हरिद्वार में खून के सौदागरों का भंडाफोड़: चार महीने से चल रही थी कथित तस्करी, सपा नेता का बेटा मुख्य आरोपी; 27 यूनिट ब्लड बरामद

हरिद्वार के लक्सर में चार महीने से कथित खून तस्करी का नेटवर्क चल रहा था। पुलिस ने सपा नेता के बेटे समेत पांच आरोपियों को पकड़ा और 27 यूनिट ब्लड बरामद किया।
हरिद्वार में खून के सौदागरों का भंडाफोड़: चार महीने से चल रही थी कथित तस्करी, सपा नेता का बेटा मुख्य आरोपी; 27 यूनिट ब्लड बरामद
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हरिद्वार जिले के लक्सर में कथित खून की तस्करी के बड़े नेटवर्क का खुलासा होने के बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। पुलिस जांच के अनुसार, यह नेटवर्क करीब चार महीने से सक्रिय था और कथित तौर पर बिना अनुमति ब्लड डोनेशन कैंप लगाकर रक्त एकत्र किया जाता था। इसके बाद इस रक्त को दूसरे स्थानों पर भेजकर बेचने का आरोप है। मामले में बिजनौर के सपा नेता मदनलाल सैनी के बेटे दुष्यंत सैनी समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 27 यूनिट रक्त और 27 खाली ब्लड बैग बरामद किए हैं।

पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि लक्सर क्षेत्र में अप्रैल 2026 के आसपास ब्लड बैंक शुरू होने के बाद कथित गतिविधियां तेज हुईं। आरोप है कि अलग-अलग जगहों पर रक्तदान शिविर आयोजित किए जाते थे और वहां से एकत्र रक्त को लक्सर और बिजनौर से जुड़े ब्लड बैंकों तक पहुंचाया जाता था। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि पिछले चार महीनों में कितने कैंप लगाए गए और उनसे कितनी यूनिट रक्त एकत्र किया गया।

मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि इन कैंपों में बिना उचित अनुमति और आवश्यक चिकित्सकीय व्यवस्था के रक्त संग्रह किया जाता था। पुलिस के अनुसार, कैंप से एकत्र किए गए रक्त को दूसरे राज्यों और बिजनौर में कथित तौर पर बेचने की बात जांच में सामने आई है। हालांकि रक्त की बिक्री और पूरे नेटवर्क से जुड़े आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

पुलिस के मुताबिक, दुष्यंत सैनी को इस मामले में मुख्य आरोपियों में शामिल किया गया है। वह अपने पिता से जुड़े बिजनौर के ब्लड बैंक को भी देखता था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि ब्लड बैंक की वैध गतिविधियों और कथित अवैध रक्त संग्रह के बीच क्या संबंध था।

मामले का खुलासा तब हुआ जब पुलिस को लक्सर क्षेत्र में संदिग्ध तरीके से रक्त संग्रह और उसे बाहर ले जाने की सूचना मिली। इसके बाद पुलिस ने निगरानी बढ़ाई और कार्रवाई की। आरोपियों को पकड़ने के दौरान उनके पास से 27 यूनिट रक्त बरामद किया गया। इसके अलावा 27 खाली ब्लड बैग भी मिले, जिससे पुलिस को कथित नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिला।

जांच में यह भी सामने आया है कि रक्तदान शिविरों में लोगों को रक्तदान के नाम पर जोड़ा जाता था। अब पुलिस यह पता कर रही है कि इन शिविरों का आयोजन किन संस्थाओं या लोगों के नाम पर किया जाता था, रक्तदाताओं से क्या जानकारी साझा की जाती थी और रक्त एकत्र करने के बाद उसे कहां पहुंचाया जाता था।

इस मामले में सपा नेता के परिवार का नाम आने के कारण राजनीतिक चर्चा भी शुरू हो गई है। हालांकि किसी आरोपी का किसी राजनीतिक व्यक्ति से संबंध होना अपने आप में उस राजनीतिक व्यक्ति की आपराधिक भूमिका साबित नहीं करता। पुलिस की जांच में जिस व्यक्ति की जो भूमिका सामने आएगी, उसी के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सपा नेता मदनलाल सैनी ने आरोपों को राजनीतिक साजिश से जोड़ते हुए अपना पक्ष रखा है। उनका कहना है कि उनके बिजनौर में वर्षों से ब्लड बैंक का संचालन है और लक्सर में भी अप्रैल 2026 में ब्लड बैंक शुरू किया गया था। उनका दावा है कि उनके बेटे को राजनीतिक कारणों से फंसाया जा रहा है।

दूसरी ओर पुलिस पूरे मामले को केवल एक ब्लड कैंप तक सीमित नहीं मान रही है। पिछले महीनों में लगाए गए कैंपों, रक्त संग्रह के रिकॉर्ड और ब्लड बैंकों में जमा यूनिट का मिलान किया जा सकता है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि कथित तौर पर कितना रक्त एकत्र किया गया और उसका इस्तेमाल कहां हुआ।

स्वास्थ्य विभाग की भूमिका भी इस मामले में महत्वपूर्ण हो गई है। ब्लड बैंक और रक्त संग्रह से जुड़े नियमों के तहत यह सुनिश्चित किया जाता है कि रक्तदान और रक्त संग्रह की प्रक्रिया निर्धारित मानकों के अनुसार हो। इसलिए संबंधित ब्लड बैंकों के लाइसेंस, रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों की जांच की जा सकती है।

पुलिस यह भी जांच कर सकती है कि जिन शिविरों में रक्त लिया गया, वहां कौन-कौन से कर्मचारी मौजूद रहते थे। रक्त संग्रह करने वाले लोगों की योग्यता, प्रशिक्षण और चिकित्सकीय निगरानी की स्थिति भी जांच का हिस्सा बन सकती है।

बरामद 27 यूनिट रक्त की जांच भी महत्वपूर्ण होगी। पुलिस और स्वास्थ्य अधिकारी यह पता लगाएंगे कि रक्त किस समूह का है, किस कैंप से एकत्र किया गया था और उसे किस ब्लड बैंक या व्यक्ति तक पहुंचाया जाना था। उपलब्ध रिकॉर्ड के साथ इन यूनिटों का मिलान जांच को आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है।

कथित नेटवर्क में आर्थिक लेन-देन की भी जांच की जा सकती है। यदि रक्त को पैसे लेकर दूसरे स्थानों पर भेजने के सबूत मिलते हैं तो पुलिस बैंक खातों, मोबाइल फोन, डिजिटल भुगतान और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड को खंगाल सकती है।

जांच एजेंसियों के सामने यह भी सवाल है कि यदि यह गतिविधि कई महीनों से चल रही थी तो इसकी जानकारी संबंधित विभागों तक पहले क्यों नहीं पहुंची। अब पुलिस और स्वास्थ्य विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर सकते हैं कि संबंधित ब्लड बैंकों और कैंपों की निगरानी किस स्तर पर हुई थी।

मामले में गिरफ्तार पांच आरोपियों से पूछताछ के दौरान पुलिस को कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी मिलने की संभावना है। कैंप लगाने से लेकर रक्त संग्रह, भंडारण, परिवहन और कथित बिक्री तक की पूरी कड़ी की जांच की जा रही है।

यदि जांच में यह साबित होता है कि बिना अनुमति रक्तदान शिविर लगाए गए और निर्धारित नियमों का उल्लंघन करते हुए रक्त एकत्र किया गया, तो संबंधित आरोपियों पर लागू कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस की जांच से यह भी स्पष्ट होगा कि किस आरोपी की क्या भूमिका थी।

इस घटना ने रक्तदान शिविरों की निगरानी को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आम लोग रक्तदान को सामाजिक सेवा मानकर शिविरों में पहुंचते हैं। ऐसे में यदि किसी शिविर का इस्तेमाल गैरकानूनी तरीके से रक्त संग्रह या उसके व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए किया जाता है तो इससे लोगों के भरोसे पर भी असर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, रक्त संग्रह और भंडारण की प्रक्रिया में निर्धारित चिकित्सकीय मानकों का पालन जरूरी होता है। रक्त को सुरक्षित रखने, उसकी जांच करने और जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया नियंत्रित व्यवस्था के तहत होती है। इसलिए कथित अवैध संग्रह की जांच में स्वास्थ्य विभाग की तकनीकी रिपोर्ट अहम हो सकती है।

लक्सर में हुई कार्रवाई के बाद पुलिस अब पहले लगाए गए कैंपों की जानकारी जुटा रही है। यदि पिछले चार महीनों में कई जगह ऐसे शिविर लगाए गए थे तो आयोजकों, स्थानों और रक्त संग्रह की मात्रा का रिकॉर्ड तैयार किया जा सकता है।

मामले में ब्लड बैंक की भूमिका भी जांच के केंद्र में है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कैंपों से आने वाला रक्त किस रिकॉर्ड में दर्ज किया गया और क्या वास्तविक स्टॉक तथा दस्तावेजों में अंतर था। इसी तरह कथित रूप से बाहर भेजे गए रक्त की भी जानकारी जुटाई जा सकती है।

पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त जांच से मामले की कई परतें सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी जांची जा रही है।

कुल मिलाकर, हरिद्वार के लक्सर में करीब चार महीने से चल रहे कथित रक्त तस्करी नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस ने सपा नेता मदनलाल सैनी के बेटे दुष्यंत सैनी समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है और 27 यूनिट रक्त तथा 27 खाली ब्लड बैग बरामद किए हैं। जांच में बिना अनुमति ब्लड कैंप लगाने और रक्त को दूसरे स्थानों पर भेजकर बेचने के आरोप सामने आए हैं। वहीं सपा नेता ने अपने बेटे को राजनीतिक साजिश के तहत फंसाने का आरोप लगाया है। पुलिस अब कैंपों, ब्लड बैंकों, रक्त की आवाजाही और कथित आर्थिक लेन-देन की पूरी कड़ी खंगाल रही है।

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