विधानसभा में राष्ट्रगान-वंदे मातरम् पर 28 मिनट तक तीखी तकरार: BJP-कांग्रेस आमने-सामने, विपक्ष ने किया वाकआउट

हिमाचल विधानसभा में राष्ट्रगान और वंदे मातरम् को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष में तीखी बहस हुई। हंगामे के बीच विपक्ष ने वाकआउट किया।
विधानसभा में राष्ट्रगान-वंदे मातरम् पर 28 मिनट तक तीखी तकरार: BJP-कांग्रेस आमने-सामने, विपक्ष ने किया वाकआउट
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शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होते ही राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव देखने को मिला। विधानसभा परिसर से लेकर सदन के अंदर तक कांग्रेस और भाजपा विधायक आमने-सामने नजर आए। विवाद इतना बढ़ गया कि सदन में करीब 28 मिनट तक तीखी तकरार और नारेबाजी होती रही और अंत में विपक्ष ने वाकआउट कर दिया। इससे विधानसभा की कार्यवाही भी प्रभावित हुई।

विवाद की शुरुआत सत्र के पहले दिन हुई थी। सदन की कार्यवाही शुरू होने पर राष्ट्रगान हुआ, लेकिन इसके बाद वंदे मातरम् नहीं गाए जाने को लेकर भाजपा विधायकों ने सवाल उठाया। भाजपा विधायक विपिन सिंह परमार ने इस मुद्दे को सदन में उठाने की अनुमति मांगी और कहा कि राष्ट्रगीत को लेकर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। इसके बाद विपक्षी सदस्यों ने इस मुद्दे पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई।

मामला धीरे-धीरे इतना गरमा गया कि सदन में दोनों पक्षों के सदस्य एक-दूसरे के सामने आ गए। भाजपा की ओर से वंदे मातरम् नहीं गाए जाने को मुद्दा बनाया गया, जबकि कांग्रेस की ओर से भाजपा पर राष्ट्रगान के कथित अपमान का आरोप लगाया गया। दोनों पक्षों की ओर से नारेबाजी के कारण विधानसभा की कार्यवाही सामान्य तरीके से आगे नहीं बढ़ सकी।

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने इस पूरे मामले में विधानसभा की CCTV फुटेज सार्वजनिक करने की मांग की। उनका कहना था कि शुक्रवार की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग सामने आने से यह स्पष्ट हो जाएगा कि राष्ट्रगान के दौरान वास्तव में क्या हुआ था। उन्होंने आरोपों की पुष्टि नहीं होने पर मुख्यमंत्री से सदन के भीतर और बाहर माफी मांगने की मांग भी रखी।

वहीं मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए भाजपा विधायकों पर राष्ट्रगान के प्रति अनादर का आरोप लगाया। दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात पर कायम रहे और सदन में बहस लगातार तेज होती गई। इस दौरान सदस्यों के बीच नारेबाजी भी हुई, जिससे माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया।

विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया को स्थिति संभालने के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। दूसरे दिन भी विवाद खत्म नहीं हुआ और राष्ट्रगान तथा वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी रहे। रिपोर्टों के अनुसार कार्यवाही दो बार स्थगित की गई और बाद में सदन को सोमवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

विवाद का असर विधानसभा परिसर के बाहर भी दिखाई दिया। कांग्रेस और भाजपा दोनों ने अलग-अलग प्रदर्शन किए। मुख्यमंत्री सुक्खू, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, मंत्रियों और कांग्रेस विधायकों ने विपक्ष पर राष्ट्रगान के अपमान का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। दूसरी ओर जयराम ठाकुर के नेतृत्व में भाजपा विधायकों ने भी विरोध जताया और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

भाजपा का कहना है कि वंदे मातरम् को लेकर नियम और परंपरा की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। पार्टी के विधायकों ने सवाल उठाया कि अगर विधानसभा सत्र की शुरुआत में राष्ट्रगान कराया जा सकता है तो राष्ट्रगीत के गायन को लेकर आपत्ति क्यों है। दूसरी ओर सत्ता पक्ष का कहना है कि भाजपा इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देकर सदन की कार्यवाही बाधित कर रही है।

इस विवाद ने विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत पर ही राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। राज्य में पहले से कई राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दे चर्चा में हैं, लेकिन सदन की शुरुआती कार्यवाही राष्ट्रगान और वंदे मातरम् को लेकर हुए विवाद में उलझ गई। इससे विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तनाव और बढ़ गया है।

जयराम ठाकुर ने मामले को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अगर भाजपा विधायकों पर लगाए गए आरोप गलत साबित होते हैं तो मुख्यमंत्री को माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने CCTV फुटेज को सार्वजनिक करने की मांग को इसलिए महत्वपूर्ण बताया क्योंकि इससे सदन में शुक्रवार को हुई घटना की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

वहीं मुख्यमंत्री सुक्खू का कहना है कि राष्ट्रगान का सम्मान हर सदस्य की जिम्मेदारी है। कांग्रेस का आरोप है कि विपक्ष ने राष्ट्रगान के दौरान उचित सम्मान नहीं दिखाया। हालांकि इस आरोप को लेकर भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि वीडियो रिकॉर्डिंग सामने आने के बाद ही सच्चाई स्पष्ट होगी।

मामले में विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाना अध्यक्ष की जिम्मेदारी है, लेकिन जब दोनों पक्ष नारेबाजी और विरोध पर उतर आए तो कार्यवाही रोकनी पड़ी। पहले दिन तो सदन की शुरुआत के करीब 10-11 मिनट के भीतर ही हंगामे के कारण कार्यवाही स्थगित कर दी गई थी।

दूसरे दिन भी स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं हुआ। प्रश्नकाल के बाद जयराम ठाकुर ने पॉइंट ऑफ ऑर्डर के जरिए शुक्रवार की घटना का मुद्दा उठाया। उन्होंने CCTV रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराने की मांग दोहराई। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्य फिर आमने-सामने आ गए और नारेबाजी शुरू हो गई।

राजनीतिक रूप से यह विवाद कांग्रेस और भाजपा के बीच बढ़ती खींचतान का नया उदाहरण बन गया है। राष्ट्रगान और वंदे मातरम् जैसे राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े मुद्दे पर दोनों दलों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इसके चलते विधानसभा का महत्वपूर्ण मानसून सत्र शुरुआती दिनों में ही हंगामे की भेंट चढ़ता दिखाई दे रहा है।

विधानसभा में हुए इस घटनाक्रम के बीच अब सबकी नजर आगे की कार्यवाही पर है। विपक्ष CCTV फुटेज की मांग पर कायम है, जबकि सत्ता पक्ष राष्ट्रगान के कथित अपमान को लेकर विपक्ष से जवाब मांग रहा है। ऐसे में संभावना है कि अगले कार्यदिवस में भी यह मुद्दा सदन में राजनीतिक टकराव का कारण बन सकता है।

फिलहाल हिमाचल विधानसभा में राष्ट्रगान और वंदे मातरम् को लेकर विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। भाजपा और कांग्रेस दोनों अपने-अपने आरोपों पर कायम हैं। विपक्ष CCTV फुटेज जारी करने की मांग कर रहा है, जबकि मुख्यमंत्री सुक्खू विपक्ष पर राष्ट्रगान के अपमान का आरोप लगा रहे हैं। हंगामे और नारेबाजी के कारण विधानसभा की कार्यवाही प्रभावित हुई और विपक्ष ने वाकआउट किया।

 

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