उत्तराखंड के हल्द्वानी में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचने के बाद पेयजल संकट गहरा गया है। कई इलाकों में नलकूप ठप होने से हजारों लोग प्रभावित हैं और लोगों को टैंकरों के सहारे पानी जुटाना पड़ रहा है।
हल्द्वानी: उत्तराखंड के तराई-भाबर क्षेत्र में भीषण गर्मी के बीच हल्द्वानी में पेयजल संकट लगातार बढ़ता जा रहा है। तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचने के बाद कई इलाकों में पानी की सप्लाई प्रभावित हुई है। नलकूप खराब होने और सीमित जलापूर्ति की वजह से हजारों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों से पानी पहुंचाने की व्यवस्था की गई है, लेकिन लोगों का कहना है कि इससे जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है।
नलकूप ठप होने से बढ़ी पानी की किल्लत
हल्द्वानी में बढ़ती गर्मी के साथ पेयजल संकट भी गंभीर होता जा रहा है। तेरह बीघा क्षेत्र का नलकूप बंद होने से इंदिरानगर इलाके की बड़ी आबादी प्रभावित हुई है। वहीं भगवानपुर और ऊंचापुल क्षेत्र की कई कॉलोनियों में भी नियमित पानी की सप्लाई नहीं हो पा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि एक महीने बाद नलकूप ठीक होने के बावजूद कई इलाकों में पानी नहीं पहुंच रहा है। गर्मी के कारण पानी की मांग बढ़ी है, लेकिन सप्लाई सामान्य नहीं हो सकी है। ऐसे में लोगों को निजी टैंकरों का सहारा लेना पड़ रहा है।
टैंकरों से हो रही सीमित सप्लाई
जल संस्थान की ओर से प्रभावित इलाकों में टैंकर भेजे जा रहे हैं। विभाग के अनुसार फिलहाल 10 सरकारी टैंकरों के जरिए पानी की आपूर्ति की जा रही है। इसके अलावा निजी अनुबंधित टैंकरों की संख्या भी बढ़ाई गई है ताकि ज्यादा इलाकों तक पानी पहुंचाया जा सके।
हालांकि क्षेत्रवासियों का कहना है कि टैंकरों की सप्लाई जरूरत के मुकाबले काफी कम है। कई परिवारों को लंबे इंतजार के बाद भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार निजी टैंकर मंगवाने में भी सक्षम नहीं हैं।
गर्मी बढ़ने के साथ बढ़ी लोगों की परेशानी
दमुवाढूंगा, कमलवुगांजा और पनियाली जैसे इलाकों के अंतिम छोर पर रहने वाले लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है। दिन में सीमित घंटों की सप्लाई होने से लोगों को पानी स्टोर करने में दिक्कत आ रही है।
स्थानीय लोगों ने जल संस्थान और सिंचाई विभाग से जल्द स्थायी समाधान की मांग की है। लोगों का कहना है कि गर्मी के मौसम में हर साल ऐसी स्थिति बनती है, लेकिन व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया जाता।











