आपात स्थिति से निपटने को तैयार गुवाहाटी एयरपोर्ट, नई तकनीक शामिल

गुवाहाटी एयरपोर्ट ने अपनी इमरजेंसी रिस्पॉन्स क्षमता को मजबूत करते हुए HRET क्रैश फायर टेंडर और वॉटर रेस्क्यू बोट्स शामिल किए हैं। विमान दुर्घटना संभव होगा

गुवाहाटी एयरपोर्ट ने अपनी इमरजेंसी रिस्पॉन्स क्षमता को मजबूत करते हुए HRET क्रैश फायर टेंडर और वॉटर रेस्क्यू बोट्स शामिल किए हैं। इससे विमान दुर्घटना या जल क्षेत्र की आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी बचाव संभव होगा।

गुवाहाटी: असम के गुवाहाटी स्थित लोकप्रिया गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे ने अपनी आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को और अधिक मजबूत बना दिया है। एयरपोर्ट प्रशासन ने आधुनिक रेस्क्यू उपकरणों को शामिल कर सुरक्षा ढांचे को अपग्रेड किया है, जिससे किसी भी आपात स्थिति में तेज और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। हाल ही में एयरपोर्ट पर हाई रीच एक्सटेंडेबल टर्रेट (HRET) क्रैश फायर टेंडर और वाटर रेस्क्यू बोट्स की क्षमताओं का प्रदर्शन किया गया, जो इसकी बढ़ी हुई तैयारी को दर्शाता है।

HRET क्रैश फायर टेंडर क्या है और क्यों खास है

गुवाहाटी एयरपोर्ट पर शामिल किया गया HRET क्रैश फायर टेंडर आधुनिक अग्निशमन तकनीक का एक उन्नत उदाहरण है। इसे विशेष रूप से विमान दुर्घटना या आग जैसी गंभीर स्थितियों में तेजी से प्रतिक्रिया देने के लिए डिजाइन किया गया है।

इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसका हाई रीच एक्सटेंडेबल टर्रेट है, जो ऊंचाई पर स्थित विमान के हिस्सों तक आसानी से पहुंच सकता है। इससे फायरफाइटर्स को आग पर तुरंत काबू पाने और रेस्क्यू ऑपरेशन को तेजी से अंजाम देने में मदद मिलती है।

यह तकनीक न केवल आग बुझाने की क्षमता को बढ़ाती है, बल्कि यात्रियों और क्रू मेंबर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी अहम भूमिका निभाती है।

वाटर रेस्क्यू बोट्स से बढ़ी बहुआयामी क्षमता

एयरपोर्ट प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करते हुए वाटर रेस्क्यू बोट्स को भी शामिल किया है। इस कदम से एयरपोर्ट की आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता अब केवल एयरसाइड और लैंडसाइड तक सीमित नहीं रही, बल्कि आसपास के जल क्षेत्रों तक भी विस्तारित हो गई है।

यह सुविधा विशेष रूप से उन परिस्थितियों में उपयोगी है जब विमान या किसी अन्य आपात स्थिति में पानी से संबंधित रेस्क्यू ऑपरेशन की आवश्यकता होती है। इसके साथ ही यह गुवाहाटी एयरपोर्ट को क्षेत्र के उन चुनिंदा हवाई अड्डों में शामिल करता है, जिनके पास मल्टी-डोमेन इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम मौजूद है।

आपात स्थिति से निपटने को तैयार गुवाहाटी एयरपोर्ट, नई तकनीक शामिल

एयरपोर्ट की सुरक्षा नीति और ARFF टीम की भूमिका

गुवाहाटी एयरपोर्ट की Aircraft Rescue and Fire Fighting (ARFF) टीम “We Serve to Save” के सिद्धांत पर कार्य करती है। यह टीम DGCA (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन) के सुरक्षा मानकों के अनुरूप लगातार अपनी सेवाएं प्रदान कर रही है।

ARFF यूनिट को अत्याधुनिक Rosenbauer क्रैश फायर टेंडर्स, विशेष रेस्क्यू उपकरणों और प्रशिक्षित कर्मियों से लैस किया गया है। टीम नियमित रूप से मॉक ड्रिल्स, फायर सेफ्टी ट्रेनिंग और जागरूकता अभियानों के जरिए अपनी तैयारी को मजबूत बनाए रखती है। इस निरंतर प्रशिक्षण और अभ्यास का उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया देना है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा सके।

तकनीक आधारित सुरक्षा व्यवस्था की ओर कदम

गुवाहाटी एयरपोर्ट पर किए गए ये नए अपग्रेड इस बात का संकेत हैं कि भारत में हवाई अड्डों की सुरक्षा व्यवस्था अब तेजी से तकनीक आधारित हो रही है। HRET क्रैश फायर टेंडर जैसी आधुनिक मशीनें और वाटर रेस्क्यू बोट्स जैसी सुविधाएं यह दर्शाती हैं कि एयरपोर्ट प्रशासन अब हर प्रकार की आपात स्थिति के लिए बहुस्तरीय तैयारी कर रहा है।

यह सिस्टम न केवल आग जैसी घटनाओं के लिए तैयार है, बल्कि जल, जमीन और हवा तीनों प्रकार की आपात स्थितियों से निपटने में सक्षम बन रहा है।

यात्रियों की सुरक्षा को मिली नई मजबूती

इस उन्नत सुरक्षा प्रणाली का सबसे बड़ा लाभ यात्रियों को मिलेगा। किसी भी दुर्घटना या आपात स्थिति में तेज प्रतिक्रिया समय से जानमाल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

एयरपोर्ट प्रशासन का उद्देश्य यात्रियों को एक सुरक्षित और भरोसेमंद यात्रा अनुभव प्रदान करना है। इस दिशा में किए गए ये तकनीकी सुधार गुवाहाटी एयरपोर्ट को उत्तर-पूर्व भारत के प्रमुख और सुरक्षित हवाई अड्डों में शामिल करते हैं।

क्षेत्रीय महत्व और भविष्य की संभावनाएं

गुवाहाटी एयरपोर्ट न केवल असम बल्कि पूरे उत्तर-पूर्व भारत का एक प्रमुख प्रवेश द्वार है। ऐसे में यहां सुरक्षा व्यवस्था का मजबूत होना पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की आधुनिक तकनीकों का उपयोग अन्य हवाई अड्डों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है। आने वाले समय में भारत के अन्य एयरपोर्ट्स भी इसी तरह के मल्टी-डोमेन रेस्क्यू सिस्टम को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

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