मुजफ्फरपुर में करंट से झुलसी छात्राओं के परिजनों का गुस्सा फूटा, सड़क जाम कर स्कूल प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन

मुजफ्फरपुर के शाहबाजपुर स्कूल में हाईटेंशन तार से छात्राओं के झुलसने पर परिजनों ने सड़क जाम किया। इलाज, मुआवजे और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग उठाई।
मुजफ्फरपुर में करंट से झुलसी छात्राओं के परिजनों का गुस्सा फूटा, सड़क जाम कर स्कूल प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन
Photo Credit / Attribution: Google

मुजफ्फरपुर के अहियापुर थाना क्षेत्र स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय शाहबाजपुर में हाईटेंशन तार की चपेट में आकर छात्राओं के झुलसने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। घटना के बाद घायल बच्चियों के परिजनों का गुस्सा शुक्रवार को फूट पड़ा। इलाज में लापरवाही और स्कूल प्रशासन के कथित उदासीन रवैये से नाराज परिजनों तथा स्थानीय ग्रामीणों ने विद्यालय के सामने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया। इस दौरान मुख्य सड़क पर वाहनों

यह घटना 9 अक्टूबर 2026 की है। रिपोर्टों के अनुसार, विद्यालय में भोजनावकाश के दौरान छात्राएं खाना खाने के लिए छत पर गई थीं। इसी दौरान छत के पास से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन बिजली लाइन से जुड़े करंट की चपेट में आने से तीन छात्राएं झुलस गईं। हादसे के बाद विद्यालय परिसर में अफरा-तफरी मच गई। घायल बच्चियों को इलाज के लिए श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SKMCH) में भर्ती कराया गया। इनमें सातवीं कक्षा की छात्रा संध्या कुमारी की हालत गंभीर बताई गई है।

घटना के बाद से ही स्कूल परिसर में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि विद्यालय की छत के बेहद करीब से गुजर रहे हाईटेंशन तार को लेकर पहले भी चिंता जताई गई थी, लेकिन समय रहते सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल में बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ने आते हैं, इसलिए परिसर के आसपास बिजली के खतरनाक तारों की मौजूदगी को गंभीरता से लिया जाना चाहिए था। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

प्रदर्शन कर रहे परिजनों ने हादसे के बाद स्कूल प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि करंट से झुलसने के बाद बच्चियों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने के लिए जरूरी मदद नहीं मिली। परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विद्यालय का गेट समय पर नहीं खोला गया और परिसर में वाहन मौजूद होने के बावजूद घायल बच्चियों को अस्पताल ले जाने के लिए उपलब्ध नहीं कराया गया। इसके बाद स्थानीय लोगों ने निजी ऑटो की मदद से बच्चियों को अस्पताल पहुंचाया। स्कूल प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

इस मामले में सबसे ज्यादा चिंता संध्या कुमारी की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर है। रिपोर्ट के मुताबिक, करंट लगने से उसके हाथ को गंभीर नुकसान पहुंचा है। डॉक्टरों ने संक्रमण बढ़ने की स्थिति में दाहिना हाथ काटने की आशंका जताई है। इस खबर से परिवार सदमे में है। परिजनों को डर है कि यदि बच्ची को स्थायी शारीरिक नुकसान होता है, तो उसकी पढ़ाई और भविष्य पर भी असर पड़ सकता है। परिवार ने मांग की है कि संध्या का बेहतर से बेहतर इलाज कराया जाए और इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाए।

शुक्रवार को सड़क जाम के दौरान स्थानीय ग्रामीणों और परिजनों ने विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि घायल बच्चियों के इलाज की जिम्मेदारी तय की जाए और पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए। लोगों ने स्कूल के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन बिजली लाइन को हटाने या सुरक्षित दूरी पर करने की भी मांग उठाई, ताकि भविष्य में किसी दूसरे बच्चे के साथ इस तरह का हादसा न हो। उनके अनुसार, केवल जांच का आश्वासन देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा के लिए जमीन पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

प्रदर्शन की सूचना मिलने के बाद शिक्षा विभाग और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) दीपक कुमार ने परिजनों से बातचीत की और उनकी शिकायत सुनने के बाद जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया। अधिकारियों ने पीड़ित परिवार को इलाज और भविष्य के लिए हरसंभव मदद उपलब्ध कराने की बात भी कही। प्रशासन की पहल के बाद पुलिस और अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की, जिसके बाद सड़क जाम समाप्त कराया गया।

इस घटना ने स्कूलों में विद्यार्थियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विद्यालयों में बच्चों को सुरक्षित वातावरण देना शिक्षा विभाग और स्कूल प्रबंधन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। यदि किसी स्कूल परिसर के पास से हाईटेंशन बिजली लाइन गुजरती है, तो उसकी सुरक्षा का आकलन करना और आवश्यक सावधानियां बरतना जरूरी है। साथ ही, आपातकालीन स्थिति में घायल विद्यार्थियों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी होनी चाहिए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित विभागों को केवल इस घटना की जांच तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जिले के उन अन्य विद्यालयों की भी समीक्षा करनी चाहिए, जहां भवनों के पास से बिजली की हाईटेंशन लाइन गुजरती है। इससे संभावित खतरे की पहचान कर समय रहते सुरक्षा उपाय किए जा सकते हैं। हालांकि, संबंधित स्कूल में सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं, यह जांच के निष्कर्षों से ही स्पष्ट होगा।

फिलहाल, पीड़ित परिवार की प्राथमिकता संध्या कुमारी समेत घायल बच्चियों का समुचित इलाज और उनका भविष्य सुरक्षित करना है। परिजन चाहते हैं कि बच्चियों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिले, आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए और हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय हो। प्रशासन की ओर से जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। अब देखना होगा कि जांच में क्या सामने आता है और घायल छात्राओं तथा उनके परिवारों को किस तरह की सहायता मिलती है।

Leave a comment