शिमला। हिमाचल प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर पिछले कुछ समय से चल रही चर्चाओं के बीच कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल ने स्थिति को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी है। शिमला स्थित कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में लगातार बैठकों के बाद रजनी पाटिल ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की ओर से मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अभी तक उनके पास कोई प्रस्ताव नहीं आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब मुख्यमंत्री की तरफ से प्रस्ताव आएगा, तभी इस दिशा में आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। ऐसे में फिलहाल मंत्रिमंडल में नए चेहरों को शामिल करने को लेकर चल रही अटकलों पर कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।
रजनी पाटिल ने यह भी कहा कि पार्टी संगठन और सरकार से जुड़े कई विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई है। कांग्रेस की बैठकों में संगठन के कामकाज, जिला और ब्लॉक स्तर की गतिविधियों, आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों तथा पार्टी के अंदर सामने आ रही शिकायतों पर भी विचार किया गया। उनके मुताबिक बड़ी संख्या में जिला अध्यक्षों ने ब्लॉक स्तर पर समन्वय और संवाद की समस्या की शिकायत की है। उन्होंने संगठनात्मक अनुशासन को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि पार्टी के भीतर किसी भी तरह की अनुशासनहीनता को लगातार नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
इसी सिलसिले में उन्होंने हिमाचल सरकार में कैबिनेट मंत्री जगत सिंह नेगी की हालिया बयानबाजी पर भी टिप्पणी की। रजनी पाटिल ने कहा कि संगठन सृजन अभियान समेत पार्टी के आंतरिक मामलों को लेकर नेताओं को सार्वजनिक बयान देते समय संयम रखना चाहिए। उन्होंने नेगी को इस तरह की बयानबाजी से बचने की नसीहत दी और संकेत दिया कि अगर भविष्य में पार्टी अनुशासन से जुड़ी ऐसी स्थिति दोबारा सामने आती है तो संगठन कार्रवाई पर विचार कर सकता है। हालांकि पाटिल ने यह भी कहा कि किसी भी बड़े संगठन में मतभेद या आपसी खींचतान पूरी तरह असामान्य नहीं है और सरकार तथा संगठन के बीच समन्वय बनाए रखने की कोशिश जारी है।
कैबिनेट विस्तार की बात करें तो इससे पहले भी हिमाचल कांग्रेस में इसको लेकर कई दौर की चर्चाएं सामने आ चुकी हैं। सितंबर के शुरुआती दिनों में रिपोर्टों में कहा गया था कि मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर पार्टी हाईकमान के स्तर पर चर्चा होनी थी और मंत्रियों के कामकाज का फीडबैक भी लिया जा रहा था। एक रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी नेतृत्व ने मंत्रियों के प्रदर्शन का रिपोर्ट कार्ड मांगा था, जिसके चलते विस्तार का फैसला आगे खिसकने की संभावना जताई गई थी।
मंत्रिमंडल विस्तार के साथ कुछ अन्य राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर भी चर्चा रही है। रिपोर्टों में मुख्य सचेतक और विधानसभा उपाध्यक्ष जैसे पदों पर नियुक्ति की संभावनाओं का उल्लेख किया गया था। हालांकि इन नियुक्तियों को लेकर भी अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व के स्तर पर होना बताया गया था। ऐसे में रजनी पाटिल का यह कहना कि मुख्यमंत्री की तरफ से अभी कोई प्रस्ताव नहीं आया है, यह संकेत देता है कि फिलहाल प्रक्रिया औपचारिक निर्णय के चरण में नहीं पहुंची है।
रजनी पाटिल ने पार्टी की आगामी चुनावी तैयारियों को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने 2027 के हिमाचल विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठन को सक्रिय करना शुरू कर दिया है। पार्टी आने वाले समय में जनता के बीच अपने कार्यक्रमों और मुद्दों को लेकर जाएगी। उन्होंने पेपर लीक से जुड़े मामलों को भी युवाओं से संबंधित प्रमुख मुद्दे के रूप में उठाया और दावा किया कि इन घटनाओं का युवाओं पर गंभीर असर पड़ा है। उनके इन आंकड़ों और दावों को कांग्रेस के राजनीतिक पक्ष के रूप में देखा जाना चाहिए।
हिमाचल कांग्रेस की हालिया गतिविधियों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का मुद्दा भी प्रमुख रहा है। 25 सितंबर को कांग्रेस ने शिमला में चुनाव विभाग के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था। पार्टी नेताओं ने SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
इसी मुद्दे पर रजनी पाटिल ने प्रेस वार्ता में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कठोर शब्दों का इस्तेमाल किया और कांग्रेस की ओर से भविष्य में EVM के इस्तेमाल के खिलाफ मांग उठाने की बात कही। उन्होंने चुनाव आयोग और भाजपा के बीच मिलीभगत का आरोप भी लगाया। ये सभी बातें कांग्रेस नेता द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं; इन्हें स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।
चुनाव आयोग की ओर से SIR और उसके तहत लिए गए फैसलों को लेकर अलग पक्ष भी सामने आया है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक चुनाव आयोग ने कहा है कि आयोग के भीतर अलग-अलग राय और टिप्पणियां संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा होती हैं तथा SIR से जुड़े अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए। वहीं, मीडिया रिपोर्टों में चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर आपत्तियां दर्ज किए जाने की बात सामने आई है। इसलिए इस पूरे विवाद में राजनीतिक आरोपों और संस्थागत पक्ष को अलग-अलग समझना जरूरी है।
रजनी पाटिल ने कहा कि मतदाता सूची और कथित वोट चोरी के मुद्दे को लेकर कांग्रेस अपना आंदोलन जारी रखेगी। उन्होंने सोमवार को हिमाचल प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करने की बात भी कही। इससे स्पष्ट है कि चुनाव आयोग और SIR का मुद्दा आने वाले दिनों में हिमाचल कांग्रेस के राजनीतिक कार्यक्रमों में प्रमुख स्थान रख सकता है।
दूसरी ओर, हिमाचल में कैबिनेट विस्तार का मुद्दा अलग स्तर पर पार्टी संगठन और सरकार के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। सितंबर में सामने आई रिपोर्टों में क्षेत्रीय संतुलन, महिला प्रतिनिधित्व और संभावित नए चेहरों को लेकर भी चर्चाएं थीं। कांग्रेस के 40 विधायकों में महिला प्रतिनिधित्व को लेकर भी चर्चा सामने आई थी। हालांकि कौन मंत्री बनेगा, किसे कौन-सा विभाग मिलेगा या विस्तार कब होगा, इस पर अभी कोई अंतिम आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
रजनी पाटिल के ताजा बयान के बाद फिलहाल इतना स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री की ओर से औपचारिक प्रस्ताव आने के बाद ही मंत्रिमंडल विस्तार की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। साथ ही पार्टी नेतृत्व संगठन के भीतर अनुशासन और नेताओं के सार्वजनिक बयानों को लेकर भी निगरानी बनाए हुए है। मंत्री जगत सिंह नेगी को दी गई सार्वजनिक नसीहत इसी व्यापक संगठनात्मक अनुशासन की कवायद का हिस्सा बताई जा रही है। कैबिनेट में नए चेहरों को लेकर अंतिम तस्वीर अब मुख्यमंत्री के प्रस्ताव और पार्टी हाईकमान के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी।










