट स्टेशन, 10 बड़े पुल, 43 छोटे पुल और एक महत्वपूर्ण पुल का निर्माण भी किया जाएगा। वर्तमान में गोरखपुर से कप्तानगंज के बीच रेल लाइन बिछाने, स्टेशन भवन और पुल निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है।
रेलवे अधिकारियों का मानना है कि पूरी परियोजना पूरी होने के बाद पूर्वांचल और बिहार के बीच रेल संपर्क और मजबूत होगा। इससे यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी और मालगाड़ियों के संचालन में भी तेजी आएगी।











