गरुण पुराण में बताए गए मृत्यु से पहले के संकेत, जानें क्या कहती हैं मान्यताएं

गरुण पुराण में बताए गए मृत्यु से पहले के संकेत, जानें क्या कहती हैं मान्यताएं

गरुण पुराण में मृत्यु से पहले मिलने वाले संकेतों का विस्तार से वर्णन किया गया है, जिनमें परछाई न दिखना, पूर्वजों का दिखना और कर्मों का स्मरण जैसे अनुभव शामिल हैं। ये सभी संकेत आस्था से जुड़े हैं, जबकि विज्ञान इन्हें मानसिक और शारीरिक प्रक्रियाओं से जोड़कर देखता है।

Death Signs in Garuda Purana: गरुण पुराण के अनुसार मृत्यु से पहले व्यक्ति को कुछ विशेष संकेत मिलते हैं, जिनसे अंतिम समय के करीब होने का आभास होता है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं में बताए गए ये संकेत देशभर में आस्था और जिज्ञासा का विषय बने रहते हैं। इनमें परछाई का न दिखना, पूर्वजों का दर्शन, यमदूतों का अनुभव और जीवन के अच्छे-बुरे कर्मों का स्मरण शामिल है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जहां धर्म इन्हें आत्मा की यात्रा से जोड़ता है, वहीं विज्ञान इन्हें मानसिक और शारीरिक बदलावों का परिणाम मानता है।

परछाई न दिखाई देना

गरुण पुराण के अनुसार जब किसी व्यक्ति को अपनी परछाई दिखाई देना बंद हो जाए, तो इसे मृत्यु का संकेत माना जाता है। मान्यता है कि यह अवस्था तब आती है, जब व्यक्ति की जीवन ऊर्जा कमजोर होने लगती है। धार्मिक दृष्टिकोण से इसे आत्मा और शरीर के बीच दूरी बढ़ने का संकेत माना जाता है। हालांकि आधुनिक विज्ञान इस मान्यता की पुष्टि नहीं करता, लेकिन धार्मिक ग्रंथों में इसे एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा गया है।

पूर्वजों का दर्शन होना

गरुण पुराण में यह भी उल्लेख मिलता है कि जब किसी व्यक्ति को अपने दिवंगत पूर्वज दिखाई देने लगते हैं या वह उनसे बातचीत जैसा अनुभव करता है, तो इसे जीवन के अंतिम चरण का संकेत माना जाता है। मान्यता है कि इस समय पूर्वज आत्मा को अपनी यात्रा के लिए तैयार करने आते हैं। कई लोग इसे सिर्फ मानसिक अवस्था से जोड़कर देखते हैं, जबकि आस्था से जुड़े लोग इसे आत्मा की अंतिम पुकार मानते हैं।

यमदूतों का दिखना

गरुण पुराण में यमदूतों का वर्णन भी मिलता है। मान्यता के अनुसार जब किसी व्यक्ति का समय पूरा होने लगता है, तो उसे यमदूत दिखाई देने लगते हैं। ऐसे समय में व्यक्ति को यह आभास हो सकता है कि कोई उसे लेने आ रहा है। उसे अपने आसपास नकारात्मक या भारी ऊर्जा महसूस हो सकती है। धार्मिक विश्वास के अनुसार यह आत्मा के शरीर से विदा होने का संकेत होता है।

अच्छे और बुरे कर्मों का स्मरण

गरुण पुराण के अनुसार, मृत्यु के समीप पहुंचने पर व्यक्ति को अपने जीवन में किए गए अच्छे और बुरे कर्म एक-एक कर याद आने लगते हैं। ऐसा माना जाता है कि उस समय मनुष्य का पूरा जीवन उसकी आंखों के सामने चलचित्र की तरह चलने लगता है। यह अवस्था आत्मा के अगले सफर की तैयारी से जोड़ी जाती है। धार्मिक मान्यताओं में इसे कर्मों के बोध का समय कहा गया है, जहां व्यक्ति अपने जीवन के हर फैसले को दोबारा महसूस करता है।

हाथों की रेखाओं का हल्का पड़ना

गरुण पुराण में हाथों की रेखाओं का भी विशेष उल्लेख है। मान्यता के अनुसार जब किसी व्यक्ति के हाथों की रेखाएं हल्की पड़ने लगें या दिखना बंद हो जाएं, तो उसे मृत्यु का संकेत माना जाता है। कुछ धार्मिक ग्रंथों में इसे जीवन शक्ति के क्षीण होने से जोड़ा गया है। हालांकि यह पूरी तरह आस्था पर आधारित अवधारणा है और इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

रहस्यमयी द्वार दिखना

गरुण पुराण के अनुसार अंतिम समय से पहले व्यक्ति को एक रहस्यमयी द्वार दिखाई देने लगता है। धार्मिक मान्यता है कि यह द्वार आत्मा के अगले लोक में प्रवेश का संकेत होता है। व्यक्ति को ऐसा लग सकता है कि वह किसी दूसरी दुनिया के दरवाजे के पास खड़ा है। कई लोग इसे चेतना के अंतिम चरण से भी जोड़कर देखते हैं।

आस्था और विज्ञान के बीच का अंतर

गरुण पुराण में बताए गए ये सभी संकेत पूरी तरह धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान मृत्यु को शारीरिक प्रक्रियाओं के रुकने से जोड़कर देखता है, जबकि धार्मिक ग्रंथ इसे आत्मा की यात्रा का एक पड़ाव मानते हैं। कई बार मरीजों को मृत्यु से पहले भ्रम, स्मृतियां लौट आना या किसी को देखने का अनुभव होना मेडिकल कंडीशन से भी जुड़ा हो सकता है।

इसके बावजूद, भारत में बड़ी संख्या में लोग आज भी इन मान्यताओं में गहरी आस्था रखते हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों और धार्मिक परिवारों में गरुण पुराण के इन संकेतों को जीवन और मृत्यु के रहस्य से जोड़कर देखा जाता है।

मृत्यु को लेकर गरुण पुराण का संदेश

गरुण पुराण का मूल संदेश यह है कि मृत्यु से डरने की बजाय मनुष्य को अपने कर्मों पर ध्यान देना चाहिए। ग्रंथ के अनुसार जीवन में किए गए कर्म ही आत्मा की आगे की यात्रा तय करते हैं। इसलिए हर व्यक्ति को अच्छे कर्म करने, सत्य के मार्ग पर चलने और दूसरों के प्रति करुणा रखने की शिक्षा दी गई है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति जीवन में अच्छे कर्म करता है, उसकी आत्मा की यात्रा शांत और सहज होती है, जबकि बुरे कर्म करने वालों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

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