हवन की भस्म का तिलक एक राशि तक, यानी लगभग एक महीने तक लगाया जा सकता है। ज्योतिषाचार्य डॉ. बसवराज गुरुजी के अनुसार यह आज्ञा चक्र को सक्रिय कर मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास प्रदान करता है। विशेष अवसरों पर इसे धारण करना शुभ माना गया है।
Hawan Bhasm Tilak Benefits: हिंदू धार्मिक परंपराओं में हवन की भस्म का तिलक एक महीने तक, यानी जब तक सूर्य एक राशि में रहता है, धारण किया जा सकता है। ज्योतिषाचार्य डॉ. बसवराज गुरुजी के अनुसार इसे माथे पर लगाने से आज्ञा चक्र सक्रिय होता है, मानसिक संतुलन बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा मिलती है। यह प्रथा धार्मिक अनुष्ठानों के बाद अपनाई जाती है और परीक्षा, इंटरव्यू या अन्य महत्वपूर्ण कार्यों से पहले शुभ मानी जाती है, क्योंकि इससे आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच मजबूत होती है।
एक राशि तक धारण किया जा सकता है भस्म तिलक
डॉ. बसवराज गुरुजी के अनुसार, हवन से प्राप्त भस्म का तिलक तब तक लगाया जा सकता है जब तक Sun एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश न कर ले। ज्योतिषीय दृष्टि से सूर्य को समस्त जगत की चेतना और ऊर्जा का स्रोत माना गया है। सूर्य पंचतत्वों का प्रतिनिधित्व करता है और जीवन शक्ति का आधार है।
ज्योतिष में सूर्य लगभग एक महीने तक एक ही राशि में रहता है। इसलिए गुरुजी का कहना है कि भस्म तिलक को एक महीने तक सुरक्षित रखकर माथे पर लगाया जा सकता है। जब सूर्य अगली राशि में प्रवेश करे, तब उस भस्म को किसी पवित्र नदी में विसर्जित किया जा सकता है या किसी स्वच्छ और पवित्र स्थान पर आदरपूर्वक रखा जा सकता है।
उनका मानना है कि इस विधि का पालन करने से तिलक का शुभ प्रभाव बना रहता है और व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
आज्ञा चक्र से जुड़ा है तिलक का महत्व
हिंदू मान्यताओं में माथे के मध्य भाग को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। यही स्थान आज्ञा चक्र का केंद्र माना जाता है। योग और आध्यात्मिक परंपराओं में आज्ञा चक्र को चेतना, अंतर्ज्ञान और मानसिक संतुलन का केंद्र कहा गया है।
गुरुजी बताते हैं कि जब भस्म का तिलक माथे पर लगाया जाता है, तो यह आज्ञा चक्र को सक्रिय करता है। इससे व्यक्ति की एकाग्रता बढ़ती है, मानसिक स्पष्टता आती है और नकारात्मक विचारों में कमी होती है। तिलक को दिव्य ऊर्जा का प्रतीक भी माना गया है, जो व्यक्ति को सात्विक अवस्था की ओर ले जाता है।
पुराणों में भी तिलक का उल्लेख मिलता है। कहा जाता है कि प्राचीन काल में असुर भी तिलक धारण करते थे। उनके पास शक्ति तो अपार थी, लेकिन सही दिशा और विवेक के अभाव में वे पतन की ओर बढ़े। इससे यह संदेश मिलता है कि शक्ति के साथ संतुलित बुद्धि भी आवश्यक है।

भस्म में छिपे हैं औषधीय गुण
हवन में जो सामग्री उपयोग की जाती है, उसमें घी, लकड़ी और विभिन्न प्रकार की जड़ी-बूटियां शामिल होती हैं। जब यह सब अग्नि में आहुति के रूप में समर्पित किया जाता है, तो उससे उत्पन्न भस्म में इन तत्वों के सूक्ष्म गुण माने जाते हैं।
गुरुजी का कहना है कि भस्म में मौजूद घी और औषधीय जड़ी-बूटियों के तत्व शरीर और मन पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो जड़ी-बूटियों में प्राकृतिक गुण होते हैं, जो वातावरण को शुद्ध करने और मानसिक तनाव कम करने में सहायक हो सकते हैं।
मान्यता यह भी है कि भस्म का तिलक नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और व्यक्ति के चारों ओर एक सकारात्मक आभामंडल बनाता है। इससे मन की भावनाएं संतुलित रहती हैं और निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होती है।
विशेष अवसरों पर क्यों लगाया जाता है भस्म तिलक?
डॉ. बसवराज गुरुजी के अनुसार, भस्म का तिलक विशेष अवसरों पर लगाना शुभ माना जाता है। परीक्षा देने जा रहे छात्र, नौकरी के इंटरव्यू में शामिल होने वाले युवा, विवाह संबंधी बातचीत में भाग लेने वाले लोग या किसी महत्वपूर्ण सौदे के लिए जा रहे व्यक्ति इसे धारण कर सकते हैं।
गुरुजी का मानना है कि यह तिलक व्यक्ति को आत्मविश्वास देता है और सकारात्मक सोच विकसित करता है। अदालत में सुनवाई, भूमि सौदा या अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के समय भी इसे लगाने की परंपरा देखी जाती है।
हालांकि यह पूरी तरह आस्था का विषय है, लेकिन इसे धारण करने वाले कई लोग मानसिक शांति और आत्मबल में वृद्धि का अनुभव करते हैं।
आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि का संतुलन
भस्म तिलक का महत्व केवल धार्मिक मान्यताओं तक सीमित नहीं है। इसे आध्यात्मिक साधना और मानसिक अनुशासन का प्रतीक भी माना जाता है। माथे पर तिलक लगाने की क्रिया व्यक्ति को यह याद दिलाती है कि जीवन में पवित्रता, संयम और सकारात्मक सोच का स्थान सर्वोपरि है।
साथ ही, यह भी समझना जरूरी है कि हर धार्मिक परंपरा का मूल उद्देश्य व्यक्ति को बेहतर बनाना है। भस्म तिलक भी उसी दिशा में एक प्रतीकात्मक कदम है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसे श्रद्धा और समझ के साथ अपनाया जाए, तो यह मानसिक शांति और आत्मविश्वास को मजबूत करने में सहायक हो सकता है।











