हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र के कच्चा घाट और पुष्पावती पूठ में नावों का संचालन बिना लाइफ जैकेट के हो रहा है। जबलपुर और हमीरपुर हादसों के बाद भी प्रशासन की अनदेखी से श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
गढ़मुक्तेश्वर: हापुड़ के गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ के बीच नाव सुरक्षा व्यवस्था सवालों में है। कच्चा घाट लठीरा और पुष्पावती पूठ में बिना लाइफ जैकेट नावें चलाई जा रही हैं, जबकि इन घाटों पर रोज हजारों लोग गंगा स्नान के लिए पहुंचते हैं। हाल के नाव हादसों के बावजूद प्रशासन का ध्यान मुख्य घाटों तक सीमित नजर आ रहा है, जिससे संभावित दुर्घटना का खतरा बना हुआ है।
अस्थाई घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था कमजोर
गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र के कच्चा घाट लठीरा और पुष्पावती पूठ में नाव संचालन के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी सामने आ रही है। इन घाटों पर रोज बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए पहुंचते हैं, लेकिन नावों में लाइफ जैकेट जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन का ध्यान मुख्य घाटों तक सीमित रहता है, जबकि अस्थाई घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था लगभग न के बराबर है। नावों में क्षमता से अधिक लोगों को बैठाने की शिकायतें भी समय-समय पर सामने आती रही हैं।
हालिया हादसों के बाद भी नहीं बढ़ी सतर्कता
देश के अलग-अलग हिस्सों में हाल के दिनों में नाव हादसे सामने आए हैं। जबलपुर और हमीरपुर की घटनाओं के बाद भी स्थानीय स्तर पर सुरक्षा इंतजामों में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिख रहा। बुधवार को हमीरपुर में नाव पलटने की घटना के बाद फिर से घाटों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
श्रद्धालुओं का कहना है कि त्योहारों, पूर्णिमा और अमावस्या के दौरान घाटों पर भीड़ कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे समय में बिना सुरक्षा उपकरणों के नाव संचालन करना यात्रियों की जान जोखिम में डाल सकता है।
गंगा एक्सप्रेसवे क्षेत्र में भी बढ़ रही आवाजाही
शंकराटीला के पास गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य चल रहा है। यहां पुल बनने के बाद राहगीरों और यात्रियों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है। कई लोग वाहन रोककर गंगा स्नान और नाव यात्रा के लिए घाटों तक पहुंच रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मुख्य घाटों के साथ-साथ अस्थाई घाटों पर भी सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू किया जाए। नाविकों के लिए लाइफ जैकेट अनिवार्य करने और नियमित निगरानी की जरूरत बताई जा रही है, ताकि भविष्य में किसी संभावित हादसे को रोका जा सके।










