हरियाली अमावस्या सावन मास का महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन भगवान शिव की पूजा, जलाभिषेक, दान, पितृ तर्पण और पौधारोपण जैसे कार्य करने की धार्मिक मान्यता है। श्रद्धालु इन उपायों से सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
हरियाली अमावस्या: सावन मास में आने वाली अमावस्या का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन भगवान शिव की आराधना के साथ जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पित करने, जरूरतमंदों को दान देने और पौधे लगाने की परंपरा है। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए इन कार्यों से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
भगवान शिव का करें जलाभिषेक
हरियाली अमावस्या के दिन भगवान शिव की पूजा करना शुभ माना जाता है। सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थल को स्वच्छ करें। इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए पूजा आरंभ करें। शिवलिंग पर जल और गंगाजल अर्पित किया जा सकता है।

जलाभिषेक के बाद शिवलिंग पर बेलपत्र, फूल और अन्य पूजन सामग्री चढ़ाएं। धूप और दीप जलाकर भगवान शिव की आरती करें। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार शिव मंत्र का जाप भी कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन में शिव आराधना करने से मनोकामनाओं की पूर्ति और परिवार की सुख-शांति की कामना की जाती है।
बेलपत्र और फूल अर्पित करना माना जाता है शुभ
भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का विशेष महत्व बताया गया है। हरियाली अमावस्या के अवसर पर शिवलिंग पर साफ और साबुत बेलपत्र अर्पित किए जा सकते हैं। बेलपत्र चढ़ाते समय भगवान शिव का ध्यान करके अपनी मनोकामना प्रकट करने की परंपरा है।
इसके अलावा शिवलिंग पर सफेद फूल अर्पित करना भी पूजा का हिस्सा माना जाता है। पूजा करते समय मन को शांत रखने और भगवान शिव का स्मरण करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं में पूजा की सफलता के लिए श्रद्धा और सकारात्मक भाव को महत्वपूर्ण माना गया है।
पितरों का करें स्मरण और दान
अमावस्या तिथि को पितरों के स्मरण के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन परिवार के पूर्वजों को याद करते हुए उनके निमित्त तर्पण किया जा सकता है। जिन परिवारों में पितृ तर्पण की विशेष परंपरा है, वे अपने रीति-रिवाज और धार्मिक विधि के अनुसार यह कार्य कर सकते हैं।
हरियाली अमावस्या पर जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना और अपनी क्षमता के अनुसार दान करना भी शुभ माना जाता है। अनाज, वस्त्र और दैनिक उपयोग की जरूरी वस्तुओं का दान किया जा सकता है। मान्यता है कि सेवा और दान से मन को शांति मिलती है और पुण्य की प्राप्ति होती है।
पौधारोपण से जुड़ा है पर्व
हरियाली अमावस्या का संबंध प्रकृति और हरियाली से भी माना जाता है। सावन के दौरान चारों ओर हरियाली बढ़ने के कारण इस दिन पौधारोपण की परंपरा कई क्षेत्रों में देखने को मिलती है।
इस अवसर पर घर, मंदिर या सार्वजनिक स्थान पर पौधे लगाए जा सकते हैं। पौधा लगाने के साथ उसकी नियमित देखभाल का संकल्प लेना भी जरूरी है। धार्मिक आस्था के साथ देखा जाए तो प्रकृति की सेवा भी पुण्य कार्य मानी जाती है। वहीं पर्यावरण की दृष्टि से पौधारोपण आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उपयोगी है।
व्रत में सात्विकता और संयम रखें
जो श्रद्धालु हरियाली अमावस्या का व्रत रखते हैं, उन्हें अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार उपवास करना चाहिए। व्रत के दौरान सात्विक भोजन, संयम और पूजा-पाठ पर ध्यान देने की परंपरा है।
इस दिन क्रोध, विवाद और नकारात्मक विचारों से बचने का प्रयास करना चाहिए। किसी जरूरतमंद की सहायता करना और परिवार के साथ शांतिपूर्ण वातावरण में पूजा करना शुभ माना जाता है।
हरियाली अमावस्या पर भगवान शिव की पूजा के साथ दान, पितरों का स्मरण और पौधारोपण जैसे कार्य किए जा सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन कार्यों से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होने की कामना की जाती है। साथ ही यह पर्व प्रकृति संरक्षण और समाज के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी देता है।











