शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। जानिए 17 अक्टूबर 2026 को सप्तमी तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त, मां कालरात्रि का धार्मिक महत्व, पूजन विधि, मंत्र और आरती से जुड़ी जानकारी।
शारदीय नवरात्रि का सातवां दिन 2026: शारदीय नवरात्रि में सप्तमी तिथि मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि को समर्पित मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि अपने भक्तों को भय और नकारात्मक शक्तियों से बचाती हैं। इस दिन विधि-विधान से पूजा, मंत्र जाप और आरती करने का विशेष महत्व है। वर्ष 2026 में सप्तमी तिथि 17 अक्टूबर को पड़ रही है। पूजा करने से पहले अपने शहर के पंचांग के अनुसार तिथि और शुभ मुहूर्त की पुष्टि जरूर करें।
शारदीय नवरात्रि 2026 में कब है सप्तमी तिथि?
शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। वर्ष 2026 में सप्तमी तिथि 17 अक्टूबर, शनिवार को पड़ रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार, तिथि की गणना सूर्योदय और चंद्रमा की स्थिति के आधार पर होती है। इसलिए पूजा का सटीक समय जानने के लिए अपने शहर के पंचांग का मिलान करना उचित रहता है।
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नवरात्रि के सातवें दिन सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल की सफाई करें। इसके बाद मां दुर्गा और मां कालरात्रि का ध्यान करते हुए दीपक जलाएं। श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करके मां से परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना करें।
मां कालरात्रि की पूजा का शुभ मुहूर्त
मां कालरात्रि की पूजा के लिए सुबह का समय सामान्य रूप से उपयुक्त माना जाता है। हालांकि, 17 अक्टूबर 2026 को सप्तमी तिथि के प्रारंभ और समापन का सटीक समय तथा पूजा का शुभ मुहूर्त स्थानीय पंचांग के अनुसार देखना चाहिए। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और पंचांग की गणना के कारण समय में अंतर हो सकता है।
पूजा के दौरान मां कालरात्रि को पुष्प, अक्षत, धूप और दीप अर्पित करें। अपनी श्रद्धा के अनुसार फल और मिठाई का भोग लगाएं। इसके बाद मां के मंत्र का जाप करें और अंत में आरती करें। पूजा के समय मन को शांत रखकर मां का ध्यान करना विशेष महत्व रखता है।
मां कालरात्रि का स्वरूप और धार्मिक महत्व
मां कालरात्रि नवदुर्गा का सातवां स्वरूप हैं। धार्मिक मान्यताओं में उनका स्वरूप अत्यंत शक्तिशाली बताया गया है। उनका वर्ण अंधकार के समान है, केश खुले हुए हैं और गले में विद्युत जैसी चमक वाली माला का वर्णन मिलता है। उनकी तीन आंखें हैं और उनका वाहन गर्दभ यानी गधा माना जाता है।
मां कालरात्रि का स्वरूप बुराई, भय और अज्ञान के विनाश का प्रतीक माना जाता है। उनके नाम में ‘काल’ समय और मृत्यु का बोध कराता है, जबकि ‘रात्रि’ अंधकार का प्रतीक है। मान्यता है कि मां अपने भक्तों के जीवन से भय और नकारात्मकता दूर करके उन्हें साहस प्रदान करती हैं।
इसी कारण मां कालरात्रि को शुभ फल देने वाली देवी के रूप में भी पूजा जाता है। भक्त उनसे जीवन की बाधाओं से मुक्ति, आत्मविश्वास और परिवार की सुरक्षा की प्रार्थना करते हैं। नवरात्रि का सातवां दिन बुराई पर अच्छाई की जीत और कठिन परिस्थितियों का साहस के साथ सामना करने का संदेश भी देता है।
मां कालरात्रि की पूजा विधि
नवरात्रि के सातवें दिन सुबह स्नान करके पूजा स्थल पर मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। मां कालरात्रि का ध्यान करते हुए दीपक जलाएं और धूप-अगरबत्ती अर्पित करें। इसके बाद पुष्प और अक्षत चढ़ाकर मां की आराधना करें। अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार फल या मिठाई का भोग लगाएं।
पूजा के दौरान मां कालरात्रि के मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें। इसके बाद दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ भी किया जा सकता है। अंत में मां की आरती करके परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना करें।
पूजा में श्रद्धा, स्वच्छता और मन की एकाग्रता को महत्वपूर्ण माना जाता है। व्रत रखने वाले लोग अपनी सेहत और पारिवारिक परंपरा के अनुसार व्रत का पालन कर सकते हैं।
मां कालरात्रि का मंत्र
मां कालरात्रि की पूजा में इस मंत्र का जाप किया जाता है।
ॐ देवी कालरात्र्यै नमः।
भक्त इस मंत्र का जाप श्रद्धा और एकाग्रता के साथ करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां कालरात्रि का स्मरण भय दूर करने, साहस बढ़ाने और जीवन में सकारात्मकता बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
मां कालरात्रि का ध्यान मंत्र भी प्रचलित है।
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा।
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥
इस मंत्र में मां कालरात्रि के पारंपरिक स्वरूप का वर्णन किया गया है। भक्त अपनी श्रद्धा और धार्मिक परंपरा के अनुसार इसका पाठ कर सकते हैं।
मां कालरात्रि की आरती
मां कालरात्रि की आरती नवरात्रि के सातवें दिन पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। आरती के दौरान दीपक जलाकर मां का ध्यान किया जाता है और उनसे परिवार की रक्षा तथा कल्याण की प्रार्थना की जाती है।
आरती के बाद मां को भोग अर्पित करें और प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांटें। पूजा का समापन मां दुर्गा के जयकारे और सुख-समृद्धि की प्रार्थना के साथ किया जा सकता है। आरती के लिए अपने घर या मंदिर में प्रचलित पारंपरिक मां कालरात्रि की आरती का पाठ करें।
मां कालरात्रि की पूजा का संदेश
मां कालरात्रि की आराधना को साहस, आत्मविश्वास और नकारात्मकता पर विजय का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि का सातवां दिन भक्तों को भय का सामना करने, कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
नोट: पूजा का सटीक शुभ मुहूर्त और सप्तमी तिथि का समय प्रकाशित करने से पहले अपने शहर के विश्वसनीय पंचांग से पुष्टि जरूर करें।









